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शहडोल : राजस्व की अंधेरगर्दी से भू-स्वामियों में छाए संकट के बादल ,खुद का ही आदेश पालन कराने एसडीएम व तहसीलदार के फूल रहे हाथ-पैर

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राजस्व की अंधेरगर्दी से भू-स्वामियों में छाए संकट के बादल ,

खुद का ही आदेश पालन कराने एसडीएम व तहसीलदार के फूल रहे हाथ-पैर

शहडोल। जिस तरीके से बीते कई वर्षों में राजस्व के कार्य के तरीकों से आदिवासी अंचल की भूमियों का अस्तित्व समाप्ति की ओर है ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि, वह दिन दूर नहीं जब यह पूरा शहर सिर्फ और सिर्फ भूमाफियाओं के अधीन होकर रह जाएगा। राजस्व के अधिकारों की रक्षा एवं उसके नियम और कायदों की बलि अधिकारियों की कार्य कुशलता से दी जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि, आखिर ऐसी कौन सी वजह या मजबूरी है कि, लगातार राजस्व अधिकारी अपने ही नियम कायदों का पालन करवाने में असक्षम साबित हो रहे हैं।

ऐसा ही एक मामला गोहपारू तहसील के बड़कोड़ा से सामने आया है, जहां तहसील स्तर से शासकीय भूमि पर अतिक्रमणकर्ता के ऊपर अर्थ दंड अधिरोपित कर बेदखली का आदेश तो दे दिया गया, लेकिन अतिक्रमण की कार्यवाही आज दिनांक तक नहीं हो सकी है। परिणामस्वरूप अतिक्रमणकर्ता के हौसले बुलंदी पर हैं।

प्रार्थी बैजनाथ साहू पिता तुषन साहू, ग्राम पोस्ट बड़कोड़ा, गोहपारु ने बताया कि, मैंने ग्राम बड़कोड़ा में शासकीय भूमि में अतिक्रमण करने वालों में.. रामचन्द्र साहू, मनोज साहू, पंकज साहू, कुसुम साहू, स्वाती साहू ‌के विरुद्ध शासकीय भूमि (खसरा क्रमांक 668 एवं 698) में बेदखली का प्रकरण तहसील गोहपारु में, वर्ष 2024 में पंजीबद्ध कराया था। जिसमें तहसीलदार के जांच उपरांत अनवेदकों ‌के शासकीय भूमि में आम रास्ता व निस्तारु भूमि में अवैध अतिक्रमण होना पाया गया। साथ ही दोषीजनों को 12,500 रुपये के अर्थदंड से न्यायालय ने दंडित भी किया था। उक्त आदेश से हम ग्रामीण जनों में काफी संतोष था, किन्तु पारित आदेश निर्णय के पालन में, आज दिनांक तक शासकीय भूमि अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सकी है।

जिसके चलते आरोपियों के हौसले बढ़े हुए हैं और वह मुझे आए दिन, जान से मारने जैसी घटना कारित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध की सूचना मैंने थाना गोहपारु में भी कई बार दी है। इसके साथ ही उच्च अधिकारी अनुविभागीय अधिकारी वृत्त जयसिंहनगर में लिखित पत्राचार के माध्यम से अतिक्रमण मुक्त कराए जाने का आवेदन दिनांक 25/मार्च /2025 को दिया। उक्त अतिक्रमण मे अधिग्रहित की गई भूमि का स्वरूप आए दिन आरोपीजन बदल कर अतिक्रमण बढ़ा रहे हैं। किन्तु, प्रशासन की उदासीनता के कारण आरोपियों के हौसले बुलंद है। मैं प्रार्थी इसके पूर्व भी कई बार जनसुनवाई में अतिक्रमण मुक्त कराने का निवेदन कर चुका हूं। किन्तु, जांच केवल फ़ाइलों तक ही रह जाती है।

प्रार्थी मांग की है कि, गोहपारू के तहसीलदार अपने ही न्यायालय के पारित आदेश क्रमांक 0033/3/68 दिनांक 27/दिसंबर/2024, शासकीय भूमि के खसरा क्रमांक 668 एवं 698 में बेदखली का पालन कराते हुए दोषीजनों से पूर्व में दंडित की गई राशि 12500 को जमा कराएं व दोषिजनों के ऊपर कड़ी कानूनी कार्यवाही करने की मांग की गई है।

इनका कहना है

हमने कार्यवाही के लिए लगाया था, लेकिन मामला एसडीएम कोर्ट में चला गया है। वहां से अब तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं, इस वजह से कार्रवाई नहीं हो पाई।

आर के. टांडिया

तहसीलदार, गोहपारू।

लगातार फोन लगाने के बाद भी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने फोन नहीं उठाया। जिसके चलते उनका अभिमत प्राप्त नहीं हो सका है।

काजोल सिंह

एसडीएम, जयसिंहनगर।

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