शहडोल: कुंभकर्णी निद्रा या गांधी जी की मुद्रा???? से मौन हुए जिम्मेदार , खबर के बाद प्रशासन के हरकत में आते ही ‘भ्रष्टाचार के प्रकाश’ से आदित्य का विकास, पीडब्ल्यूडी के निर्माण में बजरी का सहारा
कुंभकर्णी निद्रा या गांधी जी की मुद्रा???? से मौन हुए जिम्मेदार ,
खबर के बाद प्रशासन के हरकत में आते ही ‘भ्रष्टाचार के प्रकाश’ से आदित्य का विकास, पीडब्ल्यूडी के निर्माण में बजरी का सहारा
शहडोल। ज्ञात हो कि पूर्व में हमने आपको जिला मुख्यालय से लगे ग्राम अंतरा के सेमरिहा से अंतर पहुंच मार्ग पर लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए गए सड़क निर्माण के संबंध में अवगत कराया था। वर्ष 2024 में बनी यह सड़क गारंटी अवधि पूरी होने से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही है।
वहीं, खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन के हरकत में आने पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों तथा सड़क निर्माण की तकनीकी स्वीकृति से जुड़े उपयंत्री प्रकाश त्रिपाठी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि लगभग 3 किलोमीटर क्षतिग्रस्त सड़क पर मरम्मत कार्य के नाम पर बजरी डालकर लोकपथ पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का निराकरण कर दिया गया।
संबंधित लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई इस सड़क को लेकर लोकपथ पोर्टल पर 30 से अधिक शिकायतें दर्ज होने की बात सामने आई है। खबर के बाद इन शिकायतों का निराकरण सड़क पर बजरी डालकर किए जाने का दावा किया जा रहा है। मौके पर पहुंची हमारी टीम ने जब सड़क का निरीक्षण किया तो पाया कि सड़क के दोनों ओर के शोल्डर कटे हुए हैं। वहीं, एक स्थान पर सड़क का हिस्सा पूरी तरह धंस चुका है।
दो से ढाई साल में सड़क हुई जर्जर, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
लगभग 3 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर लगातार वाहनों का आवागमन बना रहता है। क्षेत्र से लगे गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण को लगभग दो से ढाई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन वर्तमान में सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
ग्रामीणों का यह भी दावा है कि निर्माण कार्य पूरा होने के महज 20 दिन के भीतर ही सड़क जगह-जगह से उखड़ने लगी थी और देखते ही देखते सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए।
कार्य गुणवत्ता का परीक्षण उपयंत्री ने कैसे किया, निरीक्षण पर सवाल
इस पूरे मामले में ग्रामीणों के दावों के आधार पर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जब संबंधित सड़क का निर्माण ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा था, तब क्या विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य का नियमित निरीक्षण किया था? निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण आखिर किन मानकों के आधार पर किया गया?
यदि विभागीय अधिकारियों द्वारा निर्माण कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण किया गया था, तो महज कुछ समय बाद सड़क की यह स्थिति कैसे बन गई? इन सवालों का जवाब अब विभागीय जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
सड़क की खराब स्थिति के कारण क्षेत्र की जनता को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मरम्मत में करना था डामरीकरण, हड़बड़ाहट में डाल दी बजरी या फिर बनी भ्रष्टाचार की नई स्ट्रेटजी?
पहले अंक में खबर प्रकाशित होने के बाद जब मामला प्रशासन के संज्ञान में आया, तब क्षतिग्रस्त डामर वाली सड़क पर मरम्मत कार्य किया जाना था। आरोप है कि मरम्मत के दौरान डामरीकरण और आवश्यक पैचिंग के स्थान पर सड़क पर डस्टयुक्त बजरी डालकर खानापूर्ति कर दी गई।
नियमों के अनुसार डामर वाली सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के तहत की जानी चाहिए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या केवल बजरी डाल देना सड़क की वास्तविक मरम्मत मानी जा सकती है? यदि नहीं, तो फिर लोकपथ पर दर्ज शिकायतों का निराकरण किस आधार पर किया गया?
ढल गई बजरी, बिल लगेगा डामर का?
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, कथित रूप से सड़क मरम्मत के दौरान बजरी डालने के बावजूद विभागीय स्तर पर डामरीकरण और पैचिंग से संबंधित बिलों के भुगतान को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
यदि ऐसा हुआ है तो यह जांच का गंभीर विषय होगा कि मौके पर वास्तव में कितना कार्य कराया गया और विभागीय अभिलेखों में कितना कार्य दर्शाया गया। हालांकि इसकी वास्तविकता विभागीय जांच और मौके के तकनीकी सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कुंभकर्णी निद्रा में विभाग या फिर गांधी जी की मुद्रा????
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाखों रुपये की लागत से लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए गए सड़क निर्माण की यह स्थिति आखिर कैसे बनी?
यदि सड़क निर्माण में गुणवत्ता संबंधी खामियां थीं और सड़क गारंटी अवधि में ही क्षतिग्रस्त हो गई, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि मरम्मत के नाम पर केवल बजरी डालकर शिकायतों का निराकरण किया गया है, तो इसकी तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई गई?
अब सवाल यह भी है कि विभाग के आला अधिकारी कुंभकर्णी निद्रा में हैं या फिर गांधी जी की मुद्रा में आंख, कान और मुंह बंद किए बैठे हैं?
हालांकि विभागीय अधिकारियों का पक्ष और प्रस्तावित जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
इनका कहना
पूरे मामले में लोक निर्माण विभाग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर से बात की गई। उन्होंने कहा कि आपके द्वारा जानकारी दी गई है। मैं पूरे मामले की विधिवत जांच करवाता हूं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
रितेश आर्या (एस.ई.)
लोक निर्माण विभाग, संभाग शहडोल

