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शहडोल : शिकायतों का फर्जी निराकरण कर खुद की पीठ थपथपा रहा पीडब्ल्यूडी, देव कंस्ट्रक्शन ने करोड़ों के बिल लगाकर स्वाहा कर दी शासकीय राशि ,  5 साल की गारंटी से पहले ही टूट गई 3 किलोमीटर सड़क, तो क्या आदित्य के भ्रष्टाचार की कसौटी पर खरा उतरेगा प्रकाश? 

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शिकायतों का फर्जी निराकरण कर खुद की पीठ थपथपा रहा पीडब्ल्यूडी, देव कंस्ट्रक्शन ने करोड़ों के बिल लगाकर स्वाहा कर दी शासकीय राशि ,  5 साल की गारंटी से पहले ही टूट गई 3 किलोमीटर सड़क, तो क्या आदित्य के भ्रष्टाचार की कसौटी पर खरा उतरेगा प्रकाश? 

शहडोल। लाखों करोड़ की लागत से कार्य करने वाला विभाग यदि अपनी गुणवत्ता को सुधारने के बजाय उसके विपरीत में हुई शिकायतों के निराकरण को शासन के लोकपथ जैसे शिकायत के अप पर फर्जी तरीके से निराकरण करने लगे तो इससे शासन के और विभाग के बीच की पारदर्शिता कहीं ना कहीं धूमिल होती नजर आती है।   

रोड पानी बिजली यह तीन मुद्दे राजनीति के लिए बड़े अहम है सत्ता में बैठे लोग भी इसी रोड और पानी बिजली को लेकर अपनी राजनीति की पृष्ठभूमि बनाते हैं हां वह बात अलग है कि आज की राजनीति में धर्म और सांप्रदायिकता की आग में झुलस कर अपने मूल अस्तित्व को को रही है परंतु असल मुद्दे तो रोड बिजली पानी ही है। 

ऐसे में इनका दुरुस्त होना न सिर्फ शासन के लिए अपितु प्रशासन और जनता के लिए भी काफी महत्वपूर्ण हो जाता है लेकिन इन दिनों पीडब्ल्यूडी के उप यंत्री प्रकाश और रोड का कार्य का ठेका लेने वाले ठेकेदार आदित्य के द्वारा पूरी तरीके से शासन और विभाग की गुणवत्ता की मनसा पर पूर्ण रूपेण तरीके से पानी फेर दिया है। 

 3 किलोमीटर सड़क, दो साल भी नहीं टिक सकी

जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर पचगांव क्षेत्र में अंतरा मंदिर गेट के पास लोकपथ मार्ग के लगभग तीन किलोमीटर हिस्से का निर्माण जनवरी 2024 में कराया गया था। सड़क की पांच वर्ष की गारंटी बताई जा रही है, लेकिन दो साल पूरे होने से पहले ही कई जगह डामर उखड़ गया और गड्ढे हो गए।

ग्रामीणों के अनुसार मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। निर्माण एजेंसी ने भी सड़क खराब होने के पीछे भारी वाहनों को कारण बताया है। हालांकि सवाल यह है कि यदि मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन सामान्य है तो सड़क का निर्माण निर्धारित भार सहने योग्य क्यों नहीं किया गया? क्या निर्माण से पहले यातायात और भार का तकनीकी आकलन हुआ था?

देव कंस्ट्रक्शन ने कराया निर्माण

सड़क का निर्माण देव कंस्ट्रक्शन ने कराया, जिसके ठेकेदार के रूप में आदित्य मिश्रा का नाम सामने आया है। सड़क की स्थिति ने निर्माण सामग्री, तकनीकी मानकों, विभागीय निरीक्षण और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह जांच का विषय है कि निर्माण के दौरान अधिकारियों ने कितनी बार स्थल निरीक्षण किया, सामग्री की गुणवत्ता की जांच हुई या नहीं और कार्य पूरा होने से पहले सड़क का तकनीकी परीक्षण कराया गया था या नहीं।

 उपयंत्री बोले—“परेशान न हों, सड़क बन जाएगी” 

पीडब्ल्यूडी के उपयंत्री प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि सड़क का निर्माण देव कंस्ट्रक्शन ने कराया है और ठेकेदार आदित्य मिश्रा हैं। उन्होंने सड़क खराब होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि बरसात के कारण मरम्मत नहीं हो सकी। ठेकेदार को सड़क सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, यदि पांच वर्ष की गारंटी वाली सड़क दो साल के भीतर खराब हो गई, तो निर्माण गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई थी? क्या भुगतान और पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले मौके का सत्यापन किया गया था?

