शहडोल: चैत्र नवरात्र के द्वितीय दिवस पर करें मां ब्रह्मचारिणी की आराधनासाधकों को त्याग , वैराग्य, संयम , और सुख की होगी प्राप्ति
चैत्र नवरात्र के द्वितीय दिवस पर करें मां ब्रह्मचारिणी की आराधना
साधकों को त्याग , वैराग्य, संयम , और सुख की होगी प्राप्ति
शहडोल (संजय गर्ग)। चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो चुकी है। लगातार 9 दिनों तक मां आदिशक्ति के 9 स्वरूपों भक्तों द्वारा विधिवत्त पूजा आराधना की जा रही है।
इसी कड़ी में चैत्र नवरात्रि के द्वितीय दिवस पर आज मां आदिशक्ति के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी।
मां के स्वरूप का है ऐसा वर्णन
पुराणों में वर्णित मां ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप शांत और सौम्य है ऐसी मान्यता है कि आज के दिन मां के इस स्वरूप की पूजा अर्चना करने वाले भक्तों व उनके साधकों को त्याग , वैराग्य , संयम , समेत अनंत सुख व समृद्धि की प्राप्ति होती है ।
भगवान शिव को आराध्या के रूप में प्राप्त करने की थी तपस्या
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एवं प्राचीन पुराणों में से शिव महापुराण में वर्णित कथा के अनुसार माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और देवी मैना की पुत्री हैं, जिन्होंने नारद मुनि के कहने पर भगवान शंकर की कठिन तपस्या की थी और इसके प्रभाव से ही उन्होंने भोलेनाथ को पति के रूप में प्राप्त किया था। इसके साथ ही कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है।
अपर्णा नाम से भी प्रसिद्ध है मां
ऐसा माना जाता है कि तपस्या के दौरान देवी ने तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बेल पत्र खाए थे। वे हर दुख सहकर भी शंकर जी की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने बेल पत्र का भी त्याग कर दिया था। फिर कई हजार वर्षों तक उन्होंने निर्जल व निराहार रहकर तपस्या की, जब उन्होंने पत्तों को खाना छोड़ा तो उनका नाम अपर्णा पड़ गया। घोर तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीर्ण हो गया।
