शहडोल : चार माह शेष, सेवानिवृत्ति की आहट और विभागीय फैसलों पर सवाल , एक अधीक्षिका को दो छात्रावासों का प्रभार—नियम या जुगाड़? बिना नोटिस निलंबन का आरोप; विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
चार माह शेष, सेवानिवृत्ति की आहट और विभागीय फैसलों पर सवाल ,
एक अधीक्षिका को दो छात्रावासों का प्रभार—नियम या जुगाड़?
बिना नोटिस निलंबन का आरोप; विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
शहडोल। जनजातीय कार्य विभाग और राज्य शिक्षा केंद्र से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर एक ही अधीक्षिका को अलग-अलग विभागों के अधीन संचालित दो छात्रावासों का प्रभार दिए जाने का मामला सामने आया है, वहीं दूसरी ओर छतवई संकुल के बिजौरी स्कूल में सहायक शिक्षक अखिलेश प्रताप सिंह के निलंबन को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या कार्रवाई से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया था।
इन दोनों मामलों को लेकर विभागीय स्तर पर पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित आदेशों की जांच आवश्यक है।
दो छात्रावास, दो विभाग और एक ही अधीक्षिका
जानकारी के अनुसार सोहागपुर स्थित सीनियर आदिवासी कन्या छात्रावास जनजातीय कार्य विभाग के अधीन संचालित है, जबकि नेताजी सुभाष चंद्र बोस 50 सीटर छात्रावास राज्य शिक्षा केन्द्र अंतर्गत आता है। आरोप है कि दोनों छात्रावासों का प्रभार लंबे समय से एक ही अधीक्षिका प्रतिभा के पास है।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल सामने आता है—जब दोनों छात्रावास अलग-अलग विभागीय व्यवस्थाओं के अधीन हैं, तो एक ही कर्मचारी को दोनों का प्रभार देने का अधिकार किस सक्षम अधिकारी के पास है? क्या इसके लिए दोनों विभागों की अनुमति या सक्षम स्तर का पृथक आदेश लिया गया? यदि आदेश जारी हुआ है तो उसमें किस शासन निर्देश या नियम का आधार बनाया गया है?
प्रभार की रेवड़ी या विभागीय व्यवस्था?
डबल प्रभार को लेकर विभागीय सूत्रों के बीच भी अलग-अलग चर्चाएं हैं। यदि यह व्यवस्था रिक्त पद अथवा प्रशासनिक आवश्यकता के कारण की गई है तो संबंधित आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रभार नियमों के तहत दिया गया है अथवा किसी विशेष प्रशासनिक व्यवस्था के तहत।
दूसरी ओर यदि दोनों विभागों के नियम अलग हैं, तो एक ही अधिकारी/कर्मचारी को दोनों संस्थानों का दायित्व सौंपने के लिए सक्षम स्वीकृति किस स्तर से मिली, यह भी जांच का विषय बनता है।
बिना कारण बताओ नोटिस निलंबन का आरोप
इसी बीच छतवई संकुल के बिजौली स्कूल में सहायक शिक्षक अखिलेश प्रताप सिंह के निलंबन का मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए बिना निलंबित कर दिया गया।
यदि वास्तव में ऐसा हुआ है तो निलंबन आदेश, उसमें दर्ज आरोप, सक्षम अधिकारी की शक्ति तथा संबंधित सेवा नियमों के पालन की जांच आवश्यक होगी। वहीं विभाग का पक्ष यह स्पष्ट कर सकता है कि क्या निलंबन से पहले कोई प्रारंभिक जांच, आरोप अथवा अन्य वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई थी।
सहायक आयुक्त की पात्रता पर भी सवाल
इसी क्रम में विभाग के सहायक आयुक्त की पदस्थापना/पात्रता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि संबंधित अधिकारी मूल रूप से वर्ग-2 संवर्ग के कर्मचारी हैं और इसके बावजूद सहायक आयुक्त जैसे पद पर कार्यरत हैं।
यह दावा भी दस्तावेजों से सत्यापित किया जाना आवश्यक है। संबंधित अधिकारी की मूल पदस्थापना, संवर्ग, पदोन्नति/प्रतिनियुक्ति अथवा पदस्थापना आदेश तथा शासन द्वारा निर्धारित पात्रता की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
चार माह का कार्यकाल या जवाबदेही का समय?
यदि संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति में केवल चार माह शेष हैं, तो यह अवधि विभागीय निर्णयों की जवाबदेही के लिहाज से और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। सवाल यह है कि क्या इस अवधि में लिए जा रहे प्रशासनिक फैसलों में नियमों और प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हो रहा है?
अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग डबल प्रभार के आदेश, निलंबन की प्रक्रिया और सहायक आयुक्त की पदस्थापना से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक कर इन सवालों का जवाब देता है या नहीं।
इनका कहना
जी हां मैं दो छात्रावासों में पदस्थ हूं।
राज्य शिक्षा केंद्र के 50 सीटर में और जनजाति कार्य विभाग के छात्रावास में जुलाई से ज्वाइन करी हूं।
प्रतिभा चौधरी ( अधीक्षिका) जनजाति कार्य विभाग और राज्य शिक्षा केंद्र शहडोल।
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जी हां निलंबन हुआ है लेकिन मुझे अभी जानकारी नहीं है। मेरे पास किसी भी प्रकार का कोई नोटिस या पत्र जारी नहीं हुआ है लेकिन मुझे संकुल में बुलाया गया है मैं जा रहा हूं देखता हूं क्या बात है।
अखिलेश सिंह (सहायक शिक्षक) शासकीय स्कूल बिजोरी , संकुल केंद्र छतवई
