शहडोल : आरपीएफ विभाग की मनमानी से तंग आकर ऑटो चालकों ने की हड़ताल , बिना बात के करते हैं चालानी कार्यवाही
आरपीएफ विभाग की मनमानी से तंग आकर ऑटो चालकों ने की हड़ताल
बिना बात के करते हैं चालानी कार्यवाही
शहडोल (संजय गर्ग) । इन दिनों तानाशाही के रवैया पूरे देश में देखा जा रहा है जहां एक तरफ सत्ता में काबिज सरकार तानाशाही रवैया अपनाए हुए हैं वहीं दूसरी ओर आरपीएफ विभाग भी अपने तानाशाह एक रवैया से बाज नहीं आ रहा है। अपनी वर्दी का रौब दिखाते हुए आरपीएफ विभाग के जिम्मेदारों द्वारा गरीब ऑटो चालकों के पेट पर लात मारी जा रही है।
दरअसल मामला दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे शहडोल जिले का है जहां पर गरीब ऑटो चालकों का बेवजह ही चालान कर दिया जाता है।
वर्दी का रौब दिखाते हुए आरपीएफ विभाग में बैठे जिम्मेदारों द्वारा गरीब मजबूर ऑटो चालकों के पेट पर लात मारी जा रही है।
जिससे तंग आकर ऑटो चालकों ने आज से मजबूरी वश हड़ताल चालू कर दी है।
दरअसल 25 मार्च को समस्त ऑटो ने शहडोल रेलवे के सहायक मंडल अभियंता को शिकायत करते हुए बताया है कि आए दिन किस प्रकार आरपीएफ विभाग द्वारा अपनी वर्दी का रौब दिखाते हुए बेवजह ही उनके ऊपर चालानी कार्यवाही की जाती है।
ऑटो चालकों ने बताया कि यदि कोई ऑटो चालक ऑटो पार्किंग के सामने मेन रोड में सवारी उतारता पाया जाता है तो जबरन ही आरपीएफ . विभाग के जिम्मेदारों द्वारा उसे पकड़ कर चालान कर दीया जाता है। और 15 – 15 दिनों तक ऑटो को जप्त कर जबलपुर भेज दिया जाता है जो की पूर्णता नियम विरुद्ध है।
ऑटो चालकों द्वारा बताया गया कि प्रतिदिन उनसे पार्किंग का ₹10 चार्ज किया जाता है और यदि दो या तीन नंबर प्लेटफार्म में सवारी छोड़ने जाना होता है तो ऑटो चालकों को जबरन ही पकड़ कर उन पर चालान ठोक दिया जाता है जबकि अन्य चार चक्का वाहन भी आसानी से दो या तीन नगर प्लेटफार्म तक जाती है और उन पर कोई चलाने कार्यवाही नहीं होती है।
ऐसा ही कुछ हाल टिकट काउंटर के पास भी होता है यदि कोई ऑटो चालक टिकट काउंटर में किसी सवारी की मदद करने जाता है तो भी उस पर कार्यवाही की जाती है।
ऑटो चालकों का कहना है कि ₹10 चार्ज लेने के बावजूद भी आज दिनांक तक पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।
ऑटो चालकों ने मांग की है कि दो या तीन नंबर प्लेटफार्म के सामने ऑटो स्टैंड की सुविधा प्रदान की जाए।
इस पूरे प्रकरण को देखते हुए ऐसा लगता है कि शायद आरपीएफ विभाग वाह रेलवे विभाग के जिम्मेदारों को केवल चालान के नाम पर हरि नोट ही दिखाई देती है उन्हें या नहीं दिख रहा कि किस प्रकार ऑटो चालकों के द्वारा दिन रात मेहनत करके वह धंधे से अपने व अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।
पर शायद आरपीएफ विभाग के जिम्मेदारों पर रेलवे विभाग के जिम्मेदारों को यह गवारा नहीं है शायद इसीलिए इस प्रकार की ज्यातिय यह लोग गरीब ऑटो चालकों के साथ करते हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या इस प्रकार की जयातियां जो गरीब ऑटो चालकों के साथ हो रही हैं क्या वह जायज है।
आरपीएफ विभाग का यह कोई पहला मामला नहीं है इसके पूर्व भी आरपीएफ विभाग के द्वारा स्टेशन के बाहर चाय पान या नाश्ते का ठेला लगाने वाले लोगों से भी इस प्रकार के कृत्य यह करते हैं।
ऐसा हम नहीं ऐसा सूत्र बताते हैं।
बरहाल देखना यह होगा कि क्या स्थानीय प्रशासन वह रेलवे विभाग के द्वारा इस पर क्या कार्यवाही की जाती है।
क्योंकि मुद्दा चालानी कार्यवाही का नहीं बल्कि गरीब ऑटो चालकों के परिवार के भरण-पोषण का है।
