S.K. Paswan
ब्रेकिंग न्यूज़
शहडोल : इंदिरा ज्योति व चलें रामराज्य की ओर संकल्प यात्रा का शहडोल आगमन उमरिया :युवा टीम बनी बेसहारा पशुओं की सहारा, भीषण गर्मी में चारा-पानी की कर रहे व्यवस्था  शहडोल : जिला स्तरीय “गंगा दशहरा” कार्यक्रम ग्राम पंचायत मझौली में संपन्न शहडोल : ग्राम धमनी कलां में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ, कलश यात्रा में उमड़ी आस्था की विशाल धा... शहडोल : विश्वविद्यालय की प्रशासनिक अनियमिताओं एवं योजनाओं  में  भ्रष्टाचार को लेकर संभागायुक्त को एन... शहडोल : कांग्रेस द्वारा राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित शहडोल : शहडोल : 21 से 34 वर्ष पुरानी ट्रेनों को किया जाए प्रतिदिन , संभाग के यात्रियों को आरक्षण समेत अन्य स... शहडोल : लापरवाही या दुर्घटना??? आखिर किसने ले ली तेंदुए की जान , वन विभाग सवालों के घेरे में ड्य... शहडोल : नीट पेपर लीक होने के विरोध में कांग्रेस ने निकाला विशाल मशाल जुलूस

जैतपुर: अंधकार में डूबा प्राथमिक विद्यालय कोटरी के छात्र-छात्राओं का भविष्य , आखिर कब तक होगा विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़

0 241

अंधकार में डूबा प्राथमिक विद्यालय कोटरी के छात्र-छात्राओं का भविष्य
आखिर कब तक होगा विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़

जैतपुर/ भठीया (संजय गर्ग)। कहते हैं कि शिक्षक उस दिये के समान होता है। जोकि छात्र-छात्राओं के जीवन में अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश कर देता है।
शिक्षक वह होता है जो छात्र-छात्राओं की जीवन की नींव को मजबूत करता है। एवं एक नए शिक्षित समाज को जन्म देता है।
किंतु कुछ शिक्षक इस प्रकार के हैं होते हैं जो केवल अपने विकास एवं अपनों के विकास के लिए ही कार्य करते हैं।
उन्हें छात्रों के भविष्य से कोई लेना देना नहीं होता है उनके लिए शिक्षक का पेशा मात्र 9:00 से 5:00 कार्य करने वाली सामान्य ड्यूटी होती हैं।
ऐसा ही एक मामला जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर जैतपुर के समीप प्राथमिक विद्यालय कोटरी का है जहां पर प्रधानाध्यापक के प्रभार में प्राथमिक शिक्षक के पद पर पदस्थ किरण गुप्ता का है।
जो कि तथाकथित शिक्षिका का रिकार्ड है कि वह कभी भी समय से विद्यालय नहीं आती जो कि विद्यालय का समय 10:30 बजे का है। किंतु मैडम साहिबा दोपहर के 1:00 बजे स्कूल आती है और 3:00 बजे रफूचक्कर हो जाती है। बता दें कि प्राथमिक विद्यालय कोटरी में अधिकतम गरीब आदिवासी तबके के छात्र-छात्रा ही अध्यनरत हैं। एवं सालों से मैडम का यही रवैया है छात्र-छात्रा प्रतिदिन सुबह स्कूल आ जाते हैं। और दोपहर तक मैडम की आने की राह देखते रहते हैं। मैडम के उदासीन रवैया से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पूरी तरीके से ठप है। एवं वहां के छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में डूबा हुआ है। शिक्षक जोकि ज्ञान का सागर माना जाता है। ओ मैडम साहिबा भी एक शिक्षिका है तो जाहिर सी बात है कि उनके पास भी ज्ञान अवश्य होगा। किंतु मैडम साहिबा अपने ज्ञान का बटवारा शायद नहीं करना चाहती कहते हैं कि ज्ञान बांटने से बढ़ता है। किंतु बड़े दुख की बात है कि प्राथमिक विद्यालय कोटरी में मैडम के समय पर ना आने से वहां के सभी अध्यनरत कार बाध्य है। छात्र छात्राओं को उचित मूल्य की शिक्षा उपलब्ध नहीं हो पा रही।
बच्चे पड़े या ना पड़े मुझे कोई लेना देना नहीं
इतना ही नहीं शिक्षिका किरण गुप्ता कहती है कि मुझे किसी का डर नहीं मैं किसी से नहीं डरती मेरा जब मन करेगा तो मैं आऊंगी जब मन करेगा तब मैं जाऊंगी कोई पड़े या ना पड़े मुझे उससे कोई लेना देना नहीं है।
इस प्रकार के बेतुके बयान मैडम साहिबा द्वारा दिए जाते हैं जब उनसे पूछा जाए कि आप समय पर विद्यालय क्यों नहीं आती है। इस प्रकार के बेतुके बयान से एक बात तो बिल्कुल साफ है। की किरण गुप्ता जैसी शिक्षिका केवल बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ही कर सकती भविष्य सवारना तो बहुत दूर की बात है।
वर्षों से है एक ही प्रभार पर, मनमाने तरीके से करती विद्यालय का संचालन
बता दें कि प्राथमिक विद्यालय कोठरी में पदस्थ किरण गुप्ता जो कि 1998 से एक ही विद्यालय में पदस्थ हैं इतना ही नहीं बल्कि 98 से ही एक ही प्रभार पर कार्यरत है इन्हें विद्यालय के अंदर प्रधानाध्यापक के प्रभाव पर रखा गया था जो कि आज भी निरंतर जारी ही है।
सूत्रों की माने तो मैडम साहिबा 1:00 बजे विद्यालय आती एवं वहां के आसपास के रहवासियों से आते ही मुलाकात करती हैं एवं तालमेल बैठाने का प्रयास करती हैं जिससे कि उनकी किसी प्रकार की शिकायत ना हो सके।
इसका मतलब यह है कि 1:00 बजे स्कूल आने के बावजूद भी वह बच्चों को नहीं पढ़ाती हैं बल्कि आसपास के घरों में जाकर दरबार करती हैं।
मैडम साहिबा जैसे शिक्षक केवल और केवल विद्यार्थियों के जीवन को अंधकारमय कुएं में ढकेलती है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इस प्रकार के शिक्षक व शिक्षिका शिक्षित समाज का निर्माण कैसे करेंगे जो खुद समय का मूल्य नहीं समझ रहे विद्यार्थियों को कैसे एक उज्जवल भविष्य दे पाएंगे। विद्यार्थी चाहे किसी भी वर्ग का हो किंतु शिक्षा का अधिकार सभी को है।
ऐसे शिक्षकों के ऊपर प्रशासन को जांच कर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए ।

Leave A Reply

Your email address will not be published.