शहडोल / जयसिंहनगर : अपनी मातृभाषा के प्रति जागरूकता जरूरी – धर्मेंद्र द्विवेदी , 01 से 14 सितंबर तक हिंदी दिवस पर महाविद्यालय में होंगे विशेष आयोजन
अपनी मातृभाषा के प्रति जागरूकता जरूरी – धर्मेंद्र द्विवेदी ,
01 से 14 सितंबर तक हिंदी दिवस पर महाविद्यालय में होंगे विशेष आयोजन
शहडोल / जयसिंहनगर । मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशन में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वावधान व महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी के नेतृत्व में 01 से 14 सितंबर 2025 तक चल रहे राजभाषा हिंदी दिवस के पाक्षिक कार्यक्रम की कड़ी में 09सितंबर 2025 को पंडित अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय महाविद्यालय जयसिंहनगर में व्याख्यान माला का आयोजन हुआ।जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में पंडित शंभू नाथ शुक्ल विश्वविद्यालय शहडोल के सेवानिवृत्त हिंदी विभाग के प्राध्यापक व हिंदी के विद्वान डॉ. विनोद कुमार जायसवाल सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण कर किया गया। मुख्य अतिथि स्वागत प्राचार्य द्वारा बैच लगाकर किया गया साथ ही छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया ।
महाविद्यालयीन पुस्तकालय में संबंधित पुस्तकों की उपलब्धता
स्वागत उद्बोधन महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ यदुवीर मिश्रा द्वारा किया गया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं एवं महाविद्यालय के अधिकारियों – कर्मचारियों को अपनी मातृ भाषा हिन्दी के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील रहने तथा राज्य भाषा एवं राष्ट्र भाषा में भेद बतलाते हुए विविध विद्वानों, कलमकारों एवं साहित्यकारों के संदर्भ ग्रंथों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया एवं अपने महाविद्यालयीन पुस्तकालय में संबंधित पुस्तकों की उपलब्धता की जानकारी साझा की।
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हिंदी की महत्ता सर्वविदित –
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉक्टर विनोद जायसवाल ने हिंदी के इतिहास को बताते हुए इसके विकास क्रम एवं इसका विस्तार 3500 वर्षों से 1500 ईपू.वैदिक संस्कृति 1500 से 1000 ईपू. लौकिक संस्कृति,(पाणिनि काल),500 ईपू. से 1 ई. तक पाली भाषा, 1ई.से 500 ई. प्राकृत भाषा तथा 500 ई. से 1000 ई. तक अपभ्रंश भाषा या संपर्क भाषा के रूप में चिह्नित किया । डॉक्टर जायसवाल ने किसी भी भाषा को सांस्कृतिक परंपरा का प्रसाद कहके संबोधित किया । अपने पूरे व्याख्यान में डॉ.जायसवाल ने भाषाई बाधाओं, इसकी विसंगतियों के बीच हिंदी का अपने अस्तित्व के लिए किए गए संघर्ष एवं राजनैतिक वा संवैधानिक इतिहास का विस्तृत वृत्तांत बतलाया l डॉक्टर जायसवाल ने अपने वक्तव्य के अंत में अंतर्राष्ट्रीय मंच व विश्व पटल पर हिंदी के बढ़ रहे प्रभाव व इसकी सार्वभौमिकता को स्वीकार्य किया। अपने वक्तव्य के अंत में हिंदी को राष्ट्र की प्रतीक भाषा के रूप में स्थापित होने की शुभकामनाएं दी तथा कविता के साथ अपनी बात को संपन्न किया तथा भाषा को मानवीय सरकारों का आधार बताया ।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉक्टर जसीम अहमद ने उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। मंच का सफल संचालन कार्यक्रम की सह-संयोजक डॉ अर्चना जायसवाल ने किया। इस कार्यक्रम में विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. प्रमिला वास्केल सहित महाविद्यालय परिवार समस्त छात्र-छात्राएं तथा डॉ उत्तम सिंह, डॉ. लवकुश दीपेंद्र डॉ.आदित्य शुक्ला, प्रोफेसर दिलीप शुक्ला, डॉ.मुनव्वर अली, डॉ मुकेश सिंह, डॉ अलीमा सिद्दकी, डॉ. जीतेंद्र साकेत, डॉ.महेंद्र साकेत, डॉ.प्रीति रजक, डॉ.सुरेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र साकेत , डॉ.रामपाल डॉ.रागिनी गुप्ता, दीपक रानी मिश्रा सहित अन्य अधिकारी – कर्मचारी मौजूद रहे।
