S.K. Paswan
ब्रेकिंग न्यूज़
शहडोल : राजस्व की अंधेरगर्दी से भू-स्वामियों में छाए संकट के बादल ,खुद का ही आदेश पालन कराने एसडीएम ... शहडोल : राजस्व की अंधेरगर्दी से भू-स्वामियों में छाए संकट के बादल ,खुद का ही आदेश पालन कराने एसडीएम ... उमरिया : शासकीय. विद्यालय, बंनौदा में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन नशा एवं अपराध मुक्त समाज की स्थापन... शहडोल : किसान की सहमति के बगैर पीएचई विभाग ने खेत पर खोद दी नाली, जनसुनवाई में न्याय की लगाई गुहार शहडोल : नवधन का रिण थाने में एसआई सा जिन्न.....?? बने गले की फांस ना थूक सका न लील शहडोल : राम मंदिर में चोरी करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था पर डकैती, भ्रष्ट ट्रस्ट को तुरंत भंग कर  ... शहडोल :श्री राधे हमारी सरकार फिकिर मोहि काहे की : स्वामी युगल शरण  शहडोल : उप संचालक जनसंपर्क श्री मर्सकोले ने पुनः किया पदभार ग्रहण , पत्रकारों में प्रसन्नता की लहर शहडोल : 3 साल से प्रभार में टिकी सचिव बाबूलाल की नींव , जिला पंचायत सीईओ कार्यवाही की मांग , पंचायत... शहडोल : सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल का आठवां दिन देश के भ्रष्ट शिक्षा तंत्र को बदलने के लिए सीजेपी का...

शहडोल : त्रिदेव के क्रोध ऊर्जा से हुई  मां चंद्रघंटा की उत्पत्ति चैत्र नवरात्र का आज तृतीय दिवस

0 91

त्रिदेव के क्रोध ऊर्जा से हुई  मां चंद्रघंटा की उत्पत्ति चैत्र नवरात्र का आज तृतीय दिवस

शहडोल (संजय गर्ग ) ।  चैत्र नवरात्रि का आज यानी 1 अप्रैल को तृतीय दिन है।

आज के दिन मां आदिशक्ति जगत जननी के तृतीय स्वरूप देवी चंद्र घंटा की आराधना की जाती है।

इस दिन जो लोग कठिन व्रत का पालन कर मां का पूजन करते हैं उन्हें शुभ फल की प्राप्ति होती है।

और उनके जीवन में शुभता आती हैं।

 इस कथा के बिना अधूरी है मां के इस स्वरूप की पूजा

पौराणिक मान्यताओं एवं धार्मिक पुराने के अनुसार धरती पर दनवों के बढ़ते आतंक को समाप्त करने हेतु देवी दुर्गा ने यह स्वरूप धारण किया था।

उसके पीछे प्रचलित कथा यह भी है कि महिषासुर नामक दानव ने देवराज इंद्र के सिंहासन पर कब्जा करने एवं स्वर्ग लोक पर अपना आधिपत्य जमाने की मंश बनाई जब देवताओं को इसका पता चला तो वह काफी चिंतित हो गए।

इसके बाद समस्त देवताओं ने त्रिदेव से सहायता मांगी और जब यह बात देवताओं को ब्रह्मा विष्णु , महेश ,अर्थात त्रिदेव को बताई तो त्रिदेव काफी क्रोधित हो गए।

त्रिदेव की अत्यधिक क्रोध से तीनों के मुख से जो क्रोध ऊर्जा उत्पन्न हुई उससे मां चंद्रघंटा की उत्पत्ति हुई।

इसके बाद भगवान शिव ने अपना त्रिशूल एवं भगवान विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र मां को प्रदान किया।

साथी देव राज इंद्र ने मां को अपना एक घंटा प्रदान किया ।

तत्पश्चात महिषासुर का संघर्ष करने के लिए मां ने उसका सामना किया।

माता रानी के दिव्य स्वरुप को देखकर दानवों का राजा महिषासुर भयभीत हो गया।

इसके बाद मां ने महिषासुर का वध कर देवताओं की रक्षा करते हुए स्वर्ग को दानवों से मुक्त कराया ।

तब से लेकर आज तक प्रत्येक नवरात्रि पर तृतीय दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।

कठिन व्रत के पश्चात मां के इस कथा का पाठ करना आवश्यक होता है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.