S.K. Paswan
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शहडोल : बैठक में क्षेत्रीय पत्रकारों ने वृह्द रूपरेखा की तैयार , स्वतंत्रता सेनानी व वरिष्ठ पत्रकार रहे जगत लाल नारायण की 43 पुण्यतिथि पर विशाल रक्तदान शिविर का होगा आयोजन

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बैठक में क्षेत्रीय पत्रकारों ने वृह्द रूपरेखा की तैयार ,

स्वतंत्रता सेनानी व वरिष्ठ पत्रकार रहे जगत लाल नारायण की 43 पुण्यतिथि पर विशाल रक्तदान शिविर का होगा आयोजन

इन्ट्रो- । स्वतंत्रता सैनानी और वरिष्ठ पत्रकार रहे लाला जगत नारायण की 43 वीं पुण्य तिथि पर जिले के बुढ़ार में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन को लेकर क्षेत्रीय पत्रकारों ने वृह्द रूपरेखा तैयार की है, कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी और व्यापारियों ने भी अपनी हिस्सेदारी दिखाई है।

बुढ़ार (संजय गर्ग) । कल सोमवार को बस स्टैण्ड के समीप स्थित होटल ग्रैण्ड एम्पायर में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किये जाने को लेकर शनिवार को वृह्द बैठक का आयोजन किया गया, बैठक में शहडोल मुख्यालय के अलावा बुढ़ार ,धनपुरी, अमलाई व समीपी ग्रामीण अंचल के आधा सैकड़ा पत्रकार उपस्थित रहे। समाजिक सरोकार और समाजहित में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए अंचल के पत्रकारों ने वरिष्ठ पत्रकार और अमर शहीद लाला जगत नारायण जी की 43 वीं पुण्य तिथि पर रक्तदान शिविर के आयोजन की रूपरेखा को बैठक में अंतिम रूप दिया। कल सोमवार को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक जिला ब्लड बैंक के मार्गदर्शन में यहां विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन होना है।
रक्तदान से शरीर को होता है लाभ
रक्तदान शिविर के पूर्व हुई बैठक के दौरान पत्रकार कैलाश लालवानी ने कहा कि रक्तदान को महादान कहा जाता है, समय-समय पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है, जहां लोग अपनी इच्छानुसार रक्तदान कर दूसरों को लाभ पहुंचाते हैं। हमारे जिले में ऐसे मरीजों की संख्या कम नहीं है, जिन्हें खून चढ़ाने की सख्त जरूरत होती है और इसके साथ ही आपातकालीन स्थिति में भी मरीज को बचाने के लिए कई बार खून की आवश्यकता पड़ती है। इस तरह से जब इंसान रक्तदान करता है तो, वह किसी को एक नया जीवन देता है और इससे बढक़र पुण्य और क्या हो सकता है। यह तो सच है कि रक्तदान से हम दूसरों को लाभ पहुंचाते हैं, साथ ही खुद के शरीर को काफी फायदा पहुंचता है।

रक्तदान करने वाला बनता है पुण्य का भागी

खून देने वाला जान बचाकर पुण्य का भागी तो बनता ही है, अपनी सेहत भी चुस्त-दुरुस्त रखता है। ज्यादातर लोग रक्तदान के बाद बेहतर महसूस करते हैं। पत्रकार सूरज श्रीवास्तव ने कहा कि लाला जगत नारायण जी की पुण्य तिथि पर 09 सितम्बर को होटल ग्रैण्ड एम्पायर में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। उक्त रक्तदान शिविर में अधिक से अधिक लोगों से भागीदारी की अपील की है। शिविर में शामिल होने वाले प्रत्येक रक्तदाता को एक डोनर कार्ड दिया जाएगा, जबकि उसके ब्लड ग्रुप और कई अन्य चीजों की जांच भी मुफ्त हो जाएगी।
जीवनदान से बड़ा कोई दान नहीं
वरिष्ठ पत्रकार राहुल तिवारी ने कहा बैठक के दौरान कहा कि खून को बनाया नहीं जा सकता है, उसे केवल रक्तदाता से ही प्राप्त किया जा सकता है। देश में हर दो सेकेंड में एक व्यक्ति को खून की जरूरत पड़ती है। थैलेसीमिया, कैंसर रोगियों और हादसे में शिकार व्यक्तियों को तुरंत खून चढ़ाने की दरकार होती है। ऐसे में दान में दिया गया हर यूनिट खून किसी न किसी की जान बचाने का काम आता है। जीवनदान से बड़ा कोई दूसरा दान नहीं हो सकता है।

