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शहडोल : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जंतर – मंतर में चल रहे धरना प्रदर्शन को 10 दिन पूर्ण राम के नाम पर चंदा चोरी का कौन देगा हिसाब , पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का दूसरा दिन

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जंतर – मंतर में चल रहे धरना प्रदर्शन को 10 दिन पूर्ण राम के नाम पर चंदा चोरी का कौन देगा हिसाब , पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का दूसरा दिन

शहडोल (संजय गर्ग)। हाल ही में सोशल मीडिया से आंधी की तरह उठकर देश के हर युवाओं के जबान तक पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी ने देश में शिक्षा व्यवस्था में हुए भ्रष्टाचार को लेकर बड़े कदम उठाए हैं इसी के परिणाम स्वरूप दिल्ली के जंतर मंतर में 20 जून 2026 से चल रहे धरना- प्रदर्शन में लाखो हजारों छात्र नीट पेपर लीक एवं शिक्षा में भ्रष्टाचार को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बड़ा प्रदर्शन कर रही है।
बता दें कि आज इस धरना प्रदर्शन को पूरे 10 दिन हो चुके हैं।
वही लद्दाख के साइंटिस्ट और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में जंतर मंतर में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। आज उनका दूसरा दिन पूर्ण हो चुका है। इस धरना प्रदर्शन को देखकर ऐसा लगता है कि सिस्टम से ट्रस्ट युवा सिस्टम बदलने के लिए एक बड़ा ही भरसक प्रयास कर रहे हैं।
लेकिन धरना प्रदर्शन को 10 दिन हो चुके हैं इसके बावजूद भी केंद्र की भाजपा सरकार के कानो में जू तक नही रेंग रही है।
अब चाहे आप इसे सट्टा का गुरूर कहे या फिर सिस्टम का फेलियर लेकिन देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर में जो चल रहा है वह सामान्य नहीं।
छात्रों के हाथ की और हित की बात करने के लिए और नीट पेपर लिखकर दौरान जिन छात्रों ने अपनी जान गवाई है। यह उन्हें इंसाफ दिलाने का शायद यही एक तरीका है।

हालांकि लोकतंत्र में प्रदर्शन ही एक मात्र ऐसा तरीका है जिससे लोग अपनी बात शासन प्रशासन से कह सकते हैं।
लेकिन वही सीजेपी ( कॉकरोच जनता पार्टी) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने 6 जून 2026 को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे और जंतर मंतर में चल रहे प्रदर्शन को नई दिशा दिखाई। वहीं उन्होंने यह आरोप लगाए हैं कि चल रहे इस विरोध प्रदर्शन में पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी ध्यान सरकार ने नहीं दिया है। यानी क्या समझा जाए कि न्याय मांगने का यह जो तरीका है इसको भी क्या सत्ता में बैठे हैं सत्ताधारी खत्म करना चाहते हैं।

आज देश के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस देश में सुरक्षित क्या है ना जल है ना जंगल है ना जमीन और ना ही धर्म
ज्यादा दूर न जाए तो मध्य प्रदेश के सिंगरौली में जिस प्रकार 6,.5 लाख से भी अधिक पेड़ काट दिए गए केवल पूंजी पत्तियों के बड़े कॉल प्रोजेक्ट के नाम पर वहीं अगर जमीनों की हालत देख तो शहडोल संभाग के अंदर जिस तरीके से राजस्व की अंधेर कर दी मची हुई है। जिसे आज कोई देखने वाला नहीं है । अगर जल की बात करें तो लोगों की आस्था से जुड़ी गंगा और संभाग मे जीवनदायिनी नदी सोनभद्र आज सिर्फ और सिर्फ गंदगी और प्रदूषण की भेंट चढ़ गए हैं।

जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे….. तो अनुमानित 220 करोड़ के राम मंदिर के चंदा चोर को कौन पकड़ेगा यह सवाल अभी भी बना हुआ है।

मंदिर मस्जिद और धर्म के नाम पर देश में जिस प्रकार अराजकता का माहौल बनता है। शायद उसी को एजेंडा बनाकर राजनीति लोग करते हैं। जिस धर्म की धर्म ध्वज को हिंदूवादी सरकार अपने राजनीति का केंद्र बिंदु बनाकर रखती है इस धर्म के नाम पर राम मंदिर में चंदा चोरी का या बड़ा खेल खेला जाता है।
और मजे की बात तो यह है कि जो चंपत राय और रामाशंकर यादव टुन्नू यादव समेत 8 लोगों पर फिर एसआईटी के गठन के बाद राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफा देते हैं।
हालांकि चंदा चोरी किसने की इस बात का पता एसआईटी लगाने में लगी हुई है।
और साथ में इस बात की भी पड़ताल जारी है की जो ट्रस्ट के जिन 1 लाख लोगों ने 5 लाख गांवों में जाकर चंदा वसूली की वह कहां है।

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