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शहडोल : एक कहानी पर नहीं विराम दूसरे की तैयारी_ न जाने यह भ्रष्टाचार है कैसी बीमारी तो क्या???लोकायुक्त और विभाग की क्लीन चिट , या फिर गांधी जी के ऐनक से उल्टा सीधा एक समान

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एक कहानी पर नहीं विराम दूसरे की तैयारी_ न जाने यह भ्रष्टाचार है कैसी बीमारी तो क्या???लोकायुक्त और विभाग की क्लीन चिट , या फिर गांधी जी के ऐनक से उल्टा सीधा एक समान

शहडोल / जयसिंहनगर (निशांत संजय गर्ग)। कहते हैं कि अगर एक बार खाने की आदत पड़ जाए तो वह आदत लत बन जाती है । फिर वह चाहे पैसे की हो या नशे की या फिर और कोई बिन खाए रहा न जाए भ्रष्टाचार कैसे आए यह तो हम सभी ने देख और सुन रखा है। लेकिन भ्रष्टाचार के सागर में गोते लगाना भी अपने आप में एक कला ही मानिए।
ऐसा ही एक बिन खाए रहा ना जाए का मामला जिले के जयसिंहनगर क्षेत्र अंतर्गत शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चितरांव का है जहां वर्ष 2020 में तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य रहे राजकुमार  को लोकायुक्त रीवा की टीम ने गायत्री वैश्य जो की कथित विद्यालय में भृत के पद पर पदस्थ थी उनसे लंबित वेतन के भुगतान हेतु ₹10 हजार रुपए की रिश्वत राशि की मांग करने पर कथित शिक्षक को 20 फरवरी 2020 को नगद रिश्वत की राशि लेते हुए लोकायुक्त की टीम रीवा ने रंगे हाथ ट्रैक किया था इसके पश्चात लोकायुक्त कार्यालय रीवा ने राजकुमार साकेत के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध करते हुए 46/20 धारा 7 भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 संशोधन अधिनियम 2018 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्यवाही सिर्फ एक दिखावा थी या फिर कार्यवाही के नाम पर कोरम पूर्ति ।

6 वर्ष बाद भी कार्यवाही से गुरेज क्यों??
लोग सोच रहे होंगे कि यह मुद्दा आखिर क्यों उठाया जा रहा है। तो सीधा सा जवाब यह है कि क्या यह भ्रष्टाचार निवारण के जो संस्थान है उनमें में क्या सभी के लिए ऐसे नियम बनते हैं या फिर यह नियम समय-समय पर बदले भी जा सकते हैं।
संबंधित मामले में वापस आए तो देखने वाली बात यह है कि रंगे हाथ रिश्वत लेते लोकायुक्त की टीम ने जिस शिक्षक को दबोचा उसे पर 6 वर्ष बाद भी मामले में कार्यवाही से गुरेज करने का कारण क्या हो सकता है।

विभाग का नरम रवैय मलाई छानने की तैयारी
6 वर्ष बाद भी कथित शिक्षक को ना तो गिरफ्तार किया गया है और ना ही विभाग के द्वारा निलंबित किया गया है विभाग का यह नरम रवैया शिक्षक के लिए वरदान साबित हो रहा है जिस पर सूत्रों की माने तो एक बार फिर कथित शिक्षक मलाई छानने की तैयारी में लगा है।

लोकायुक्त की ढील और विभाग का कृपा 

जन चर्चाओं के अनुरूप एवं अपुष्ट सूत्रों की माने तो संबंधित व्यक्ति आज भी निरंतर कार्य कर रहा है कार्यवाही को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं वर्ष 2025 में लोकायुक्त प्रकरण प्रचलन में होने के बाद भी 6 वर्ष बीत जाने पर आज दिनांक तक चालान प्रस्तुत नहीं किया गया। इतना ही नहीं जनजाति कार्य विभाग को गुमराह कर संबंधित व्यक्ति ने स्थानांतरण प्राप्त कर लिया वर्ष 2025 में शासन द्वारा घोषित स्थानांतरण नीति का गलत तरीके से लाभ लेते हुए विभाग से लोकायुक्त में प्रचलित जानकारी छुपा कर एवं गांधी जी के फेरे में स्थानांतरण का पूरा खेल खेला गया है जहां चितराव हायर सेकेंडरी से आदर्श आवासी हायर सेकेंडरी जयसिंहनगर कर लिया गया। जो कि कहीं ना कहीं विभाग की बड़ी लापरवाही है। जिसकी जांच होना अति आवश्यक है।

सत्ता के साथ पत्र पत्राचार और जुगाड़ 

सूत्रों के अनुसार ब्यौहारी माननीय से जुगाड़ लगाकर नरम रवैया अपनाने वाले जनजाति कार्य विभाग के आला अधिकारियों को संबंधित व्यक्ति के द्वारा पत्र लिखवा कर प्रभारी प्रचारक बनने की मंशा भी जताई जा रही है हालांकि सूत्रों के यह दावे कितने सही हैं यह तो वक्त ही बताएगा। एमपी आयुष न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।

जनता की मांग कार्यवाही का इंतजार
बरहाल यह पूरा मामला लगभग 6 से 7 वर्षों से ठंडे बस्ते में चल रहा है। अब देखना यह होगा कि जनता की मांग के बाद लोकायुक्त और संबंधित विभाग ने जिस प्रकार नरम रवैया संबंधित से अपनाया आया है। उसका परिणाम क्या भ्रष्टाचारियों को सह देना है या उन पर कार्यवाही करना।

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