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शहडोल : ‌फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई मोहन की भर्ती साहब?? , क्यों ठंडा बस्ते में पड़ा मोबलाइजर भर्ती मामला ,  पीड़ित ने लगाई जनसुनवाई में न्याय की गुहार , लेनदेन के आरोप में घिरे जिम्मेदार 

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‌फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई मोहन की भर्ती साहब?? क्यों ठंडे बस्ते में पड़ा मोबलाइजर भर्ती मामला

 पीड़ित ने लगाई जनसुनवाई में न्याय की गुहार , लेनदेन के आरोप में घिरे जिम्मेदार 

बुढार (संजय गर्ग)। एक तरफ जहां देश में बेरोजगारी का आलम चल रहा है वहीं दूसरी ओर छोटी-छोटी जनपद स्तर पर होने वाली भर्तियों में भी भ्रष्टाचार ने अपने पैर पसार रखे हैं ऐसे में पढ़े लिखे नौजवान मात्रा को चंद रूपों का चंदा ग्राम पंचायत स्तर से लेकर जनपद स्तर पर बैठे जिम्मेदारों को नहीं दे पा रहे हैं जिसकी वजह से वह 5 से 10 हजार रुपए की नौकरी हासिल कर पाने में वह असक्षम है।
ऐसा नहीं कि वह पढ़े-लिखे नहीं है लेकिन किताबि ज्ञान से भी बढ़कर आज के समय में गांधी जी का मूल्य ज्यादा बड़ा है।
इस वजह से अच्छे खासे पढ़े लिखे नौजवान दर-दर भटकने को तैयार हैं।
जिनके पास टैलेंट तो है लेकिन रिश्वत देने के लिए पैसे नहीं है।
ऐसा ही मामला जिले के बुढार जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बदौड़ी के ग्राम साही का है। जहां साक्षर भारत योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर मोबलाइजर पद की भर्ती निकलती है।
जिसमें मैरिट सूची के आधार पर महेश सिंह पिता राममिलन सिंह निवासी ग्राम साही ने अपने समस्त दस्तावेज ग्राम पंचायत स्तर में उल्लिखित रिक्त पद पर भर्ती के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच गुड़िया बाई के पति समय लाल व सचिव जगदीश प्रधान को दिए थे।
लेकिन दोनों ही ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करते हुए मोहन सिंह पिता अमरजीत सिंह निवासी ग्राम साही को फर्जी दस्तावेज के आधार पर पैसे का लेनदेन कर उसे भर्ती दे दी गई।
ऐसा आरोप पीड़ित द्वारा ग्राम पंचायत के सरपंच पति सचिव एवं रोजगार सहायक के ऊपर लगाया गया।
ज्ञात हो कि इसके पूर्व भी इस विषय में खबर प्रकाशित की जा चुकी है।
जिस पर अभी तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचा पीड़ित

वहीं दूसरी ओर न्याय की आस लिए पीड़ित महेश सिंह मंगलवार 18 मार्च को कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचता है जहां पीड़ित द्वारा शिकायत पत्र में लेख किया गया है कि।
ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव के द्वारा जनपद स्तर पर निकली मोबलाइजर पद की भर्ती फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की गई है।
जांचकर्ता खुद ही जांच के घेरे में
पीड़ित ने जनसुनवाई में आवेदन देते हुए यह भी बताया कि इस पूरे विषय में जनपद स्तर पर जांच टीम गठित की गई थी।
जिस पर जांचकर्ता अधिकारी खुद ही संदिग्धता के दायरे में है।

प्रभारी सीईओ पर भी लगे आरोप

पीड़ित महेश सिंह ने बताया कि उसने इस पूरे मामले में मोहन सिंह पिता अमरजीत सिंह जिसकी भर्ती फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई है उसके भर्ती होने के पूर्व ही दवा आपत्ती और आवेदन पत्र जनपद बुढार के प्रभारी को दिवाकर सिंह के समक्ष दिया था लेकिन उनके द्वारा भी इस पूरे प्रकरण में ढील पोल कार्रवाई की गई। जिसका नतीजा यह निकला कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पैसे का लेनदेन करते हुए ग्राम पंचायत में मोबलाइजर पद पर मोहन सिंह को भर्ती कर लिया गया है ।

इन दस्तावेजों के आधार पर हुई फर्जी भर्ती

पीड़ित ने बताया कि मोहन सिंह पिता अमरजीत सिंह जिसकी कथित पद में की गई है उसके दस्तावेजों में गड़बड़ी है।
जिसका सेंटर कोड एसजीई 3229 रजिस्ट्रेशन डेट एक साथ 2023 है जिसमें दस्तावेज अपलोड फोटो आधार कार्ड 10वीं 12वीं की अंक सूची अपलोड की गईहै।
जबकि आईडी प्रूफ का दिनांक 3 फरवरी 2025 की है।
इतना ही नहीं उक्त व्यक्ति का ग्रेजुएशन व फाइनल परीक्षा 2024 में ही हुई है साथ ही कंप्यूटर ऑपरेटर का डिप्लोमा भी 2024 में ही उक्त व्यक्ति ने ली है।
पीड़ित का आरोप है कि एक ही सत्र में तीन-तीन डिग्रियां उक्त व्यक्ति ने ले रखी है।
ऐसे में इसका डिप्लोमा संदेह के घेरे में है।
जिसकी जांच करने के बजाय जनपद और ग्राम पंचायत दोनों के ही जिम्मेदार पूरे मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।
जनसुनवाई में पूरा मामला पीड़ित द्वारा शिकायत पत्र में लेख किया गया।
इसके बावजूद भी अब तक पीड़ित को न्याय नहीं मिल सका।
पर देखना यह होगा कि आप पूरा मामला सामने आने के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
इस पूरे मामले में पीड़ित ने कलेक्टर से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

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