शहडोल:कार्डधारी ने नहीं किया आयुष्मान कार्ड अप्रूवल का इंतजार ,डायलिसिस वाले मामले को लेकर अमृता हॉस्पिटल के प्रबंधन ने दिया बयान ,जांच के बाद मामले में आएगी पारदर्शिता
कार्डधारी ने नहीं किया आयुष्मान कार्ड अप्रूवल का इंतजार ,
डायलिसिस वाले मामले को लेकर अमृता हॉस्पिटल के प्रबंधन ने दिया बयान ,
जांच के बाद मामले में आएगी पारदर्शिता
शहडोल(संजय गर्ग)। शासन की कोई भी योजनाएं जो शासन द्वारा जनता के हक के लिए बनाई जाती हैं निश्चित ही उन योजनाओं का लाभ उन्हें दिया जाना चाहिए। एक तरफ जहां सरकार द्वारा आयुष्मान योजना के द्वारा लाखों लोगों को मुफ्त इलाज की सौगात दी जा रही है वहीं दूसरी ओर शहडोल जिले से आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिलने का मामला जिले में सामने आया है जहां पर अमृता हॉस्पिटल एवं श्री राम हॉस्पिटल के ऊपर यह आरोप लगा है कि उनके द्वारा जिला उमरिया के निवासी नईम उल्ला पिता धूरे उम्र 55 वर्ष को आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ उल्लिखित अस्पतालों द्वारा नहीं दिया गया।
एक पक्ष यह भी
इस पूरे मामले में जब हमारी टीम द्वारा अमृता हॉस्पिटल के पीआरओ राहुल सोनी से पूरे मामले की विस्तार से जानकारी ली गई तो उन्होंने बयान देते हुए बताया कि । उक्त मरीज हमारे पास आया था हमसे पहले वह श्रीराम हॉस्पिटल गया था पर वहां पर बैड खाली नहीं था। जिसके बाद वह हमारे हॉस्पिटल आया हमारे स्टाफ ने मरीज से कहा कि आप कुछ देर वेट करें आपका कार्ड अप्रूवल के लिए हमने लगा दिया है जैसे ही अप्रूवल हो जाएगा आपकी डायलिसिस हो जाएगी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज द्वारा अप्रूवल का वेट नहीं किया गया।
हमारे पास पहले से ही आयुष्मान कार्डधारकों की संख्या बहुत थी जिसकी वजह से हमारे पास उसे वक्त बेंड उपलब्ध नहीं था। इसलिए हमने उक्त मरीज का कार्ड अप्रूवल के लिए लगाया था।
उन्होंने बताया कि हमारे यहां नॉर्मल डायलिसिस का चार्ज ₹1300 है किंतु आयुष्मान कार्ड के थ्रू यदि कोई डायलिसिस करता है । तो 1500 रुपए का रेट आयुष्मान कार्ड से मिलता है।
जो कि हमारे लिए लाभदायक है।
ऐसे में हम आयुष्मान कार्ड धारकों को पहले प्रायोरिटी देते हैं।
लेकिन उक्त मरीज हमारी बात सुनने को तैयार नहीं था और उसने जिला अस्पताल में जाकर अपना डायलिसिस करवाया और अनर्गल शिकायत की।
अस्पताल प्रबंधन के इस पूरे बयान से एक बात तो लगभग साफ हो जाती है की ताली कभी भी एक हाथ से नहीं बजती है।
हम यह नहीं कहते की अस्पताल प्रबंधन सही है या शिकायतकर्ता हमने दोनों पक्षों को अपने पाठकों को समझने के लिए आमने सामने रखा है।
कुछ ऐसा है पूरा मामला
नौरोजाबाद जिला उमरिया के नायका दफाई वार्ड नंबर 10 निवासी नईम उल्ला पिता धूरे उम्र 55 वर्ष ने अपनी व्यथा में बताया कि वह किड्नी की बीमारी से ग्रसित हैं। सात-आठ महीने से उनकी बीमारी दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। उसका इलाज अहमदाबाद के एक अस्पताल में भी चला, लेकिन कोई खास आराम नहीं मिला है। वहां के चिकित्सकों द्वारा उन्हें सलाह दी गई कि उन्हें डायलिसिस करवाना पड़ेगा।
मरीज नईम उल्ला ने बताया कि उमरिया जिला की डायलिसिम मशीन कई दिनों से खराब है। इस कारण से वह डायलिसिस करवाने शहडोल आया। सबसे पहले वह श्रीराम अस्पताल गया, जहां पर यह कहा गया आयुष्मान कार्ड पर उसकी डायलिसिस यहां अभी नहीं हो पाएगी। उसे कल आना होगा तब देखेंगे। तत्पश्चात वह रीवा रोड पर स्थित अमृता अस्पताल डायलिसिस कराने अपने पुत्र के साथ ऑटो करके गया। जहां पर उसने आयुष्मान कार्ड दिखाया और डायलिसिस किए जाने की बात कही।
अमृता अस्पताल में आयुष्मान कार्ड देखते ही उनका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यहां पर किसी सरकार का कोई कार्ड नहीं चलता है। तीन हजार रुपये हो तो डायलिसिस हो जाएगी, नहीं तो चलते बनो। मरीज नईम के पुत्र ने बताया कि अमृता अस्पताल के कर्मचारियों ने यह भी बहाना बनाया कि अभी उनकी सीट खाली नहीं है। किसी और दिन आना तो देखा जाएगा।
नईम के पुत्र युसुफ सिद्दीकी ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से की गई शिकायत में आरोप लगाया कि आयुष्मान कार्ड अमृता अस्पताल में दिखाने पर इलाज नहीं बल्कि दुत्कार मिलती है। उसने बताया कि शहडोल के अमृता अस्पताल का हम लोगों ने बड़ा नाम सुना था। लेकिन यहां पर तो नगद पैसा भुगतान करने पर ही इलाज की सुविधा मिलती है।
युसुफ ने शिकायत में बताया कि डायलेजर के 1,000 रुपये डायलिसिस के 1,300 रुपये कुल तीन हजार रुपये उनसे मांगे जा रहे थे। इतनी राशि हमारे पास नहीं थी। सिवा आयुष्मान कार्ड के युसूफ का कहना है कि घंटों तक अमृता अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें रोके रखा। तब कहीं जाकर हम जिला चिकित्सालय शहडोल आए, जहां डायलिसिस हो गया।
दरअसल यह पूरा मामला जांच के दायरे में आता है दोनों पक्ष हमने आपके सामने रखें जांच के बाद ही इस पूरे मामले में पारदर्शिता आएगी ।
इनका कहना है।
शिकायतकर्ता ने हमारे विरुद्ध झूठी शिकायत की है। हमारे अस्पताल आने से पहले वह श्री राम हॉस्पिटल गया था वहां पर बैठ खाली नहीं था और हमारे यहां पहले से ही आयुष्मान कार्ड के काफी मरीजों का इलाज पहले सही चल रहा है जिसके कारण बेड खाली नहीं थे ऐसे में बिना अप्रूवल के हम पुराने मरीजों को हटाकर नए मरीज को नहीं रख सकते थे ।
राहुल सोनी (पीआरओ) अमृता हॉस्पिटल शहडोल”
