जयसिंहंनगर / शहडोल : बीमा कंपनियां किसानों के फसलों की कर लेती हैं बीमा लेकिन फसल नुकसान होने पर नहीं मिलती है किसानों को क्षतिपूर्ति
बीमा कंपनियां किसानों के फसलों की कर लेती हैं बीमा लेकिन फसल नुकसान होने पर नहीं मिलती है किसानों को क्षतिपूर्ति

जयसिंहंनगर / शहडोल । धान की फसल में रोग, लग जाने से किसान भारी तबाह है बीमा कंपनी की लापरवाही से किसान बेहाल क्षेत्र में इस बार लगातार वर्षा और मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण धान की फसल में रोग फैल गया है। फसल पीली पड़ने और झुलसने एवं वाली सुख जाने से मंहगी दवाईया डालने के बाद भी रोग थमने का नाम नहीं ले रहा है पूरे खेत के खेत फसल चौपट हो गई है उत्पादन में भारी गिरावट की संभावना है। ऐसे में किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत राहत की उम्मीद की थी, लेकिन बीमा कंपनी की लापरवाही ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।
किसानों का कहना है कि बीमा कंपनी के अधिकारियों द्वारा न तो सर्वे किया जा रहा है और न ही मुआवजा देने की दिशा में कोई कदम उठाया गया है। ग्रामों में फसल की स्थिति बेहद खराब है, परंतु बीमा प्रतिनिधि खेतों तक नहीं पहुंच रहे हैं। कई किसानों ने संबंधित विभागों को शिकायतें भी भेजी हैं, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। ना तो आदिम जाति सहकारी समितियो के द्वारा ना ही बीमा कंपनियों के द्वारा सर्वे कराई जा रही है।
स्थानीय किसानो ने बताया, कि “हमने समय पर प्रीमियम जमा किया था ताकि नुकसान की स्थिति में हमें मदद मिल सके, लेकिन अब जब फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है, तो कोई सुनवाई नहीं हो रही।” इसी तरह कई अन्य किसानों ने बताया कि बीमा कंपनी सर्वे के नाम पर केवल कागज़ी खानापूर्ति कर रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान में पत्तियों के झुलसने और कंडुआ रोग के प्रकोप से उत्पादन में 40 से 60 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है। यदि समय पर मुआवजा नहीं दिया गया तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
पूर्व मंडल अध्यक्ष भाजपा मंडल करकी एवं जयसिंहनगर राजेश द्विवेदी एवं रामनारायण पांडेय ने प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि तत्काल फसल सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाए।
किसानों की अपील है कि सरकार और जिला प्रशासन हस्तक्षेप कर बीमा कंपनी पर जवाबदेही तय करे, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से किसान दोबारा न परेशान हों। प्राप्त जानकारी के अनुसार विकास खंड जयसिंहनगर के समस्त आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों से लगभग 1393 किसानों का बीमा कराया गया है। अगर बीमा कंपनियों के द्वारा क्षति पूर्ति किसानों को नहीं दिया जाता है तो किसान कर्ज की अदायगी कैसे कर पाएंगे। जो अत्यंत चिंतनीय विषय है।
