शहडोल : भ्रष्टाचार की जादुई कालीन भाग 2 , हे पार्थ! , करो यथार्थ देखो जरा भ्रष्टाचार की सौगात , सत्ता की चरणचुंबकता से भ्रष्टाचार के गुणवत्ता तक , क्या ?? न्यायालय से भी ऊंचा जिला शिक्षा अधिकारी
भ्रष्टाचार की जादुई कालीन भाग 2 ,
हे पार्थ! , करो यथार्थ देखो जरा भ्रष्टाचार की सौगात ,
सत्ता की चरणचुंबकता से भ्रष्टाचार के गुणवत्ता तक , क्या ?? न्यायालय से भी ऊंचा जिला शिक्षा अधिकारी
शहडोल। भ्रष्टाचार जादुई कालीन के भाग 2 में आप सभी का स्वागत है।
पिछले भाग में हमने आपको बताया था कि किस तरह चौकड़ी का खेल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में खेला जा रहा है।
वही आज के अंक में हम बात करेंगे की किस प्रकार अधिकारी सत्ता की चरणचुंबकता से भ्रष्टाचार की गुणवत्ता को सुशोभित करता है। जिन अधिकारियों को शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए शासन द्वारा नियुक्त किया गया है अब वह सत्ता सीढ़ी तले अपनी भ्रष्टाचार की गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। ( सूत्रों के अनुसार)
यह कहना अति संयोक्ति नहीं होगी कि इन दिनों जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में नवगत जिला शिक्षा अधिकारी नियम कानून को तिलांजलि देकर।
सीधा न्यायालय के ही प्रकरण को अपने आदेश में पानी पिला दिए हैं। वही इस पूरे मामले की शिकायत जनसुनवाई में कलेक्टर शहडोल से की जा चुकी है।
ऐसा है पूरा मामला
दरअसल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सक्रिय वसूली भाई संजीव भटनागर शिवकुमार गुप्ता श्याम किशोर श्रीवास्तव और चौथे स्वयं कार्यालय प्रमुख यह लोग अपना ही गिरोह बनाकर कार्यालय में होने-पुणे दामों पर उठा पटक कर रहे हैं ऐसी जानकारियां सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है बावजूद इसके जिला शिक्षा अधिकारी का 11 सितंबर 2026 का आदेश या बतलाता है कि यह कार्यालय स्वयं मैं ही इतना सक्षम है कि वह उच्च न्यायालय के विचाराधीन प्रकरणों को अपने ही आदेशों में मुंह के बल पटकनी दे दी है।
बुढ़वा में चला अतुल की कलम का जादू जिसे न्यायालय के प्रकरण को दिखाया बाहर का रास्ता
उच्च माध्यमिक शिक्षक बुढ़वा नरेंद्र प्रसाद मिश्र विद्यालय शासकीय उच्च माध्यमिक बुढ़वा के संलग्निकरण के प्रकरण को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी की कार्य प्रणाली विवादास्पद कटघरे में खड़ी हो गई है।
दरअसल उच्च माध्यमिक शिक्षक नरेंद्र प्रसाद मिश्र विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य प्रकरण में विकासखंड शिक्षा अधिकारी ब्यौहारी को प्रभारी अधिकारी बनाया जाता है जिसमें मिश्रा की अगस्त माह की उपस्थिति के वेतन भुगतान को लेकर प्रकरणों जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से विकासखंड को प्रेषित होता है। इसके बाद वेतन भुगतान न करने के चलते मामला जबलपुर उच्च न्यायालय में अद्भुत हुआ जिसमें दायर याचिका क्रमांक 44307 / 2025 में वेतन आहरण को लेकर न्यायालय में प्रकरण आज दिनांक तक विचाराधीन है।
जिसमें बीईओ के द्वारा शासन के पक्ष में जवाब व दावा प्रस्तुत करते हुए। पराक्रम न्यायालय में प्रचलित रहा।
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा अपने आदेश क्रमांक 3176 /2026 मैं 11 सितंबर 2026 को शासन के प्रकरण को चुनौती देते हुए तीन दिवस के अल्टीमेटम में वेतन आहरण कराने का आदेश विकासखंड शिक्षा अधिकारी ब्यौहारी को दिया गया।
जो की पूर्ण रूप से शासन के नियम विरुद्ध है।
नियमों की पुस्तिका में सूखती कायदों की स्याही
वही नियमों की यदि बात करें तो यदि प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है तो उसमें वरिष्ठ अधिकारी ही जवाब तलब कर सकता है अर्थात यदि प्रकरण से संबंधित कोई भी जवाब तलब यदि करना था तो वह संयुक्त संचालक लोक शिक्षण को करना था।
लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी अतुल चौधरी के द्वारा विभागीय नियमों को तिलांजलि देते हुए न्यायालय के प्रकरण को अपने ही आदेश में चुनौती दे डाली ।
साथ ही यह आदेश भी दिया कि संबंधित लोक सेवाको प्रचार के उपस्थित पंजीयन के आधार पर भुगतान की कार्यवाही करना सुनिश्चित करें।
सबसे महत्वपूर्ण विषय
वही इस पूरे मामले में सबसे बड़ा महत्वपूर्ण विषय यह है कि जब मामला माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और विकासखंड शिक्षा अधिकारी के द्वारा शासन के पक्ष में पंचनामा तैयार कर नो वर्क नो पेमेंट का जवाब माननीय न्यायालय के समक्ष रखा है। ऐसे में यह कोर्ट का दायित्व है कि वह आगे की कार्यवाही करें बगैर कोर्ट के किसी भी तरीके से सुनवाई के बीच में जिला शिक्षा अधिकारी का यह आदेश अपने आप में कई कहानी बयां कर रहा है। वहीं शिक्षा अधिकारी के द्वारा अपने आदेश को स्पष्टीकरण के रूप में बीईओ से जवाब तलब का जरिया बनाया गया है।
जिसकी जांच किया जाना अति आवश्यक है।
क्योंकि कोई भी प्रकरण यदि कोर्ट में लंबित है तो सिर्फ वरिष्ठ अधिकारी ही उसमें हस्ताक्षेप कर सकते हैं।
इनका कहना
वह 12:00 आते थे और 1:00चले जाते थे।
चौकी उपस्थित पंजीयन उनके हस्ताक्षर थे इसलिए मुझे उपस्थित देनी पड़ती थी। हालांकि इस संबंध में मैंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को लिखकर भी दिया था।
प्रमोद मिश्रा (प्राचार्य) शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बुढ़वा
वही संबंध में जब विकासखंड शिक्षा अधिकारी से बात हुई तो उनका कहना था कि हमने कोर्ट में पंचनामा नो वर्क नो पेमेंट का बनाकर दे दिया है न्यायालय में प्रकरण विचार अधीन है अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है आगे बहस बाकी है।
लेकिन शिक्षा अधिकारी के द्वारा मुझे पत्र जारी किया गया। जिसमें वह वेतन की कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए बात कर रहे हैं।
ब्रह्मानंद श्रीवास्तव ( बीईओ) विकासखंड ब्यौहारी जिला शहडोल