तीन-चार महीने में करना चाहिए रक्तदान

वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्रा ने बैठक में लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं या रेड ब्लड सेल्स होते हैं, जिनकी उम्र 3-4 महीने की होती है। इसका मतलब यह है कि हमारी रगों में आज जो खून दौड़ रहा है, वह हर तीन से चार महीने में नया हो जाता है। रक्त का बनना एक नियत प्रक्रिया है जो हमेशा चलती रहती है। कई बार शरीर में आयरन यानी लौह तत्व की मात्रा जब अधिक हो जाती है तो हार्ट अटैक या स्ट्रोक आने की संभावना रहती है और ऐसा अक्सर पुरूषों के साथ ही होता है, इसलिए बॉडी में आयरन को सही मात्रा में बरकरार रखने के लिए पुरूषों को हर तीन-चार महीने में रक्तदान जरूर करना चाहिए।

कैंसर की संभावना कम

वरिष्ट पत्रकार प्रदीप पाण्डेय ने बैठक में कहा कि एक रिसर्च में इस बात का भी खुलासा किया गया था कि नियमित रूप से रक्तदान करने वालों में कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है। ब्लड डोनेट करने से शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स की क्षमता भी बढ़ती है। जब कोई नियमित तौर पर ब्लड डोनेट करता है तो, उसके शरीर में ताजा खून बनने की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है। यह कार्बन डाइऑक्साइड को भी शरीर से बाहर निकाल देता है जिससे कि शरीर स्वस्थ रहता है।

तमाम संक्रमण का चलता है पता

वरिष्ठ पत्रकार मोहन नामदेव ने कहा कि रक्त कोशिकाओं की उम्र महज 42 दिन की होती है। इस अवधि के बाद खून खुद-ब-खुद नष्ट होता रहता है और उसकी जगह नया खून बनता रहता है। यह प्रक्रिया धीमी गति से चलती रहती है, लिहाजा खून बनाने की फैक्ट्री बोनमैरो के काम करने की रफ्तार भी सुस्त रहती है। एक यूनिट ब्लड निकलाने के बाद यहां तेजी से रक्त बनने लगता है। खून के साथ निकलने वाले पानी की कमी तो महज एक घंटे में पूरी हो जाती है, जबकि हीमोग्लोबिन की मात्रा भी 24 घंटे में पहले जैसे ही हो जाती है। रक्त की नई कोशिकाओं के आ जाने से व्यक्ति चुस्ती का एहसास करता है। खून देने वाले मरीज के रक्त की नियमित रूप से जांच होती रहती है और उसे तमाम संक्रमण का पता समय रहते ही चल जाता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता में होती है वृद्धि

आजकल के जमाने में ज्यादातर लोग ओबेसिटी या मोटापे के शिकार हैं, ऐसे में रक्तदान वजन कम करने में उनकी सहायता कर सकता है। एक बार रक्त दान करने पर 650 कैलोरी खर्च होता है। बैठक के दौरान वरिष्ट पत्रकार शंकर लाल शर्मा ने कहा कि रक्तदान से बॉडी में बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी सहायक है। ब्लड डोनेट करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है, जिससे इंसान लंबे समय तक स्वस्थ रहता है। शरीर स्वस्थ रहेगा तो उम्र भी बढ़ेगी। इसीलिए एक स्वस्थ व्यक्ति को 56 दिन के बाद ही फिर से रक्त दान करने का सुझाव दिया जाता है।
रक्तदान से नहीं आती कमजोरी
वरिष्ठ पत्रकार आशीष नामदेव ने कहा कि 18 से 60 वर्ष तक आयु का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति वर्ष में चार बार रक्तदान कर सकता है। एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसके साथ ही रक्तदान के दौरान आप संक्रमण या रक्त से फैलने वाले रोग एचआईवी, हेेपेटाइटिस तथा मलेरिया से ग्रस्त नहीं होंगे। इस पद्धति में प्रयुक्त होने वाले सभी उपकरण असंक्रमित होते हैं, रक्तदान से कोई कमजोरी नहीं आती है।

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