शहडोल : मांगते रहे परमिशन नहीं दिखाई आईडी……?? कहा कहीं भी घुस सकते हैं ,परिवार वालों ने लगाया आरोप पूर्व में भी की थी सिलेंडर की चोरी , छापेमारी की करवाई बताकर घर में घुसे अज्ञात लोग
मांगते रहे परमिशन नहीं दिखाई आईडी……?? कहा कहीं भी घुस सकते हैं ,
परिवार वालों ने लगाया आरोप पूर्व में भी की थी सिलेंडर की चोरी , छापेमारी की करवाई बताकर घर में घुसे अज्ञात लोग
शहडोल। बीते दिनों अखबारों और सोशल मीडिया की सुर्खियां बन रहा नगर के सोहागपुर वार्ड नंबर 3 का सिलेंडर छापेमारी का मामला जो की बीते दिनांक 17 सितंबर 2026 को दोपहर लगभग 1:30 बजे का बताया जा रहा है जहां पर सुधीर गुप्ता निवासी सोहागपुर वार्ड नंबर 3 के द्वारा थाने में शिकायत कर बताया गया कि उनका 6 भाइयों का संयुक्त परिवार है जो की एक ही परिसर में रहता है घटना दिनांक को दोपहर लगभग 1:30 बजे के आसपास चार लोग खुद को खाद्य आपूर्ति निगम का कर्मचारी व अधिकारी बताकर जबरन घर में घुस पड़े वह भी उस वक्त जब घर में कोई भी पुरुष मौजूद नहीं था साथ ही सभी के घरों में रखे सिलेंडरों को निकाल कर बाहर रखकर फोटो खींचने लगे। इसके बाद वहां का पूरा माहौल देखते ही देखते विवादास्पद हो गया।
शिकायतकर्ता द्वारा थाने में शिकायत देते हुए बताया गया कि 2 वर्ष पूर्व भी इसी प्रकार सिलेंडर चोरी करने की घटना को अंजाम दिया गया था जिस पर प्रदीप द्विवेदी समेत अन्य चार लोगों ने इस बार भी इसी प्रकार का कृत्य किया और पिछली बार भी इसकी पुर्नवृत्ति कर चुके हैं।
शिकायतकर्ता एवं परिवार जनों ने आरोप लगाया है कि खुद को खाद्य अधिकारी व छापेमारी के टीम बताया गया और सभी के सिलेंडर छीन कर बाहर घर से निकाल लिया गया । जब घर के अन्य पुरुष सदस्य घटनास्थल पर पहुंचे थे उनके द्वारा खाद्य अधिकारी एवं उनकी टीम से घर में घुसने का परमिशन ऑर्डर मांगा साथ ही आईडी दिखाने की दरख्वास्त की इसके बावजूद भी परिजनों का दावा है कि छापेमारी कर रहे संबंधित जनों ने ना तो किसी भी प्रकार की आईडी दिखाई और ना ही अपना परिचय दिया साथ ही घर की महिलाओं से अभद्र व्यवहार करते हुए। घर में छापेमारी करने के ऑर्डर दिखाने की बात को लेकर बहस बाजी करने लगे।
मौके पर डायल की 112 पुलिस के पूछने पर टीम ने नहीं दिया जवाब
परिवार जनों ने शिकायत में उल्लेख किया है की घटना दिनांक को जब घर में जबरन सिलेंडर की छापेमारी की जा रही थी तो परिवार जनों ने 112 डायल कर सोहागपुर पुलिस को मौके पर बुलाया जिस पर पुलिस की टीम ने वहां मौजूद खुद को खाद्य सुरक्षा आपूर्ति विभाग के कर्मचारी बात कर छापेमारी कर रहे लोगों से उनके आईडी कार्ड एवं घर में घुसने की परमिशन मांगी गई कोई जवाब न देने पर सोहागपुर थाना प्रभारी को मौके पर पहुंचे साथ ही बाहर रखे गए सिलेंडरों के कार्ड परिवार जनों से देखने के लिए मांगे जिस पर उनके द्वारा बाहर रखे गए प्रत्येक सिलेंडरों का कार्ड दिखाया गया।
इसके बाद सिलेंडर को थाना प्रभारी ने परिवारजनों को मौके पर ही सौंप दिया।
