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शहडोल : मध्यप्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, :मनीष श्रीवास्तव , आखिर अपने पास गृह विभाग रखकर क्या साबित करना चाहते हैं मुख्यमंत्री मोहन?

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मध्यप्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, :मनीष श्रीवास्तव ,

आखिर अपने पास गृह विभाग रखकर क्या साबित करना चाहते हैं मुख्यमंत्री मोहन?

शहडोल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि, मध्यप्रदेश एक बार फिर उस दर्दनाक घटना से दहल उठा है, जिसने न केवल समाज को झकझोर दिया, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था की कमजोरियों को भी बेनकाब कर दिया। छह वर्ष की एक मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी ने हर संवेदनशील नागरिक को भीतर तक चोट दिया है। यह घटना सिर्फ अपराध की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता की भी कहानी कहती है, जो नागरिकों विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदार होती है। घटना के पांच दिन बाद, जब जनआक्रोश सड़क पर उतर आया, तब कहीं जाकर पुलिस ने आरोपी की खोजबीन तेज की। यह देरी अपने क्या मध्यप्रदेश की कानून-व्यवस्था इतनी सुस्त हो चुकी है कि लोगों के दबाव के बिना वह हरकत में नहीं आती?

मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि,प्रदेश की शासन व्यवस्था में गृह विभाग वह कड़ी है जो कानून-व्यवस्था का सीधा और सबसे बड़ा दायित्व निभाता है। लेकिन इस बार एक और सवाल चर्चा में है वह यह कि पिछले सात दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने इतने लंबे समय तक गृह मंत्रालय अपने पास रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विकास योजनाओं, उद्योगों, निवेश, शिक्षा और कई अन्य क्षेत्रों पर खुद निगरानी रखते हुए लगातार सक्रिय दिखाई देते हैं। लेकिन यदि विकास योजनाओं में व्यस्तता बढ़ रही है, तो सवाल उठता है क्या उन्हें गृह विभाग का महत्वपूर्ण दायित्व किसी सक्षम मंत्री को नहीं सौंप देना चाहिए?

उन्होंने कहा कि,गृह विभाग एक फुल-टाइम जिम्मेदारी है। कानून-व्यवस्था में मामूली चूक भी बड़े संकट में बदल सकती है। इसलिए विशेषज्ञों और आमजन की ओर से यह मांग उठना स्वाभाविक है कि इस विभाग को एक ऐसे मंत्री के अधीन किया जाए जो सिर्फ सुरक्षा, पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण पर पूरा ध्यान दे सके।

उन्होंने बताया कि,राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट मध्यप्रदेश के लिए चिंता का गंभीर विषय है। प्रदेश लगातार उन राज्यों की सूची में शामिल है जहां नाबालिग लड़कियों के खिलाफ अपराधों की संख्या सबसे अधिक है। रिपोर्ट बताती है कि दुष्कर्म, छेड़छाड़, अपहरण और यौन शोषण के मामलों में मध्यप्रदेश की स्थिति चिंताजनक है। इन अपराधों का लगातार बढ़ना इस बात का संकेत है कि सुरक्षा तंत्र या तो पर्याप्त मजबूत नहीं है या फिर अपराधियों में कानून का भय कम हुआ है। और जब अपराधी बेखौफ होता है, तो नतीजा ऐसी ही विभत्स घटनाओं के रूप में सामने आता है।

मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि, यदि मुख्यमंत्री मोहन अन्य विकास कार्यों में अधिक व्यस्त हैं, तो गृह मंत्रालय को एक अनुभवी मंत्री को सौंपना अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।अपराध के गंभीर मामलों में देरी या लापरवाही होने पर कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि,हर घटना के बाद उठने वाला यह सवाल “मध्यप्रदेश में कब तक बहन-बेटियों के साथ इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी?” हर बार बिना जवाब के रह जाता है। लेकिन हर नई घटना के साथ इस सवाल की पीड़ा और गहरी हो जाती है। सरकारें बदलती हैं, अधिकारी बदलते हैं, योजनाएँ आती हैं, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा आज भी जस का तस खड़ा है। यदि अब भी व्यवस्था नहीं जागी, तो भविष्य और भयावह हो सकता है। मध्यप्रदेश में हुई हालिया घटना केवल एक बच्ची के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि पूरे तंत्र के लिए आईना है।

 

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