शहडोल : भ्रष्टाचार कि जादूई कालीन भाग -1 , विद्यालय से लेकर छात्रावासों तक सक्रिय है दलाली का बेजोड़ कनेक्शन , शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार की बिसात पर चल रहा चौकड़ी का खेल ,
भ्रष्टाचार कि जादूई कालीन भाग -1 ,
विद्यालय से लेकर छात्रावासों तक सक्रिय है दलाली का बेजोड़ कनेक्शन ,
शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार की बिसात पर चल रहा चौकड़ी का खेल ,
शहडोल। भ्रष्टाचार की अमीठ छाप से सुसज्जित रहा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय शहडोल जो की सिर्फ जिले ही नहीं प्रदेश से लेकर देश तक में अपने भ्रष्टाचार के कारनामों से यश अर्जित करने वाला कथित कार्यालय है।
एक बार फिर चर्चा में है।
विश्वत सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार कार्यालय में एक बार फिर भ्रष्टाचार की जादूई कालीन बीछ चुकी है जिस पर विभागा प्रमुख से लेकर विद्यालय और छात्रावासों से वसूली करने वाले वसूली भाई भी सवार हो चुके हैं सवाल यह है कि बीते कुछ वर्ष पहले ही भ्रष्टाचार की लंबी उड़ान भरने से जिस प्रकार तत्कालीन डीईओ मारपाची की फजीहत हुई।
क्या इस तरीके से या फिर उससे बढ़कर अब भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रखने को तैयार है साथ ही उनकी इस जादुई कालीन की उड़ान कितनी होगी यह कहना अभी थोड़ा मुश्किल है हालांकि जांच पड़ताल हमारी जारी है जानकारी लगते ही कि उसे भी साझा किया जाएगा।
*चार किरदार, एक कथित वसूली तंत्र—नाम गुमनाम, मगर विभागीय गलियारों में हर किरदार की अपनी पहचान!”*
भाई उसे पूरे भ्रष्टाचार के आरोपों में सबसे मजे की बात तो यह है कि यह चारों किरदार और एक कथित वसूली तंत्र जिस प्रकार से सक्रियता से कार्य कर रहा है निश्चित तौर पर जल्द ही यह भ्रष्टाचार की नई बातें जिले में खड़ी करेंगे ऐसी हमारी आशा है। जैसा कि हमने आपको बताया कि इस विभाग की गलियारे में सबकी अपनी एक पहचान है।
जिसमें भ्रष्टाचार की संजीवनी किस मिल रही है वहीं शिव की कृपा में वसूली एजेंट का यह धंधा कितनी तेजी से चल रहा है।
और तो और श्याम रंग में रंगी व्यवस्था का रहस्य क्या है। , वसूली कैसे कथित खेल में अतुलिनीय योगदान देने वाले लोग किस प्रकार कथित तौर पर यह लोग नेक सेवा केंद्र का संचालन कर रहे हैं।
*कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय रमसा में हस्ताक्षर का खेल बना सवाल??*
वहीं विभाग में रमसा अर्थात राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत आने वाले दो कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में सीधे उद्योग के और अधीक्षक के हस्ताक्षर से हर माह लाखों रुपए किराने और सब्जी के नाम पर निकल रहे हैं। जिसको लेकर विभाग में भ्रष्टाचार के सवाल और आरोप लगाया जा रहा है।
जैसे – छात्रावास के संचालन में लगाए जाने वाले बिल कहां से आ रहे हैं वह निविदा टेंडर प्रक्रिया जैसे कई नियम इस पूरे खेल में धूल चाटते नजर आ रहे हैं।
विभागीय प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले में संयुक्त संचालक लोक शिक्षण से बात हुई तो उनका कहना था कि आपके माध्यम से यह पूरी जानकारी मेरे समक्ष आई है जो कि विभाग की छवि को धूमिल करती है और बड़ा ही आपत्तिजनक मामला है मैं इस मामले की जांच करवाऊंगा
उमेश धुर्वे ( संयुक्त संचालक) लोक शिक्षण कार्यालय संभाग शहडोल।
