शहडोल : जंगल के चर्च में अंधविश्वास का धंधा , 21वीं सदी में छाड़ फूंक , तो क्या अंधविश्वास के जाल में ग्रामीण
जंगल के चर्च में अंधविश्वास का धंधा , 21वीं सदी में छाड़ – फूंक , तो क्या अंधविश्वास के जाल में ग्रामीण
शहडोल। देखा जाए तो प्राचीन समय में जब ना ही इंटरनेट सुविधा और ना ही कुप्रथा और अंधविश्वास को लेकर लोगों में जागरूकता थी। वहां से लेकर के 21वीं सदी के भारत का सफर जहां मॉडर्न एरा में विभिन्न प्रकार की आधुनिक सुविधाएं मोबाइल इंटरनेट जैसे दूरसंचार के माध्यम को दुरुस्त कर लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जहां लोगों को जागरूक करने के लिए शासन हर स्तर पर प्रयास कर रहा है चाहे वह साक्षरता अभियान से हो या फिर ग्रामीणों के अधिकार से उनको अवगत कराना।
इसके बावजूद भी आज जो देखा वह मेरी सोच और समझ के बिल्कुल परे हैं। आधुनिकता के इस दौर में आज भी आदिवासी अंचल संभाग के ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास का धंधा जारी है जहां पर खुद को फलाने धर्म का ठेकेदार बताकर लोगों के साथ झाड़ फूंक और जादू टोना के नाम पर ठगी का व्यापार किया जा रहा है।
जो की स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। जो की उसे धर्म के नैतिक सिद्धांत के विपरीत है बल्कि ग्रामीण के लिए एक छलावे से ज्यादा और कुछ भी नहीं।
दरअसल मामला संभाग के उमरिया जिले के अंतर्गत हथपुरा ग्राम पंचायत का है
जहां पर जंगलों के बीचों बीच एक चर्च हैं। सूत्रों के अनुसार यहां पर प्रत्येक रविवार को झाड़ फूंक मेला लगता है। जहां पर वहां के स्थानीय ग्रामीण एवं आसपास के गांव से लोग आकर झाड़-फूंक करवाते हैं। इतना ही नहीं अपुष्ट सूत्रों का यह भी दावा है कि यहां पर आदिवासियों का धर्मांतरण कराया जाता है। हालांकि इसकी पुष्टि एमपी आयुष न्यूज़ एवं जन सक्रिय नहीं करता है।
पूरे मामले की तह तक जाने के लिए हमारी टीम संबंधित जगह पर गई। जहां चर्च के अंदर काफी संख्या में आसपास के गांव एवं इलाके के लोग वहां एकत्रित थे। और वहां पर झाड़ फूंक किया जा रहा था जिसका वीडियो आप देख सकते हैं।
सवाल सिर्फ इतना है कि इस प्रकार अंधविश्वास की मानसिकता से ग्रसित लोगों को प्रशासन ने क्या छूट दे रखी है।
जोकि हथपुरा के चर्च में झाड़ – फूंक किया करते हैं। वहीं सूत्रों के दावों के अनुसार पूरा मामला धर्मांतरण के विषय पर संदेह उत्पन्न कर रहा है। वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि इस पूरे कर को संचालित करने वाले लक्षपात सिंह और जितेंद्र सिंह नाम के दो व्यक्ति हैं जो की। झाड़ फूंक जैसे अंधविश्वास को क्षेत्र मे बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं
