शहडोल: आखिर किसके कृपा पर ससुर दामाद बने प्रभारी प्राचार्य , नियम हुए तार – तार अपात्र व्यक्ति को दिया गया विशिष्ट संस्था का प्रभार
आखिर किसके कृपा पर ससुर दामाद बने प्रभारी प्राचार्य
नियम हुए तार – तार अपात्र व्यक्ति को दिया गया विशिष्ट संस्था का प्रभार
शहडोल (संजय गर्ग)। शासन की नियमों की धज्जियां उड़ाने में यदि हम जनजाति कार्य विभाग की बात करें तो इस विभाग का ट्रैक रिकॉर्ड अलग ही लेवल पर दिखता है। आए दिन यह विभाग कहीं ना कहीं किसी न किसी विषय को लेकर अखबारों में सुर्खियां बटोरता रहता है।
आज एक बार फिर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ससुर व दामाद को विभाग के अधिकारियों ने सीधा लाभ पहुंचाया है।
मामला कुछ इस प्रकार
दरअसल मामला जिले के जनजाति कार्य विभाग का है जहां पर हाल ही में कन्या शिक्षा परिसर कंचनपुर में पदस्थ प्राचार्य रंजीत सिंह धुर्वे के सेवानिवृत्ति से पूर्व माध्यमिक शिक्षक जो की विशिष्ट संस्था के लिए अपात्र है उसे प्रभारी प्राचार्य के पद का दायित्व दे दिया गया ।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संभागीय उपायुक्त कार्यालय जनजाति कार्य विभाग शहडोल के द्वारा नियमों के अनदेखी कर पहले कन्या शिक्षा परिसर मानपुर में पदस्थ रहे सुदर्शन प्रसाद तिवारी उच्च श्रेणी शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य कन्या शिक्षा परिसर पाली का प्रभार दिया गया। इसके बाद कन्या शिक्षा परिसर कंचनपुर सोहागपुर जिला शहडोल में कार्यरत रणजीत सिंह धुर्वे जो की हाल ही में 31 मार्च को सेवानिवृत्ति हुए उनके सेवानिवृत्ति से पूर्व 13 मार्च को संभागीय उपयुक्त द्वारा सीताराम मिश्रा जो की कन्या शिक्षा परिसर बुढार पदस्थ हैं। एवं इनका मूल पद माध्यमिक शिक्षक का है इन्हें नियमों को दरकिनार कर कन्या शिक्षा परिसर कंचनपुर का प्रभार सौंप दिया गया जबकि यह संस्था विशिष्ट है ।
प्रथम श्रेणी के प्राचार्य व उच्चतर माध्यमिक शिक्षक या व्याख्याता ही इस पद को ग्रहण कर सकते हैं ऐसा नियम कहते हैं।
किंतु सारे नियमों को दरकिनार करते हुए जनजाति कार्य विभाग में सेटिंग का खेल चलाया गया ऐसी जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई।
दोनों नियुक्तियों का क्या है क्रॉस कनेक्शन
संभागीय उपायुक्त कार्यालय में जिस प्रकार दोनों ही नियुक्तियां की गई वह पूर्णता संध्यास्पद है जिसका खुलासा उच्च स्तरीय जांच में हो जाएगा दरअसल मानपुर में पदस्थ सुदर्शन तिवारी एवं कन्या शिक्षा परिसर बुढ़ार में पदस्थ सीताराम मिश्रा ससुर व दामाद है।
यह दोनों की नियुक्तियां पूर्णता संदेश पद हैं जो कि कहीं ना कहीं संभागीय उपयुक्त कार्यालय में पदस्थ अधिकारी उषा अजय सिंह के कार्य कुशलता पर सवाल उठाते हैं।
इन नियुक्तियों में बड़ा सवाल यह है कि दोनों ही विशिष्ट संस्थाओं में सुदर्शन तिवारी और सीताराम मिश्रा जो की ससुर दामाद कहलाते हैं दोनों को प्रभार एकाएक दे देना कहीं ना कहीं किसी बड़े सेटिंग का खेल दिखाई पड़ता है।
अब यह संजोक या सोची समझी रणनीति यह तो जांच से ही सामने आएगा।
कुछ ऐसा कहते हैं नियम
यदि शासन के नियम अनुसार इन नियुक्तियों पर नजर डालें तो यह पूर्णत नियम विरुद्ध नियुक्तियां की गई है इन विशिष्ट संस्थाओं का उत्तरदायित्व की जिम्मेदारी पहले प्रथम श्रेणी प्राचार्य व वरिष्ठ व्याख्याता या उच्च माध्यमिक शिक्षकों को सौंपा जाना चाहिए था।
किंतु सवाल यह उठता है कि जिले में कई प्रथम श्रेणी प्राचार्य एवं वरिष्ठ व्याख्याता उच्च माध्यमिक शिक्षक मौजूद हैं इसके बावजूद भी मानपुर में पदस्थ सुदर्शन तिवारी व कन्या शिक्षा परिषद बुढ़ार में पदस्थ सीताराम मिश्रा जिनका मूल पद माध्यमिक शिक्षक का है जो की कन्या शिक्षा परिसर कंचनपुर जैसे विशिष्ट संस्थान के दायित्व का निर्वहन करने के लिए अपात्र हैं। फिर इन्हें कैसे प्रभारी प्राचार्य का दायित्व सौंपा गया यह एक बहुत बड़ा सवाल है जिसकी उच्च स्तरीय जांच होना अति आवश्यक है।
क्या??? अधिकारियों से है सांठ-गांठ
इसके पूर्व में कन्या शिक्षा परिषद बुढ़ार में प्रचार की पदस्थापना होने से पहले सीताराम मिश्रा ही प्रभार में थे जहां पर उन्होंने अपना घर अपना विद्यालय जैसी योजना के अंतर्गत 1 करोड़ 3 लाख की राशि का आवंटन जो बुढार कन्या परिसर में आया। उक्त आवंटन को भी सीताराम मिश्रा के द्वारा अधिकारियों से मिली भगत कर उक्त राशि का बंदर – बाट कर लिया था। ऐसा हमारे सूत्र बताते हैं।
अब जबकि शासन के द्वारा सभी विशिष्ट संस्थाओं में चयनित प्राचार्य की पदस्थापना की जा चुकी है ऐसी स्थिति में एक बार सीताराम मिश्रा को एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय जैतपुर में प्रभारी प्राचार्य बनाया गया था परंतु वहां के तत्कालीन विधायक के आपत्ति के कारण इन्हें पुनः कन्या परिसर बुढ़ार में माध्यमिक शिक्षक के पद पर वापस करना पड़ा था।
मौके का भरपूर लाभ
समय-समय पर यह दोनों शिक्षक मौके का भरपूर लाभ उठाते हैं जो कि दोनों ससुर व दामाद है तो इन्होंने एक बार फिर मौका देखते हुए जनजाति कार्य विभाग के अधिकारियों से सेटिंग बनाकर सुदर्शन तिवारी जो की सीताराम मिश्रा के ससुर हैं और सीताराम मिश्रा जो कि उनके दामाद है दोनों ने मौके का भरपूर फायदा उठाया और दोनों ने विशिष्ट संस्था का प्रभार ले लिया ।
अब देखना होगा कि प्रशासन के सामने इस खुलासे के बाद कोई कार्रवाई होती है या नहीं होती।
