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शहडोल : भ्रष्टाचार के बाद अब शराबियों का अड्डा बना जिला शिक्षा विभाग , अंधेर नगरी चौपट राजा के तर्ज पर हो रहा कार्य ।

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भ्रष्टाचार के बाद अब शराबियों का अड्डा बना जिला शिक्षा विभाग ,

अंधेर नगरी चौपट राजा के तर्ज पर हो रहा कार्य ।

शहडोल (संजय गर्ग) ।  मामला जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का है ।
जहां पर कार्यालय के अंदर अब तक तो आपने भ्रष्टाचार के नए-नए किस्से सुने होंगे लेकिन आज हम बात करेंगे जिला शिक्षा कार्यालय को किस प्रकार वहां के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सहदेकर शराब का अड्डा बना दिया गया है।
दरअसल जिला शिक्षा कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर जितेंद्र सिंह मरावी जोकि आए दिन कार्यालय के अंदर शराब पीकर आते हैं।
गौर करने वाली बात तो यह है की तथाकथित व्यक्ति प्रतिदिन शराब के नशे में होकर कार्यालय में आता है और कार्यालय में पदस्थ जिम्मेदारअधिकारियों के द्वारा संबंधित व्यक्ति को पूर्ण रूप से संरक्षण देकर कार्यालय को भ्रष्टाचार के बाद अब शराब का अड्डा बना दिया गया है जो कि कार्यालय में शराब पीकर तो आते ही हैं साथ में शराब की सीसी भी जेब में लेकर आते हैं ।
एवं तथाकथित व्यक्ति के द्वारा नशे में कार्यालय समेत कार्यालय में आने जाने वाले आगंतुकों से अभद्र भाषा में वार्तालाप किया जाता है साथी गाली गलौज किया जाता है।

क्या शराब के नशे में पढ़ाया जाता है शिक्षा का पाठ
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जहां पर समस्त समस्त शैक्षणिक कार्य का संचालन होता है।
तो वहां शराब के नशे में कार्य करना या आना जाना उचित है या अनुचित इसका फैसला हमारे पाठकों को करना है।
किंतु कार्यालय में इस प्रकार के कृतियों को यदि अंजाम दिया जा रहा है तो क्या इसकी खबर जिला शिक्षा अधिकारी को न होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है।
क्या इस प्रकार शिक्षा के स्तर को जिला शिक्षा अधिकारी बढ़ाएंगे यह कहीं ना कहीं यह मामला जिला शिक्षा अधिकारी समेत कार्यालय में पदस्थली कर्मचारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

क्या नशा मुक्ति अभियान से नहीं है जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का वास्ता
इन दिनों जगह-जगह नशा मुक्ति हेतु अभियान चलाया जा रहा है किंतु आलम यह है कि प्रशासनिक कार्यालय में ही कार्य कर रहे अधिकारी व कर्मचारी इस प्रकार नशे द्युत होकर कार्यालय का माहौल खराब कर रहे है।

लेख अधिकारी कर रहे मामले को दबाने का प्रयास

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ लेख अधिकारी शिवकुमार गुप्ता के द्वारा इस पूरे मामले में पर्सनल मैटर सॉल्वर का रोल निभाया जा रहा है।
जब हमारी टीम कार्यालय में कवरेज के दौरान पहुंची तो संबंधित व्यक्ति के द्वारा कहा गया कि उसको कुछ मत करना जो भी है हम समझ लेंगे।
अब समझ लेंगे इसका मतलब भी लेख अधिकारी समेत हम सब भी समझ रहे हैं।
शिवकुमार गुप्ता के इस वक्तव्य से एक बात तो साफ हो जाती है।
कि जितेंद्र सिंह मरावी जैसे शराबियों को कार्यालय में एंट्री देने का कार्य किया जाता है।

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