शहडोल : उच्च न्यायालय के आदेशों की उड़ी धज्जियां प्राचार्य पर लगे अनुकंपा प्रभावित करने के आरोप , जीते जी नहीं मिला नियमितकरण , तो मौत को लगाया गले , पिता की अनुकंपा के लिए पुत्र लग रहा प्रशासनिक व शासकीय गलियारों के चक्कर , कलेक्टर से मुख्यमंत्री तक तय किया सफर मिली सिर्फ हताशा
उच्च न्यायालय के आदेशों की उड़ी धज्जियां प्राचार्य पर लगे अनुकंपा प्रभावित करने के आरोप , जीते जी नहीं मिला नियमितकरण , तो मौत को लगाया गले ,
पिता की अनुकंपा के लिए पुत्र लग रहा प्रशासनिक व शासकीय गलियारों के चक्कर , कलेक्टर से मुख्यमंत्री तक तय किया सफर मिली सिर्फ हताशा
शहडोल। शासकीय कर्मचारियों की कार्य प्रणाली और उनकी अफसरशाही कैसी होती है यह चीज आज इस मामले को पढ़ने के बाद आपको पता लग जाएगा ।
एक माध्यम वर्गी के ऊपर जब उसके परिवार की जिम्मेदारी आती है तो उसे निभाने के लिए वह दिन-रात एक कर मेहनत करता है लेकिन वही कुछ ऐसे लोग भी उसके साथ जुड़े होते हैं जो अपने पद और औदे का गलत फायदा उठाकर उसे व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है वह भी इतना प्रताड़ित कि वह अंत में आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाता है वही यह मामला सिर्फ अनुकंपा प्रभावित करने का नहीं बल्कि मानसिक रूप से प्रताड़ित कर आत्महत्या को मजबूर करने के लिए भी बन जाता है।
जीते जी उसे न्याय तो नहीं मिलता लेकिन मौत जरूर मिल जाती है।
फिर अनुकंपा के लिए उसके पुत्र को भी उसी प्रकार से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है जिस मामले की पूरी शिकायत कई बार जिला कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक से की जाती है लेकिन प्रशासनिक गलियां में जुते घिसने के बाद सिर्फ हताशा ही हाथ लगती है।
वही पूरा मामला प्रशासनिक सिस्टम से अपने हक की लड़ाई का भी है जिसमें न्याय पाना कितना कठिन है यह देखा जा सकता है।
दरअसल पूरा मामला
ग्राम देवहरा जिला अनूपपुर निवासी सुनील बैगा पिता स्वर्गीय झंडा लाल बैगा का है । जो की आज 13 अक्टूबर 2026 को जनसुनवाई में शिकायत कर बताया कि उसके पिता 10/10/2002 में विनिमित के आधार पर शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज शहडोल में भृत्य के पद पर पदस्थ थे। जिनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका क्रमांक 729/2014 के प्रकरण में 22/ 09/ 2014 को झंडा लाल को न्यायालय के आदेश के अनुरूप नियमित करना था।
लेकिन शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य के अफसर शाही के परिणाम स्वरूप उन्हें नियमित नहीं किया गया इसके कुछ साल बाद 30 मार्च 2025 को झंडा लाल छत से कूद कर आत्महत्या कर लेते हैं।
वही परिवार वालों का आरोप है कि उन्हें नियमित न करने की बात को लेकर वह हमेशा चिंतित रहते थे और यही चिंता उनके मौत का कारण बनी।
न्यायालय से भी ऊपर प्राचार्य का तंमगा
जबलपुर के उच्च न्यायालय के 22.0 9. 2014 के आदेश के बावजूद भी प्राचार्य के द्वारा भृत्य झंडा लाल को उसके जीते जी नियमित नहीं किया गया। सवाल यह है कि न्यायालय के आदेशों को इस प्रकार कागजी फाइलों में अपनी अवसर शाही के दम पर दबा देना कितना सही है।
अब पुत्र को अनुकंपा के लिए तरसा रहे
वहीं अब वर्तमान में शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज शहडोल के प्राचार्य द्वारा सुनील बैगा, पिता स्व. झण्डालाल बैगा, ने बताया कि लगातार प्राचार्य के द्वारा मुझे अनुकंपा देने के नाम पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और यही प्रताड़ना मेरे पिताजी को भी नियमित करने के लिए दिया गया था जबकि कोर्ट ने 22/9/2014 को ही पिताजी को नियमित करने के लिए निर्देश दे दिए थे लेकिन शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज शहडोल के प्राचार्य के द्वारा कोर्ट के आदेशों की आवेलहना करते हुए । उन्हें वियनमित कर दिया था अब उनकी मृत्यु के पश्चात मुझे अनुकंपा प्रदान नहीं किया जा रही है जिसकी शिकायत में जिला कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार कर चुका हूं।
लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
यह भी विचारणीय
वहीं अगर इस पूरे मामले का विचारणीय पहलू यह है कि छोटे-छोटे पदों पर भर्ती प्रकार अपने व अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले मध्यम वर्गी लोगों को इस प्रकार प्रताड़ित करना कहां तक सही है। वही न्यायालय की आदेशों की अवहेलना करना ऐसा लगता है आज के डेट में आम बात हो गई है।
इनका कहना
वहीं इस पूरे मामले में जब प्राचार्य जय राम रजक से इस मामले में उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए फोन लगाया गया तो उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। जिनके कारण उनकी प्रतिक्रिया अप्राप्त हैं।


