ना काम ना धाम पर कमीशन खोरी बेलगाम
मामला शहडोल के द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी का
शहडोल (संजय गर्ग) । मामला जिले के बुढार चौराहा में क्रिश्चियन हॉस्पिटल के सामने स्थित द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी का है।
जिसकी शहडोल शाखा में इन दिनों कमीशन खोरी चरम पर है।
दरअसल कंपनी के जिला शाखा में अभिकर्ता के पद पर पदस्थ सतीश कुमार तिवारी और ज्योति केसरवानी नामक कर्मचारियों के द्वारा जिला शाखा में अनियमितताएं मचाई जा रही। दरअसल दोनों ही कर्मचारी कभी भी कार्यालय नहीं आते हैं। और ना ही दोनों कर्मचारियों के द्वारा अपने किसी भी पार्टी से प्रीमियम नहीं लिया जाता और ना ही यह दोनों कर्मचारी वर्किंग एजेंट है।
बावजूद इसके फार्मा इन दोनों कर्मचारियों के खाते में कमीशन का पैसा बरोबर आता जाता है।
जो कि जांच का विषय है।
खाते में कमीशन खोरी का यह खेल बड़े ही सफाई से खेला जाता है और उसका मास्टरमाइंड पूर्व बिजनेस एसोसिएट एसके द्विवेदी है।
आपको बता दें की एसके द्विवेदी जोकि कंपनी में लगभग 30 वर्षों से बिजनेस एसोसिएट के पद पर पदस्थ थे हाल ही में रिटायर हो गए किंतु द्विवेदी साहब के द्वारा अभी भी कमीशन का पूरा खेल खेला जाता है।
जोकि एसके द्विवेदी वर्तमान में सलाहकार के तौर पर जिला शाखा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं और इन्हीं के द्वारा इन दोनों कर्मचारियों को संरक्षण दिया जाता है और कमीशन का खेल खेला जाता है।
जिसका प्रमाण शाखा में लगे सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है।
1 वर्ष से अनेकों अनियमितताओं के बीच कंपनी
न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की जिला शाखा को जिले में लगभग 1 वर्ष होने जा रहा है इस बीच अनेकों अनियमितताओं के भवर में कंपनी फंसी हुई। सिर्फ कमीशन खोरी ही नहीं कार्यालय में कुछ ऐसे लोग भी पदस्थ हैं जोकि कंपनी का नाम डुबाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
जिनमें से एक
विकास अधिकारी अरविंद बरवा है।
इनके द्वारा कार्यालय समय में बिना किसी को सूचित किये अनुपस्थित रहना, उनके अधीनस्थ सभी अभिकर्ताओं की प्रोपोजल अंडर राइटिंग व पॉलिसी न बन पाना और कार्यों में लापरवाही भी तथाकथित व्यक्ति के द्वारा की जाती हैं।
शराब के नशे में धुत होकर आते हैं कार्यालय विकास अधिकारी
अरविंद बरवा जब भी कार्यालय आते हैं शराब पीकर ही आते हैं। इस स्थिति में न पालिसी बन पाती है न प्रीमियम जमा हो पाता है। कार्यालय द्वारा कोई अंडरराइटिंग की व्यवस्था नही है न विकास अधिकारी अंडरराइट करते हैं विवश होकर समस्त अभिकर्ताओं को स्वयं के खर्चे से अंडरराइटर की व्यवस्था करनी पड़ती है।
समय पर नहीं होता प्रीमियम जमा
प्रीमियम को लेकर कई बार ऐसा होता है कि पार्टी आफिस आती है अंडरराइटिंग न हो पाने के कारण वह आफिस से चली जाती है और वह प्रीमियम कहीं और जमा हो जाता है।
कंपनी की साख पर बट्टा लगाते अधिकारी व कर्मचारी
इससे न्यू इंडिया का बिजनेस दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है। यह बहुत ही शर्मनाक बात है।
दावा संबंधित फाइलें कई महीनों से रखी है उनका कोई भुगतान नहीं हो पा रहा है क्लेम में दो आफिसर चाहिये जो कि नहीं है। इस स्थिति में पार्टी को सफर करना पड़ता है जब पार्टी आफिस आती है तो उसके साथ गा गलौच होती है मगर क्लेम का कोई भुगतान नही होता है।
अभिकर्ताओं को नहीं दी जाती व्यवस्था
अभिकर्ता डेस्क में अभिकर्ताओं को न कम्प्यूटर न प्रिंटर की कोई व्यवस्था नही है ।
जिससे वो अपना प्रोपोजल फार्म भरने हेतु रजिस्ट्रेशन, इंश्यु आधार कार्ड की कापी प्रिन्ट निकालकर के लगा सके।
क्लेम की स्थिति खराब होने की वजह से जिस दिनांक को सर्वेयर को सर्वे एलाट किया जाता है उस दिनांक का कभी सर्वे नहीं हो पाता यहाँ तक कि स्पॉट सर्ने ? से 2 दिन के बाद होना है और सर्वे रिपोर्ट कार्यालय अब तक जमा नहीं हुई है।
