शहडोल : खाओ – पचाओ योजना पर चल रहा काम 5 दिन में कागजों में ही खप गए लाखों , प्रशासन का है वरदान भ्रष्टाचारियों को मिला अभयदान
खाओ – पचाओ योजना पर चल रहा काम 5 दिन में कागजों में ही खप गए लाखों , प्रशासन का है वरदान भ्रष्टाचारियों को मिला अभयदान
शहडोल (संजय गर्ग)। लगातार के अखबारों में जिला शिक्षा विभाग का घोटाले का मामला लगातार चलता रहा । हाल यह हुआ की है एआई जेनरेटेड निकला। प्रशासन की नजर में लेकिन हाल ही में 5 दिनों में लाखों रुपए कागजों में खपा दिए गए। तो अब सवाल यह है कि क्या 5 दिनों में लाखों के बिल जो कार्यालय में लगे कहीं वह भी तो एआई जेनरेटेड नहीं हमारी नजर में तो ऐसा नहीं है लेकिन प्रशासन की नजर इन दिनों गांधी नामक ऐनक से देखे तो सब तरफ एआई है ।
ऐसा है मामला
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जी हाँ वही कार्यालय जहां धन भक्षियों का अभ्यारण दिन रात 24 घंटे चलता है। , यह कोई मज़ाक नहीं बल्कि हकीकत है। फर्जी बिलों के दम पर 12 लाख 21 हज़ार 575 रुपये की सरकारी राशि साफ़ कर दी गई। दस्तावेज़ बताते हैं कि 20 फरवरी 2025 को ही तीन अलग-अलग स्कूलों के लिए बिल तैयार हुए और 25 फरवरी तक भुगतान का आदेश भी हो गया जबकि भुगतान तकनीकी अनुमोदन एवं फोटोग्राफ प्रमाण के बाद होना चाहिए। यानी विष्णु के वाहन गरुड़ से भी तेज़ रफ़्तार से “काम पूरा” हो गया।
ठेकेदार और अफसरों का चमत्कार
हाईस्कूल महदेवा, हाईस्कूल नौढिया और मॉडल स्कूल खड़ुहुली – तीनों जगहों पर बिल पास हो गए, वो भी लाखों के।
गिट्टी, रेत, सीमेंट, सरिया, खिड़की, दरवाज़े और इमल्शन… सब खरीद भी ली गई और सब लग भी गई!
कई जगह मात्रा और दर बाजार भाव से कहीं ज्यादा चढ़ाई गई।
लेकिन जब गांव वालों से पूछा गया तो जवाब मिला – “अरे! यहां तो एक फावड़ा भी नहीं चला ।
चौंकाने वाली बात भुगतान के आदेश पर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मारपाची ने खुद हस्ताक्षर किए
खतरे में बच्चों का भविष्य और जान पर आफत
हकीकत ये है कि करोड़ों की सरकारी राशि का खेल कागज़ी घोड़ों पर दौड़ा। बिल बने, मुहर लगी, पेमेंट हो गया… और बच्चे आज भी उसी जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर हैं। इससे कहीं ना कहीं नौनीहालों का जीवन खतरे में हैं। जो कि कहीं ना कहीं राजस्थान में जिस प्रकार प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने से कितने मासूम की जान चली गई ठिक इसी प्रकार के सकेत इन भ्रष्टाचारियों के कुकृत्यों से घटना कि पुनरावृति होने की संभावना प्रबल दिखाई पड़ रही है।
निर्माण सामग्री पहुँची और न ही कोई कार्यस्थल पर बदलाव हुआ।
जनता के पैसों कि रूप
यह पूरा मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि शिक्षा विभाग के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मारपाची और ठेकेदारों सुधाकर कंस्ट्रक्शन ने मिलकर सरकारी खजाने को लूटा। जिन पैसों से बच्चों के लिए स्कूलों की मरम्मत और सुविधाएं सुधरनी चाहिए थीं, उन्हें फर्जी बिलों के जरिए हड़प लिया गया।
जनता का सवाल
आख़िर 5 दिन में ऐसा कौन सा ‘विष्णु अवतार’ उतरा था जिसने स्कूलों की मरम्मत को जादुई तरीके से पूरा कर दिया?
*क्या विभाग के अफसर और ठेकेदार वास्तव में विश्वकर्मा के वंशज हैं, जो उंगलियां चटकाते ही महल खड़ा कर देते हैं?
अब सवाल यह है कि –
• क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?
• या फिर यह फाइलें में दबा दी जाएंगी?
• क्या लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू इसकी निष्पक्ष जांच करेंगे?
शहडोल शिक्षा विभाग का यह घोटाला एक बड़ा उदाहरण है कि किस तरह विकास और शिक्षा के नाम पर जनता के टैक्स का पैसा अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबों में जा रहा है।
क्या हैं शर्तेः–
आवंटित राशि का व्यय प्रथम किस्त के रूप में 50 प्रतिशत किया जाए, कार्य के मूल्यांकन पश्चात 40 प्रतिशत राशि व्यय करने की स्वीकृति कार्यालय (जिला शिक्षा अधिकारी) से जारी अनुमति पश्चात् किया जाता हैं। अंतिम 10 प्रतिशत की राशि का व्यय उपयंत्री के मूल्यांकन एवं कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्र जारी होने के पश्चात् कार्यालय (जिला शिक्षा अधिकारी) से जारी स्वीकृति अनुसार किया जाता है। कार्य का मूल्यांकन संबंधित उपयंत्री के द्वारा किया जाएगा। माप पुस्तिका का प्रमाणीकरण जिला शिक्षा केन्द्र, शहडोल के प्रभारी सहायक यंत्री के द्वारा कराये जाने के पश्चात् शेष किस्तों के व्यय की अनुमति जारी की जावेगी।


