शहडोल : माटी से जुड़ी परंपरा, रिश्तों में घुला अपनापन , कजलियां की हरियाली में महका भाई-बहन का स्नेह
माटी से जुड़ी परंपरा, रिश्तों में घुला अपनापन , कजलियां की हरियाली में महका भाई-बहन का स्नेह
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शहडोल। सावन की हरियाली के बीच शहडोल अंचल में शनिवार को कजलियां पर्व की धूम रही। गांव की गलियों से लेकर घर-आंगन तक कजलियां पर्व की पारंपरिक छटा देखने को मिली। बहनों ने श्रद्धा के साथ कजलियां पूजन किया और भाइयों के कानों में कजलियां सजाकर उनकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना की। वहीं भाइयों ने भी बहनों को स्नेह और आशीर्वाद के साथ पर्व की खुशियां बांटीं।
ग्रामीण अंचलों में कजलियां पर्व का अपना अलग ही रंग देखने को मिला। सुबह से ही महिलाएं और युवतियां सज-धजकर कजलियां लेकर एक-दूसरे के घर पहुंचती नजर आईं। कई जगह महिलाएं समूह में पारंपरिक लोकगीत गाती हुईं कजलियां लेकर निकलीं। गांव के चौक-चौराहों और घरों के आंगन में “कजलियां ले लो…” की पारंपरिक पुकार और लोकगीतों की गूंज ने वातावरण को खुशनुमा बना दिया।
ग्रामीण संस्कृति में कजलियां पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों में मिठास घोलने वाली लोक परंपरा के रूप में मनाया जाता है। बहनें भाइयों के कान में कजलियां लगाकर उनके मंगलमय जीवन की कामना करती हैं। इसके साथ ही परिवार के बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने की परंपरा भी निभाई गई।
कई ग्रामीण परिवारों में नई पीढ़ी की बेटियों और बच्चों ने भी उत्साह के साथ पर्व में हिस्सा लिया। बुजुर्गों ने उन्हें कजलियां पर्व से जुड़ी पुरानी परंपराओं और लोक मान्यताओं के बारे में बताया। इससे एक ओर जहां पुरानी संस्कृति की यादें ताजा हुईं, वहीं नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास भी नजर आया।
लोकगीतों ने बांधा समां
कजलियां पर्व के मौके पर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की टोलियां लोकगीत गाती नजर आईं। ढोलक और पारंपरिक गीतों के बीच महिलाओं ने पर्व की खुशियां साझा कीं। गांवों में भाई-बहन के स्नेह से जुड़े इस पर्व ने सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया।
आज के आधुनिक दौर में जहां पारंपरिक त्योहारों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, वहीं शहडोल के ग्रामीण अंचल में कजलियां पर्व ने एक बार फिर यह साबित किया कि माटी की खुशबू और लोक संस्कृति से जुड़े पर्व आज भी लोगों के दिलों में उसी तरह बसे हुए हैं।
हर घर में दिखी खुशियों की रौनक
पर्व को लेकर सुबह से ही घरों में चहल-पहल रही। बहनों ने भाइयों को कजलियां लगाईं और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। कई परिवारों में पारंपरिक पकवान भी बनाए गए। गांवों में दिनभर रिश्तेदारों और परिचितों के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा।
कुल मिलाकर कजलियां पर्व ने शहडोल अंचल में भाई-बहन के प्रेम, पारिवारिक आत्मीयता और लोक संस्कृति के रंगों को एक साथ जीवंत कर दिया।
