दबंग भूमाफिया शिक्षक दिवाकर का यह कैसा राजनैतिक रसूख
जिसके आगे तहसीलदार नतमस्तक

जयसिंह नगर (निशांत संजय गर्ग) । ज्ञात हो कि अखबारों एवं सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोर रहे भूमाफिया शिक्षक दिवाकर तिवारी के करतूतों का लगातार हम अपने समाचार के माध्यम से पर्दाफाश कर रहे हैं।
लेकिन आज हम आपको तथाकथित भूमाफिया शिक्षक के राजनीतिक रसूख के बारे में बताएंगे।
कि किस प्रकार इन्होंने अपने धनबल के दम पर गरीब आदिवासी स्व .लल्ला सिंह के भूमि पर शासकीय बताकर कब्जा कर लिया।
और न्याय की आस में विगत कई वर्षों से भटक रहे आदिवासी कि न्याय की राह देखते देखते मृत्यु हो गई।
जोकि हमारे क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए एक ऐसा विचारणीय विषय है। जिसको सोचने से ही रूह कांप उठती है।
दरअसल आदिवासी की भूमि पर कब्जे का प्रकरण कई वर्षों से चल रहा है आवेदक लल्ला सिंह न्याय की राह तकते हुए स्वर्गवासी हो चुके हैं।
अब इनके पुत्र ओंकार सिंह विगत 4 वर्षों से न्याय की तलाश में दर-दर भटक रहे।
न्यायालय के आदेश होने के बाद भी शिकायतकर्ता पूर्णता असमर्थ है।
उसकी अवस्था इस प्रकार की है की समस्त आदेश होने के बावजूद भी वह अपने हक की भूमि पर चाह कर भी हक नहीं बता पा रहा है।
कई बार यह प्रकरण तहसील न्यायालय जयसिंह नगर में चल चुका है और तथाकथित भूमाफिया शिक्षक के ऊपर कार्रवाई हेतु न्यायालय ने आदेश दिया है।
साथी भू आधार संहिता 1959 की धारा 248 के तहत की कार्यवाही भी तहसील न्यायालय द्वारा संबंधित व्यक्ति की जा चुकी है। जिसमें साफ लिखा है कि हो रहे निर्माण कार्य को रोका जाए एवं दस हजार का अर्थदंड अतिक्रमण कारी के ऊपर लगाया जाए।
जिसके बाद तथाकथित भूमाफिया शिक्षक द्वारा स्वयं स्वीकार भी किया है कि इस भूमि के अलावा उसके पास और कोई भूमि नहीं साथी 10 हजार का जुर्माना भी भू माफिया शिक्षक दिवाकर तिवारी द्वारा भरा गया ।
लेकिन भू माफिया शिक्षक का दबदबा ऐसा जिसके आगे शायद तहसील न्यायालय की भी न्याय प्रणाली को जंग लग गई और निर्माण कार्य पूरा हो गया।
किंतु सवाल यह उठता है कि तहसील न्यायालय की ऐसी कौन सी मजबूरी थी जो कि आज दिनांक तक भू माफिया शिक्षक का निर्माण नहीं रोका गया।
इससे कहीं ना कहीं जयसिंह नगर तहसील कार्यालय एवं वहां का राजस्व विभाग संदिग्धता के दायरे में हैं।
जिम्मेदारों का गोल मोल जवाब
जब इस पूरे प्रकरण के संबंध में जयसिंहनगर तहसीलदार लक्ष्मण पटेल से संपर्क साधा गया तो उन्होंने पूरे दोष का टिकरा आर आई व पटवारी पर फोड़ दिया।
साहब कहते हैं कि आर आई व पटवारी के द्वारा स्पष्ट प्रतिवेदन जारी न कर पाने के कारण वह प्रकरण सुलझ नहीं पा रहा है।
मैं अभी तक मौके पर नहीं गया हूं।
फाइल मैंने मंगाई है।
उसमें देखकर ही मैं कार्यवाही कर पाऊंगा।
अब देखना यह होगा कि पूरे प्रकरण को तहसीलदार साहब द्वारा किस प्रकार से देखा जाता है।
एवं अतिक्रमण कारी शिक्षक के ऊपर क्या कार्यवाही की जाती है।
