शहडोल:अवैध जीएसटी बिल के दम पर पंचायत में नेता ने मारी सेंध , शासन को गुमराह कर भोल्ली ने किया शासकीय राशि का आहरण , मामला ग्राम पंचायत मजगमा का
अवैध जीएसटी बिल के दम पर पंचायत में नेता ने मारी सेंध ,
शासन को गुमराह कर भोल्ली ने किया शासकीय राशि का आहरण
मामला ग्राम पंचायत मजगमा का
शहडोल (संजय गर्ग)। लगातार ग्राम पंचायत खमरिया कला के भ्रष्टाचार से अवगत कराते हुए आज हम पहुंचे हैं ग्राम पंचायत मजगमा की ओर जहां पर भ्रष्टाचारी नेता भोल्ली सिंह नामक व्यक्ति लगातार अवैध फर्म के दम पर लाखों की शासकीय राशि को गवन कर चुका है।
ज्ञात हो कि है वही नेता है । जो हाल फिलहाल में ही पत्रकारों के ऊपर हरिजन एक्ट लगवाने का दम भर रहा है, जिनके खुद के दामन में लाखों के दाग लगे हुए।
वह ऐसा इसलिए क्योंकि किसी जमाने में सचिव सुग्रीव सिंह कार्यकाल मजगमा में भी तथाकथित नेता का साथ रहते हुए चोर चोर मौसेरे भाई के तर्ज पर ग्राम पंचायत मजगमा में भी भ्रष्टाचार को बखूबी अंजाम दिया है।

दो फर्म दोनों अवैध जाने क्या है खेल
तथाकथित नेता भोल्ली सिंह के दो फर्म दोनों अवैध हो चुके हैं दरअसल इन फार्मो का रजिस्ट्रेशन दो एक 2018 को होता है जिसके 4 साल बाद 01 जनवरी 2022 को फर्म अवैध हो जाती है। क्योंकि फर्म रजिस्टर करने वाले व्यक्ति के द्वारा जीएसटी टैक्स नहीं भरा जाता है जिसके चलते जीएसटी टैक्स विभाग के द्वारा फॉर्म को कैंसिल कर दिया जाता है और फॉर्म अवैध हो जाती है।
बावजूद इसके तथाकथित नेता के द्वारा 1 जनवरी 2022 के बाद लगभग लाखों का पंचायत से भुगतान लिया जाता है फर्जी फर्म के बिल लगाकर साथ ही दो फर्म में एक ही जीएसटी नंबर शो किया जाता है। जो की धोखाधड़ी वह 420 सी कहलाती है पर सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन की अनदेखी से जन्मे यह भ्रष्टाचारी नेता खुलेआम सास की राशि का गवन कर रहे हैं बावजूद इन पर कार्यवाही क्यों नहीं ।
वह कहते हैं ना कि जिनके घर कांच के होते हैं वह दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं मारा करते शायद इस बात का आभास भ्रष्टाचारी नेता को नहीं है।
शासन को गुमराह कर भ्रष्टाचारी नेता ने लिया योजना का लाभ
2 फरवरी 2024 को जनसंपर्क विभाग से खबर छापने के लिए आती है। जिसमें तथाकथित नेता ग्राम मझगवा निवासी भोल्ली सिंह ने जैविक खाद को लाभ का धंधा बनाया है। उसका का कहना है कि उसने 2003 से अपने खेतों में जैविक खाद का उपयोग किया और खाद निर्माण का भी कार्य करके उसे बाजारों में बेचा रहा है ।
जैविक खाद को तैयार कर बाजार में बेचकर काफी अच्छी आमदनी होती है। एवं किसानों को जैविक खाद का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित भी करता है।
भोल्ली सिंह का कहना था कि मेरी आर्थिक स्थिति सही नहीं थी जिससे मैं कोई कार्य कर सकूं मुझे जैविक खाद कार्य के लिए मुझे कृषि विभाग द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी और अब जैविक खाद निर्माण कर बाजारों में बेच रहा हूं।
इसी प्रकार तथाकथित नेता अपने आप को कृषि बात कर कृषि विभाग को गुमराह करते हुए आर्थिक सहायता राशि को आहरित लिया ।
जोकि यह भी अपराध की श्रेणी में आता है अगर देखा जाए तो जिसके द्वारा जीएसटी टैक्स भरा जाता है उसे शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है। पर यहां का स्थानीय प्रशासन के हालात कुछ और ही कह रहे हैं।
हालांकि यह पूरा मामला उच्च स्तरीय जांच का है और ऐसे जांच होने के बाद कई कारनामे तथा कथित नेता के सामने निकलकर आ सकते हैं।
पर जांच हो तो!