 लोकपथ शिकायतों के निराकरण पर सवाल 

सड़क की खराब स्थिति को लेकर लोकपथ ऐप पर दर्ज शिकायतों के निराकरण पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि शिकायतें रिकॉर्ड में निपटा दी गईं, लेकिन मौके पर सड़क की स्थिति नहीं सुधरी, तो शिकायत प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि शिकायतों के निराकरण से पहले अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया था या नहीं। यदि निरीक्षण हुआ था तो रिपोर्ट में सड़क की वास्तविक स्थिति क्या दर्ज की गई?

 बिल भुगतान और गुणवत्ता परीक्षण की जांच जरूरी

जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि निर्माण एजेंसी को भुगतान किस-किस चरण में किया गया और प्रत्येक भुगतान से पहले कौन-कौन से तकनीकी सत्यापन हुए।

माप पुस्तिका में कार्य की वास्तविक स्थिति क्या दर्ज है? सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण हुआ या नहीं? पूर्णता प्रमाण-पत्र कब जारी हुआ और भुगतान किन दस्तावेजों के आधार पर किया गया? इन सवालों के जवाब से स्पष्ट होगा कि मामला केवल तकनीकी खराबी का है या निरीक्षण और भुगतान प्रक्रिया में भी अनियमितता हुई है।

 सड़क पर पड़ा मटेरियल हादसे का कारण 

सड़क के कई हिस्सों में गड्ढों के साथ बजरी और निर्माण सामग्री पड़ी होने की बात सामने आई है। इससे दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। मरम्मत होने तक विभाग को सामग्री हटाकर यातायात सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए।

 अब सवाल—जांच कौन करेगा?

पांच वर्ष की गारंटी वाली सड़क समय से पहले क्यों खराब हुई? क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांची गई? क्या नियमित निरीक्षण हुआ? क्या भुगतान से पहले स्थल सत्यापन और तकनीकी परीक्षण कराया गया? क्या लोकपथ शिकायतों का निराकरण वास्तविक निरीक्षण के बाद किया गया?

इन सवालों का जवाब विभागीय दस्तावेजों, तकनीकी परीक्षण और स्वतंत्र स्थल जांच से ही मिल सकता है। यदि कोई अनियमितता नहीं हुई है तो जांच के जरिए विभाग इसे स्पष्ट कर सकता है। वहीं गुणवत्ता, निरीक्षण या भुगतान में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।

फिलहाल सड़क की जमीनी स्थिति और पांच वर्ष की गारंटी के बीच का अंतर पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना है कि विभाग केवल “सड़क बन जाएगी” का आश्वासन देता है या निर्माण और शिकायत निराकरण की निष्पक्ष जांच भी कराता है।

 इनका कहना

पहले जो काम होता था उसकी मुझे जानकारी नहीं है लेकिन अब मैं आ गया हूं। मेरे कार्यकाल के दौरान कोई भी निर्माण कार्य में अनियमिताएं बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो आप मामला बता रहे हैं वह बरसात के कारण रुका हुआ था जल्द ही उसे पर सुधार किया जाएगा। और यदि मरम्मत में यह निर्माण में किसी भी प्रकार की गुणवत्ता मानकों को दरकिनार किया गया होगा तो उसकी भी जांच कराई जाएगी रही बात शिकायत निराकरण की तो निराकरण तभी होता है जब स्थल में उसे कर में सुधार करके फोटो अपलोड की जाती है।

 देवेंन मरकाम ( ई.) पीडब्ल्यूडी शहडोल

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बड़े-बड़े वाहन उसे रोड से गुजर रहे हैं। जिसकी वजह से रोड में गड्ढे हो गए हैं अभी बरसात थी इस वजह से रोड नहीं बन पाई बाकी मैं पैकिंग का कार्य कर कर उसको पूरा कर दूंगा रोड जनवरी 2024 में बनी थी लगभग 17 लाख रुपए से 20 लाख रुपए के आसपास की रोड थी। 

 आदित्य मिश्रा (ठेकेदार) शहडोल।

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परेशान मत होइए रोड बन जाएगी मैं ठेकेदार को बोल दिया है रही बात निराकरण की तो पहले रोड में पैचिंग कर  उसकी फोटो खींचकर अपलोड की जाती है उसके बाद निराकरण होता है। 

 लेकिन सवाल अब भी वही जब रोड में मरम्मत का कार्य हुआ ही नहीं तो लोकपथ में दर्ज शिकायत के निराकरण कैसे हो गया।

प्रकाश त्रिपाठी (उपयंत्री) पीडब्ल्यूडी शहडोल।

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