S.K. Paswan
ब्रेकिंग न्यूज़
शहडोल : भ्रष्टाचार की जादुई कालीन भाग 2 ,  हे पार्थ! , करो यथार्थ देखो जरा भ्रष्टाचार की सौगात , ... जैतपुर / शहडोल : 51 शक्तिपीठों में से एक आदि शक्ति जगत जननी माँ भटिया वाली सिंहवाहिनी , महाष्टमी पर ... शहडोल :प्राचीन माँ काली मंदिर: आस्था, इतिहास और धार्मिक परंपराओं का संगम , माँ काली के साथ विराजमान... शहडोल : इंजीनियर संतोष लोहानी बने DRUCC के सदस्य ,  सांसद  हिमाद्री सिंह की अनुशंसा पर शहडोल संस... शहडोल : भ्रष्टाचार कि जादूई कालीन भाग -1 , विद्यालय से लेकर छात्रावासों तक सक्रिय है दलाली का बे... उमरिया : आंगनबाड़ियों के नौनिहालों की प्यास पर जिम्मेदारों की चुप्पी, करकेली, मानपुर और पाली में... शहडोल : मध्यप्रदेश मीडिया संघ शहडोल की विशेष बैठक संपन्न, पत्रकार हितों और संगठन विस्तार पर हुई चर्च... शहडोल : उच्च न्यायालय के आदेशों की उड़ी धज्जियां प्राचार्य पर लगे अनुकंपा प्रभावित करने के आरोप , जी... शहडोल : बार-बार सड़कों पर छात्र, अफसरशाही और कागजी खुराफात, बजट के खजाने पर लूट की बरसात??? ! , ... शहडोल : राजघाट पर सत्याग्रह देश के सियासतदानों पर मंडराता कुर्सी का भय , राहुल के बयान से सियासी...

शहडोल / जयसिंहनगर :तत्कालीन एपीओ की जांच , बनी सवाल ?? ,आखिर कैसे मीना के नाम पर तालाब स्वीकृत कराकर ओमप्रकाश ने किया भ्रष्टाचार

0 216

तत्कालीन एपीओ की जांच , बनी सवाल ?? ,

आखिर कैसे मीना के नाम पर तालाब स्वीकृत कराकर ओमप्रकाश ने किया भ्रष्टाचार

शहडोल / जयसिंहनगर (निशांत संजय गर्ग)। भ्रष्टाचार की सड़ांध ऐसी है जिससे पूरे ग्राम पंचायत में हितग्राही मूलक योजना को निजी योजना पर लागू कर दिया है।
वहीं दूसरी ओर जनपद में बैठे जिम्मेदार अपने कान खुले रखकर पूरे मामले को अनदेखा कर रहे हैं।
जिसे कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
पंचायत को शासकीय नहीं बल्कि निजी संपत्ति समझने वाले सचिव ओम प्रकाश जैसे लोग इस बात का प्रमाण है कि।
ग्राम  स्तर पर चलने वाले पंचायत जैसे कार्यालय इन्हीं के जैसे लोगों के चलते बदहाल हैं।
वही इस बात में इन्हें जोर तब मिलता है जब शिकायतों के बाद कोरमा पूर्ति के लिए जांच होती है और फिर जांच को ठंडा बस्ते में चली जाती है।
ऐसा ही कुछ ग्राम पंचायत बलौड़ी पश्चिम में हुआ।
जहां पर मीना पति ओमप्रकाश द्विवेदी के द्वारा शासकीय योजना का दौहरा लाभ लेते हुए। वर्ष 2024 25 में सचिव ओमप्रकाश के द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए। लघु तालाब स्वीकृत कर दिया।
वही यह पूरा मामला प्रकाश में आने के बाद जनपद के उसे समय के तत्कालीन मनरेगा का अधिकारी के द्वारा मामले में जांच की जाती है लेकिन हमेशा की तरह जांच के नाम पर कोरोमपूर्ति कर कागज कागज खेलते हुए किसी अंधेरे कमरे में फाइलों के बीच पर दम तोड़ देती है।
सवाल यह है कि इस प्रकार शासकीय योजनाओं में घपलेबाजी कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने वाले दोषियों पर आखिर कार्यवाही क्यों नहीं की जाती है।

वित्तीय अनियमिताओं के घेरे में तत्कालीन सचिव व सहयोगी
वही शासकीय योजना का दौहरा लाभ लेते हुए जिस तरीके से उसे समय के तत्कालीन सचिव ओमप्रकाश द्विवेदी ने ग्राम पंचायत बलौड़ी में जब यह धांधले बाजी की तब उसे समय उनके सहयोगी के रूप में सरपंच एवं रोजगार सहायक का भी हाथ होने की आशंका है जताई जा रही हैं।

योजना का दोहरा लाभ बना लाखों का मलाईदार चाप
जिस प्रकार यह पूरा मामला दिखाई पड़ रहा है ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि लघु तालाब के नाम पर कथित ग्राम पंचायत में उसे समय के तत्कालीन सचिव ओमप्रकाश द्विवेदी वर्तमान पदस्थापना ग्राम पंचायत बराछ ने अपनी ही पत्नी के नाम से लाखों रुपए की राशि का चुना शासन को लगा दिया है। जैसे इस पूरे मामले में मलाईदार चाप के रूप में देखा जा सकता है।
अब देखना यह पड़ेगा की जांच के नाम पर कोरोमपूर्ति की गई है उसे पर वर्तमान के अधिकारियों ने क्या मामले को संज्ञान में लिया है या नहीं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.