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शहडोल / ब्यौहारी : प्रशासन के स्थगन आदेश को दिखाता ठेंगा , पट्टे आरजी की भूमि पर शासकीय कर्मचारियों का अवैध कब्जा ,

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प्रशासन के स्थगन आदेश को दिखाता ठेंगा ,

पट्टे आरजी की भूमि पर शासकीय कर्मचारियों का अवैध कब्जा ,

ब्यौहारी/ शहडोल (संजय गर्ग) । भूमियों पर अवैध कब्जा का मामला दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
आए दिन जमीनी विवाद के मामले सुर्खियों में बने रहते हैं।
जिस प्रकार भू माफिया अलग-अलग जगह पर भूमियों को चिन्हित कर उसे पर प्लाटिंग कर उसे बेचते हैं ठीक उसी तर्ज पर एक मामला ब्यौहारी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम साखी में जहां आखेटपुर तहसील में शासकीय शिक्षक पर निजी पट्टे की भूमि पर अवैध कब्जा का मामला सामने आया है।
ऐसा है पूरा मामला
दरअसल ग्राम सखी निवासी राजकिशोर साकेत , रामसरोवर साकेत पिता बाबूलाल साकेत ने शिकायत पत्र में उल्लेख कर बताया है कि उनके निजी पट्टे की भूमि जो आखेटपुर तहसील में स्थित है जिसका खसरा नंबर 942/ 2 रखवा 0. 125 ह0 के अंश भाग 31 डिसमिल भूमि पर अनावेदक राजमणि साकेत और उसका साथी सूर्यवली साकेत जो
की दोनों निवासी ग्राम सखी तहसील ब्यौहारी के रहने वाले हैं।
राजमणि साकेत जो कि खुद शासकीय शिक्षक है। एवं उसका साथी भी तेंदूपत्ता संग्रहण समिति का प्रबंधक है।
शिकायतकर्ता के बताएं अनुरूप दोनों ही शासकीय कर्मचारी हैं। जो कि दोनों ने मिलकर शिकायतकर्ता की निजी आरजी पट्टे की भूमि पर अवैध कब्जा कर रखे हैं।

 

तहसीलदार के स्थगन आदेश को बताते धात

शिकायतकर्ता ने बताया कि राजमणि साकेत शासकीय शिक्षक व सूर्यवली साकेत प्रबंधक तेंदूपत्ता समिति दोनों के द्वारा भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जिस पर शिकायतकर्ता के द्वारा 7 फरवरी 2025 को स्थगन आदेश भी उक्त भूमि पर ले रखा है जिसकी तामिली ने तहसील कार्यालय से ब्यौहारी पुलिस को भी दी गई है लेकिन उक्त भूमि पर स्थगन होने के बावजूद भी दोनों ही शासकीय कर्मचारियों के द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
स्थगन आदेश को अनदेखा कर दोनों ही शासकीय कर्मचारी उल्लिखित भूमि पर निर्माण कर रहे हैं शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह दोनों कर्मचारी अपने धन – बल के दम पर ब्यौहारी पुलिस अपने साथ मिला लिए हैं जिसकी वजह से उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
पर सवाल यह उठता है कि प्रशासन की रोक के बाद भी यदि कोई व्यक्ति निर्माण कर रहा है तो कहीं ना कहीं दाल में तो कुछ काला है।
और धनबल का आरोप कई हद तक सही है।
और क्या शासकीय कर्मचारी प्रशासनिक आदेश की धज्जियां इस प्रकार उड़ा सकते हैं यह भी पहलू विचारणीय है इस पूरे मामले में ।

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