शहडोल : दावे और वादों के बीच में आखिर क्यों अधर में लटका है अतिथि शिक्षकों का भविष्य , 4 माह से राज्य के 72 000 हजार से अधिक अतिथि शिक्षकों का अब तक नहीं मिला मानदेय
दावे और वादों के बीच में आखिर क्यों अधर में लटका है अतिथि शिक्षकों का भविष्य ,
4 माह से राज्य के 72 000 हजार से अधिक अतिथि शिक्षकों का अब तक नहीं मिला मानदेय
शहडोल (संजय गर्ग) । सरकार की दावे और वादो के बीच लगभग राज्य के 72000 से अधिक अतिथि शिक्षकों का भविष्य अंधकार मय हो गया है।
हालात कुछ ऐसे हैं कि छात्रों के भविष्य को ज्ञान रूपी प्रकाश से उजागर करने वाले अतिथि शिक्षक आज खुद विगत 4 महीने से मानदेय के अंधकार से जूझ रहे हैं।
जिसका कारण प्रदेश में बैठी मोहन सरकार के दावे व तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के वादों के बीच में लटक गई है।
दरअसल विधानसभा चुनाव से पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि शिक्षकों के लिए कई बड़ी-बड़ी घोषणाएं की जिनमें अतिथि शिक्षकों को 50% आरक्षण के साथ ही उनके मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई।
जिसमें वर्ग एक का मानदेय 9,000 से बढ़कर 18,000 कर दिया गया तो वहीं वर्ग 2 के अतिथि शिक्षकों का मानदेय 7,000 से 14,000 कर दिया गया।
तथा वर्ग तीन के अतिथि शिक्षकों का मानदेय 5,000 से 10,000 कर दिया गया। इसके बाद अतिथि शिक्षकों ने राहत की सांस ली ऐसा लगा कि अब अतिथि शिक्षकों को भी वह सम्मान मिलेगा जो की परमानेंट शिक्षकों को मिलता है।
विधानसभा चुनाव के बाद कुछ ऐसी पलटी तस्वीर
किंतु विधानसभा चुनाव के बाद शिवराज सिंह चौहान के वादे जहां एक तरफ अतिथि शिक्षकों के लिए एक उम्मीद का किरण बनी , तो वहीं दूसरी ओर सीएम फेस बदलते ही शिवराज सिंह चौहान के सारे वादे जो उन्होंने अतिथि शिक्षकों से किए थे।
वह मोहन सरकार के आते ही ठंडे बस्ते में चले गए । और एक बार फिर अतिथि शिक्षक अपने आपको ठगा सा महसूस करने लगे ।
बढ़ता मानदेय तो दूर मूल वेतन के पड़े लाले
विगत चार माह से राज्य के 72000 से अधिक अतिथि शिक्षकों को बढ़ता मानदेय तो दूर मूल वेतन के ही लाले पड़े हुए हैं।
बावजूद इसके भी पूरी तन्मयता के साथ अतिथि शिक्षक दूर-दूर जाकर अपना कार्य कर रहे हैं।
अन्य योजनाओं का हो रहा भुगतान
राज्य में बैठी मोहन सरकार के द्वारा अन्य योजनाओं जैसे लाडली बहना जैसे योजनाओं का जो की भारतीय जनता पार्टी के लिए इस विधानसभा चुनाव में ब्रह्मास्त्र की तरह उभर कर सामने आई। इन योजनाओं का भुगतान करने के लिए राज्य सरकार के पास पैसे हैं।
किंतु लगन से 4 महीने से कार्यरत अतिथि शिक्षकों का मानदेय देने के लिए सरकार लगातार बैठक तो कर रही है किंतु भुगतान नहीं ऐसा क्यों????
तकनीकी समस्याओं का हवाला दे रही सरकार
जब भी अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान करने की बात आती है तो वित्त विभाग द्वारा तकनीकी समस्याओं का हवाला दिया जाता है यह कहा था उचित है यदि वित्तीय विभाग में तकनीकी समस्या है तो कैसे लाडली बहना योजना का पैसा उनके खातों तक पहुंचता है।
यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।??
अब देखना यह होगा कि कब तक बिना वेतन के अतिथि शिक्षक अपनी सेवाएं देते रहेंगे और उनके घर कैसे चलेगा ऐसे कई सारे सवाल लगातार उठाते रहेंगे???
इनका कहना
1. आपने मुझे यह नहीं जानकारी दी है मुझे जानकारी नहीं थी की अतिथि शिक्षकों का भुगतान नहीं हो रहा है अब मैं पता करता हूं की क्यों नहीं हो रहा है।
कमल प्रताप सिंह (जिला अध्यक्ष) भारतीय जनता पार्टी जिला – शहडोल ।
2. यह लोग कुछ नहीं देंगे झूठ और प्रलोभन की सरकार है झूठी सरकार है।
लोकसभा हो जाने दीजिए लाडली बहन योजना कभी पैसा नहीं मिलेगा ।
जनता को रिझाना लालच देकर भूल जाना यही कर सकते हैं।
सुभाष गुप्ता (जिला अध्यक्ष )
जिला कांग्रेस कमेटी जिला शहडोल
