शहडोल : सूदखोरों की ब्याज की चक्की में पीस रही आम जनता , क्यों?? इस मामले में मुख बधिर हुआ प्रशासन !
सूदखोरों की ब्याज की चक्की में पीस रही आम जनता , क्यों?? इस मामले में मुख बधिर हुआ प्रशासन !
शहडोल( संजय गर्ग ) । नगर के कई इलाकों में इन दिनों सूदखोरों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। हालत यह है कि आर्थिक तंगी में फंसे गरीब और मजदूर वर्ग को राहत देने के बजाय ये अवैध मनीलेंडर उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर खुलकर लूट का कारोबार चला रहे हैं। न खाता, न बही… सूदखोर जो कहें वही सही! — यही इनका मूल मंत्र बन चुका है। बिना किसी कागजी कार्यवाही के दिए गए रुपये पर मनमाना ब्याज वसूला जाता है और न चुकाने पर लगातार धमकियां, सामाजिक अपमान और मानसिक प्रताड़ना का दौर चलता है।
गरीबी का दर्द बन गया सूदखोरों का मुनाफा
अधिकांश पीड़ित गरीब, मजदूर, ठेला-रेहड़ी वाले और असंगठित क्षेत्र के लोग हैं जिन्हें तत्काल पैसों की जरूरत में बैंक या सरकारी योजनाओं से मदद नहीं मिल पाती। उनकी मजबूरी को सूदखोर अवसर में बदल देते है।
• रोज के हिसाब से ब्याज
• दोगुना-तिगुना भुगतान
• समय पर न चुकाने पर धमकी
• घर–दुकान पर जाकर झगड़ा
इन सबके कारण गरीब लोग कर्ज के जाल में ऐसे फंसते हैं कि निकलना मुश्किल हो जाता है।
शहडोल पुलिस के नाक के नीचे फल-फूल रहा ब्याज का धंधा
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह काला कारोबार प्रशासन और पुलिस की आंखों के सामने खुलेआम फल-फूल रहा है।
कानूनन बिना लाइसेंस मनीलेंडिंग पूरी तरह अवैध है, लेकिन शहडोल में—
• मोहल्लों में घूम-घूमकर कर्ज वितरण
• व्हाट्सएप पर कलेक्शन
• दबंगई से वसूली
• पुलिस रिपोर्ट पर भी कार्रवाई में ढिलाई
ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन कड़ी कार्रवाई का इंतजार जारी है।
पीड़ितों की दबी आवाज: शिकायत करने पर बढ़ती धमकियां
जो लोग शिकायत करने की हिम्मत जुटाते हैं, उन्हें सूदखोर फोन पर, घर पर और रास्ते में रोककर डराते-धमकाते हैं।
“तारीख पर तारीख और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन”— यही पीड़ितों की सबसे बड़ी पीड़ा है।
कई परिवार दहशत में जी रहे हैं, महिलाओं को डर है कि कहीं वसूली करने वाले घर में घुसकर दुर्व्यवहार न कर दें।
प्रशासन की जिम्मेदारी: अवैध सूदखोरी पर कब लगेगी लगाम?
यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक शोषण का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ है।
प्रशासन को चाहिए कि
बिना लाइसेंस मनीलेंडिंग करने वालों पर एफआईआर दर्ज करे
पीड़ितों के बयान लेकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे ।
पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष टीम गठित करे
जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को कानूनी विकल्प बताए।
आसान और ब्याज-मुक्त ऋण योजनाओं तक गरीबों की पहुंच बढ़ाए।
शहडोल की जनता की मांग— “सूदखोरों के आतंक का अंत हो!
आज जरूरत है कि प्रशासन और पुलिस इस बढ़ते अवैध व्यापार को गंभीरता से लेकर जमीनी स्तर पर कार्रवाई करें।
गरीबों की कमर तोड़कर चल रहा सूदखोरी का यह काला व्यवसाय अब समाज के लिए खतरा बन गया है। बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन क्यों मौन है।
शहडोल के लोगों की आवाज —
“*सूदखोरों का आतंक अब और नहीं… कानून चले, न्याय मिले*!”