प्रदीप पर पहले भी थाने में दर्ज हुई रिपोर्ट
वही इस छापेमारी को लेकर परिवार जनों ने दावा किया है की प्रदीप द्विवेदी नामक व्यक्ति एवं उसके अन्य चार साथियों ने 2 साल पूर्व भी इसी प्रकार की घटना की पुर्नवृत्ति हो चुकी है जिस पर प्रदीप द्विवेदी के नाम पर सोहागपुर थाने , समेत कलेक्टर एसपी और आईजी को शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है लेकिन कार्यवाही न होने पर परिवारजनों के द्वारा सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई है जो की निरंतर जारी है।
वही है पूरी कार्रवाई परिवार जनों के बयानों के आधार पर वह उनके द्वारा किए गए शिकायत के आधार पर पूर्ण रूप से संदिग्ध दिखाई दे रही है।
साथी कई सवालों को उसने जन्म दे दिया है जैसे की यदि खाद्य सुरक्षा आपूर्ति निगम के द्वारा कोई छापेमारी की कार्यवाही की गई है तो क्या उनके पास कोई लिखित में शिकायत पहले से मौजूद थे या फिर घर में घुसकर छापेमारी करने के लिए तहसीलदार या किसी अन्य सक्षम अधिकारी के ऑर्डर्स उनके पास मौजूद थे।
साथ ही मौके पर जब परिवार जनों के द्वारा छापेमारी कर रहे अधिकारियों से उनके आईडी कार्ड मांगे तो उनके द्वारा मौके पर आईडी कार्ड दिखाने से गुरेज क्यों किया गया।
प्रशासनिक लापरवाही या साजिश लिखित नहीं मौखिक चलते हैं क्या आदेश
वही इस पूरे मामले में जिस प्रकार सिलेंडर की छापेमारी को अन्य मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से समाज में उछाला गया उसमें सबसे बड़ा सवाल यह था कि यदि छापेमारी की कार्रवाई हुई तो फिर वहां मौजूद अधिकारियों के पास उनके आईडी कार्ड क्यों नहीं थे। और यदि थे तो उन्होंने दिखाया क्यों नहीं।
वहीं दूसरी और इस बात में भी गौर करना चाहिए कि यदि छापेमारी पूरी तरीके से खाद्य सुरक्षा आपूर्ति निगम या खाद्य अधिकारियों के संरक्षण में हुई है तो फिर क्या इनके पास संबंधित जनों के विरुद्ध कोई शिकायत मौजूद थी या फिर छापेमारी करने के पूर्व घर में घुसने के लिए तहसीलदार समेत किसी अन्य सक्षम अधिकारी के ऑर्डर्स थे या नहीं।
और यदि थे तो उन्होंने मौके पर छापामारी के दौरान दिखाया क्यों नहीं।
तो क्या यह मान लिया जाए की प्रशासनिक तंत्र अब लिखित नहीं मौखिक आदेश पर कार्य करता है।
परिवारजन कर रहे निष्पक्ष जांच पर कार्रवाई की मांग
वही सिलेंडर की इच्छा पर मेरी की कार्यवाही ने समस्त परिवार जनों की अस्मिता व उनके सम्मान पर काफी ठेस पहुंचाई है जिसको लेकर परिवार अब कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए प्रयासरत है।
साथ ही थाने में शिकायत देकर परिवारजन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं वह षड्यंत्र के पीछे जो भी लोग छुपे हुए हैं उनके ऊपर कार्यवाही की मांग की जा रही है।
लेकिन अभी भी सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या छापेमारी की कार्रवाई सचमुच असली थी या फिर द्वेष पूर्ण व षड्यंत्र से ग्रसित थी।
