सावधान: कहीं आप भी राजकमल बुक स्टोर से तो बुक नहीं खरीद रहे।
शहडोल (निशांत संजय गर्ग) । हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद शहर के प्राइवेट स्कूलों और बुक स्टोर मालिकों में सांठगांठ का खेल चल रहा है। किताबें खरीदने के मामले में मनमानी वसूली के कारण अभिभावकों को चपत लग रही है। फिर भी शिक्षा विभाग मौन है। स्थिति यह है कि शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों की किताबें फिक्स दुकानों पर ही मिल रही हैं। किताबों की मोटी कीमत देना पड़ रहा है।
वैसे तो प्राइवेट स्कूलों की ओर से अभिभावकों से यह कहा गया है कि वह कहीं से भी बुक्स खरीद सकते हैं, लेकिन पूरे शहर की दुकानों के धक्के खाने के बाद अभिभावकों को चंद दुकानों पर संबंधित पाठ्य पुस्तकें मिल रही हैं। दुकानदारों की ओर से अभिभावकों पर किताबों का पूरा सेट खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। वह अपनी मर्जी से कोई किताब घटा नहीं सकते हैं। किताबों के साथ स्टेशनरी भी लेना जरूरी
किताबों के साथ-साथ नोट बुक और स्टेशनरी भी सेट के साथ लेनी पड़ रही है। नोट बुक और स्टेशनरी न लेने पर सेट नहीं दिया जा रहा है। प्रशासन के शिक्षा विभाग ने इस मामले में आंखें बंद की हुई है।
एक्सचेंज करने में होता है दर्द ग्राहकों से करता बदतमीजी
ऐसा ही एक मामला प्रतिष्ठित राजकमल बुक स्टोर की जहां पर गुरुवार की रात्रि को यह देखने को मिला कि एक बच्चा किताब लेकर गया पर वह किताब गलत था यह बात उसको घर आकर पता चला वह किताब वापस कर दें राजकमल बुक स्टोर गया तो राजकमल बुक स्टोर के संचालक के द्वारा बच्चे के साथ अभद्रता से पेश आते हुए यह कहा गया कि किताब वापस नहीं होगा बच्चे द्वारा बोला गया कि किताब बदले मुझे किताब ही चाहिए पर संचालक द्वारा किताब वापस नहीं किया गया अगर देखा जाए तो स्थानीय प्रशासन द्वारा बुक स्टोरों में कारवाही के बजाय इन्हें संरक्षण दे रही है, यह बुक स्टोर अपने मनमर्जी तरीके से रकम वसूलते रहते हैं।
इनका कहना
हमारे यहां ग्राहकों के साथ ऐसा कोई बर्ताव नहीं किया जाता ।
ग्राहक स्वतंत्र है वह जैसा चाहे वैसा खरीद सकता है।
पप्पू जैन संचालक राजकमल बुक डिपो शहडोल
