शहडोल : खनिज मद के निर्माण कार्यों का भुगतान पांच महीने बाद भी लंबित ,आदिवासी अंचल की पंचायतों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव , उधार में सामग्री लेकर निर्माण कराने वाली एजेंसियां परेशान, व्यापारियों और मजदूरों की बकाया राशि चुकाना बना चुनौती
खनिज मद के निर्माण कार्यों का भुगतान पांच महीने बाद भी लंबित ,आदिवासी अंचल की पंचायतों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव ,
उधार में सामग्री लेकर निर्माण कराने वाली एजेंसियां परेशान, व्यापारियों और मजदूरों की बकाया राशि चुकाना बना चुनौती
शहडोल। जिले की विभिन्न जनपद पंचायतों के अंतर्गत खनिज प्रतिष्ठान मद से स्वीकृत निर्माण कार्यों का भुगतान महीनों बाद भी लंबित रहने से संबंधित ग्राम पंचायतों की निर्माण एजेंसियां आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से एजेंसियों पर उधार में सामग्री उपलब्ध कराने वाले व्यापारियों और मजदूरों की मजदूरी का बकाया बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अब जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में मार्च-अप्रैल के दौरान जिला पंचायत शहडोल द्वारा जिले की विभिन्न जनपद पंचायतों के अंतर्गत खनिज प्रतिष्ठान मद से अनेक निर्माण कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृतियां जारी की गई थीं। इन कार्यों के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों को स्वीकृत राशि का मात्र 30 प्रतिशत हिस्सा ही उपलब्ध कराया गया, जबकि शेष 70 प्रतिशत राशि अब तक जारी होना बाकी बताया जा रहा है।
उधार की सामग्री से समय सीमा में पूरे कराए निर्माण कार्य
प्रशासकीय स्वीकृति मिलने और प्रारंभिक राशि प्राप्त होने के बाद संबंधित निर्माण एजेंसियों ने स्थानीय व्यापारियों से उधार में निर्माण सामग्री लेकर कार्य प्रारंभ कर दिए। एजेंसियों का उद्देश्य निर्धारित समय में निर्माण कार्यों को पूरा करना और शेष राशि प्राप्त होते ही व्यापारियों का बकाया भुगतान करने के साथ मजदूरों की मजदूरी चुकाना था।
बताया जाता है कि कई निर्माण कार्य जून-जुलाई 2026 तक पूरे कर लिए गए। निर्माण कार्यों के पूर्ण होने के बाद संबंधित तकनीकी अधिकारियों से पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त कर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अंतिम भुगतान के लिए फाइलें जून-जुलाई में ही जिला पंचायत शहडोल में जमा करा दी गई थीं। एजेंसियों को उम्मीद थी कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद शीघ्र भुगतान मिल जाएगा, लेकिन लगभग चार से पांच महीने बीतने के बाद भी भुगतान नहीं होने से उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं।
व्यापारियों का उधार और मजदूरों की मजदूरी बकाया
निर्माण एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी समस्या उन व्यापारियों के बकाया भुगतान की है, जिन्होंने भरोसे पर सीमेंट, सरिया, रेत, गिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री उधार में उपलब्ध कराई थी। इसके साथ ही निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों की मेहनताना राशि का भुगतान भी लंबित बताया जा रहा है।
एक ओर निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, वहीं दूसरी ओर एजेंसियों के पास व्यापारियों और मजदूरों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त राशि नहीं है। इससे संबंधित सरपंच-सचिवों पर लगातार भुगतान का दबाव बढ़ रहा है। यदि भुगतान में और देरी होती है तो एजेंसियों को आर्थिक नुकसान के साथ सामाजिक और व्यावसायिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
जिला पंचायत में लंबित फाइलों पर उठ रहे सवाल
निर्माण एजेंसियों का कहना है कि जब निर्माण कार्य पूर्ण कराए जा चुके हैं, तकनीकी अधिकारियों द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं और अंतिम भुगतान से संबंधित दस्तावेज भी कई महीने पहले जमा किए जा चुके हैं, तो फिर भुगतान की प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं हुई? यदि दस्तावेजों में कोई कमी है तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी देकर निराकरण का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है?
एजेंसियों के अनुसार, भुगतान की प्रतीक्षा में फाइलें जिला पंचायत कार्यालय में लंबित हैं, जबकि व्यापारियों और मजदूरों को भुगतान करने की जिम्मेदारी लगातार उन पर बनी हुई है। हालांकि, भुगतान में देरी के वास्तविक कारणों और फाइलों की वर्तमान स्थिति को लेकर जिला पंचायत के संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना शेष है।
आदिवासी अंचल की पंचायतों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
शहडोल जिले के अनेक क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के जनप्रतिनिधि ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में भुगतान लंबित रहने के कारण संबंधित सरपंच-सचिवों पर भी व्यापारियों और मजदूरों का दबाव बढ़ रहा है। निर्माण कार्यों को पूरा कराने के बावजूद राशि नहीं मिलने से उनके सामने जवाबदेही और आर्थिक प्रबंधन की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से हस्तक्षेप की मांग
इस पूरे मामले में जिला कलेक्टर शहडोल और मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत शहडोल से अपेक्षा है कि वे खनिज प्रतिष्ठान मद से स्वीकृत निर्माण कार्यों की लंबित भुगतान फाइलों की समीक्षा कराएं। साथ ही, संबंधित ग्राम पंचायतों को शेष 70 प्रतिशत राशि जारी करने तथा नियमानुसार अंतिम भुगतान की प्रक्रिया में आ रही बाधाओं का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करें।
मुख्य सवाल यह है कि जब निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं और उनके पूर्णता संबंधी दस्तावेज भी महीनों पहले जमा किए जा चुके हैं, तो संबंधित एजेंसियों को भुगतान के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा? प्रशासन को इस मामले में गंभीरता से संज्ञान लेकर निर्माण एजेंसियों, व्यापारियों और मजदूरों को राहत दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि सरकारी निर्माण कार्य कराने वाली एजेंसियों को अनावश्यक आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
