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शहडोल : नवधन का रिण थाने में एसआई सा जिन्न…..?? बने गले की फांस ना थूक सका न लील

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नवधन का रिण थाने में एसआई सा जिन्न …..?? बने गले की फांस ना थूक सका न लील

शहडोल( निशांत संजय गर्ग)। यदि आप रिण लेने कि सोच रहे हैं तो जरा सावधान हो जाइए कहीं ऐसा ना हो कि वह लोन आपके गले की फांस बन जाए। किसी भी बैंक या अन्य संस्थान से अगर आप रिण लेने की सोचते हैं तो पहले उसकी पूरी पूछ परख कर ले क्योंकि यह पूछ परख आपको आपराधिक प्रवृत्तियों के सांऐ से बचने का प्रयास कर सकता है।
जरा विचार करें कि आपने लोन लिया और उसकी कुछ किस्ते भरने के बाद भी यदि अगली किस्त के लिए आपको एक नहीं चार-चार रिकवरी एजेंटों का एक ही समय पर सामना करना पड़े तो आपकी मनोदशा क्या होगी। और वह भी तब जब रिकवरी एजेंट आपके घर में घुसकर रिकवरी की धमकी देने लगें ।
ज्यादा से ज्यादा आप डरकर कानून का सहारा लेंगे । लेकिन आदिवासी बाहुल्य शहडोल में इन दिनों देश भक्ति और जन सेवा की उल्टी गंगा बह रही है जिसमें थाने का एक एसआई सा जिन्न गोते लगा रहा है। जिसकी रफ्तार इतनी तेज है कि थाने में शिकायत करने गए पीड़ित को ही उल्टे मुकदमे की उसने धमकी दे डाली। जिसका प्रमाण थाने के अंदर मौजूद सीसीटीवी में कैद है। ( वह भी तब तक जब तक उसे मिटाने का प्रयास न किया जाए तो)

दरअसल ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज शहडोल के सिटी कोतवाली में जो देखा वह सामान्य नहीं था जहां पर पीड़ित न्याय की गुहार लगाता थाने में पहुंचता है और वहां पर उसे कानून के रखवाले ने ही वर्दी का भय दिखाया और मुकदमा कायम करने की बात कही हैं। जो कि इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति और जन सेवा अब सिर्फ कागजों में ही दर्ज है धरातल में इसका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है।

मामला कुछ इस प्रकार
शिकायतकर्ता रामजी हलवाई निवासी वार्ड नंबर 10 ने बताया कि वार्ड नंबर 12 गल्ला मंडी रोड में उसकी दुकान स्थित है। जहां पर दिनांक 13 जुलाई की शाम लगभग 7:30 बजे के आसपास चार लोग जो की नवधन बैंक जो की गणेश मंदिर के पास स्थित है उसके कर्मचारी थे। और उसकी दुकान पर वह लोन की किस्त लेने के लिए आए हुए थे। प्रार्थी का कहना है कि उसने नव धन बैंक से व्यक्तिगत लोन लगभग 1 लाख तक का पास कराया था जिसकी 23 किस्ते बनी थी जिसमें से 10 किस्त उसने भर दी थी। अगली किस्त को लेकर वह बैंक के एजेंटों से कुछ समय की मोहलत मांग रहा था। जिस पर कथित बैंक के कर्मचारियों के द्वारा प्रार्थी कर्जदार पर लोन की किस्त चुकाने को लेकर अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए लोन चुकाने को कहा गया। चार-चार लोगों को अपनी दुकान के पास देखकर प्रार्थी अपने पड़ोसी के यहां पहुंचता है जहां पर पड़ोसी के द्वारा रिकवरी एजेंट से फोन पर बात कर बीच का रास्ता निकालने को कहा जाता है।
लेकिन पड़ोसी के फोन पर बात करते ही नवधन बैंक के एजेंट प्रिंस कुशवाहा एवं पुरानी बस्ती निवासी बुनकर व दो अन्य साथी पड़ोसी की दुकान पर आ धमकते हैं और वाद – विवाद करने लगते हैं।

बैंक एजेंटों ने दी रात में घर में घुसकर रिकवरी की धमकी
जिस पर पड़ोसी द्वारा बीच बचाव किया जाता है और बीच का रास्ता निकालने को कहा जाता है। इसके बाद एक नहीं दो नहीं बल्कि पूरे चार-चार बैंक एजेंट प्रार्थी राम जी को घर में घुसकर रिकवरी कि धमकी देते हैं।

ना एनपीए की जानकारी ना ही कोई लीगल नोटिस
यदि नवधन बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों की नियमों की बात करें तो कोई भी कर्जदार यदि वित्तीय रिण किसी भी संस्थान या बैंक से लेता है तो उसकी बराबर किस्ते जमा करनी पड़ती है यदि किस्त लगातार 90 दिन तक बाउंस हो जाए तो ही लीगल नोटिस के थ्रू कर्जदार को सूचित किया जाता है कि उसका कर्ज एनपीए हो गया। ( लगातार किस्त बाउंस की स्थिति में एनपीए बनता है) और लोन रिकवरी डिपार्मेंट से एजेंट को सौप जाता है। लेकिन यहां पर बिना किसी लीगल नोटिस के चार-चार एजेंटों कि टोली गरीब मजबूर कर्जदार के ऊपर टूट पड़ती है।
जो कि नियम विरुद्ध है। इतना ही नहीं गाइडलाइंस में स्पष्ट लिखा गया है कि कोई भी रिकवरी एजेंट सुबह 7:00 बजे से लेकर शाम के 7:00 बजे तक ही मिल सकता है लेकिन प्रार्थी के शिकायत पत्र में समय 7:30 का है। जो बिना आईडी और अथॉरिटी लेटर के प्रार्थी के पास लोन की रिकवरी के लिए आए थे।

थाने में न्याय की गुहार पर मिली धमकी
पूरे मामले को लेकर प्रार्थी आनन – फानन में सिटी कोतवाली पहुंचता है। जहां पर वह अपना शिकायत पत्र लेकर मामले की पूरी जानकारी थाने में मौजूद वरिष्ठ सब इंस्पेक्टर को देता है। जिस पर सिटी कोतवाली में पदस्थ एसआई उपेंद्र त्रिपाठी के द्वारा प्रार्थी को ही। बैंक कर्मचारियों के पक्ष में बात करते हुए धमकी दी जाती है और कहा जाता है कि तेरे शिकायत करने से कुछ नहीं होगा मैंने कल उन लोगों को बुलवाया है। यदि वह चारो लोग आ जाएंगे तो तेरे ऊपर मुकदमा बनाकर तुझे अंदर कर दूंगा। पैसा ना देना पड़े इसलिए तू नाटक कर रहा है पैसा तो देना पड़ेगा कोई मोहलत नहीं मिलेगी। तू 10 शिकायत भी करेगा तो भी कुछ नहीं होगा लेकिन वह एक करेंगे तो मैं मुकदमा कायम कर दूंगा तेरे ऊपर।
इतना सुनते ही प्रार्थी डर के मारे कांपने लगता है। उसे पता चलता है कि थाने में जनसेवा नहीं बल्कि धन सेवा चलती जिसके मुकादम वरिष्ठ वर्दी धारी हैं। सूत्रों के अनुसार ।
हालांकि पूरा मामला जांच पर अंकित है।

वर्दी के रौब में दबी मानवीय संवेदनाएं

बीते 13 जुलाई की शाम को थाने में शिकायत करने पहुंचे शिकायतकर्ता राम जी हलवाई के द्वारा जो वाक़्य बताया गया उसने कोतवाली थाना में पदस्थ वरिष्ठ एसआई उपेंद्र त्रिपाठी की कार्य प्रणाली पर बड़े प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं।???
जिसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि थाने में शिकायत करने आए कोई भी शिकायतकर्ता की शिकायत को सुने बगैर अपना तुग़लकी की फरमान जारी कर देना यह न्याय है या अन्याय ।
फिर यह कहना अतिसंयोक्ति नहीं होगा कि वर्दी जो जन सेवा और देशभक्ति का भाव जागती है इस वर्दी को कलंकित कर उसके रौब के तले लोगों की मानवीय संवेदनाओं को सब इंस्पेक्टर उपेंद्र त्रिपाठी जैसे लोग दबा रहें हैं। जिसके कारण आम आदमी थाने जाने के नाम से भयभीत हो जाता है।
और निकटतम भविष्य में पुलिस से न्याय की गुहार लगाते थक – हार कर अपराध का रास्ता चुनता है।

तो सवाल यह है कि पुलिस अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण के लिए है कि उन्हें बढ़ावा देने के लिए।

बेलगाम घोड़ों पर क्या नवागत पुलिस कप्तान लगाएंगे लगाम

यह कहना गलत नहीं होगा कि शहडोल जिले में पधारे नवागत पुलिस कप्तान संजय अग्रवाल के लिए यह एक बड़ी चुनौती है जो की कोतवाली में पदस्थ बेलगाम घोड़ों पर लगाम लगाने के लिए भरसक प्रयास की आवश्यकता है।
जिससे पुलिस और जनता के बीच में विश्वास की डोर कायम रहे। और जनता पुलिस को अपना सहायक समझे।
और पुलिस भी है समझे कि उन्हें यह वर्दी जनता के रक्षा के लिए दी गई है ना की रौब के लिए।

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