S.K. Paswan
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शहडोल : सर्व समाज समन्वय समिति ने यूजीसी के विरोध में राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन , “भारत सरकार होश में आओ यूजीसी काला कानून वापस ले जाओ” के नारे सर्व समाज के लोगों ने लगाएं

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 सर्व समाज समन्वय समिति ने यूजीसी के विरोध में राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन ,

“भारत सरकार होश में आओ यूजीसी काला कानून वापस ले जाओ” के नारे सर्व समाज के लोगों ने लगाएं

शहडोल। जिले में लगातार सर्व समाज समन्वय समिति के द्वारा यूजीसी के विरोध में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जारहा है सर्व समाज के लोगो ने अपने ज्ञापन में बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जनवरी 2026 में जारी की गई यूजीसी- 2026 जिसे दिनांक 15 जनवरी 2026 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित कर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। अत्यन्त गंभीर संवैधानिक एवं विधिक
प्रश्न उत्पन्न करती हैं।यह अधिसूचना उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से लाई गई बताई जा रही है। तथा इसमें एससी एसटी एवं ओबीसी, व दिव्यांग छात्रो के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है। इसके अन्तर्गत सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में 90 दिनों के भीतर ईक्युटी कमेटियों के गठन का प्रवधान किया गया है, जिन्हें शिकयातों की जांच का अधिकार दिया गया है। सर्व समाज समन्वय समिति, शहडोल का यह स्पष्ट एवं दृढ़ मत है कि उक्त अधिसूचना भारत के संविधान में प्रदत्त समानता के मूल अधिकार अनुच्छेद 14, 15, एवं 21 की भावना के अनुरुप नही है। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, किन्तु यह अधिसूचना समानता की समग्र अवधारणा का स्थापित करने के स्थान पर केवल एससी एसटी एवं ओबीसी वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर केद्रित है। जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों एवं संवैधानिक संरक्षण को पूर्णतः नजर आंदज करती है।यह अधिसूचना एकतरफा दृष्टिकोण अपनाते हुऐ समान अवसर के सिंध्दात को कमजोर करती हैं, जो कि संविधान की मूल संरचना के प्रतिकूल है। किसी भी कानून या नियम का उद्देश्य सभी वर्गो के लिए न्याय सुनिश्चित करना होना चाहियें न कि किसी एक वर्ग के पक्ष में असंतुलन उत्पन्न करना।यह भी उल्लेखनीय है कि प्रारंभिक ड्रॉप्स में ओबीसी वर्ग को शामिल न किए जाने,तथा झूठी या फर्जी शिकयतों पर किसी प्रकार के दंडात्मक प्रावधान के अभाव को लेकर व्यापक विवाद उत्पन्न हुआ था । यद्यपि अंतिम संस्करण में ओबीसी वर्ग को सम्मिलित कर लिया गया, तथापि दुर्भावनापूर्ण अथवा झूठी शिकायतों पर दंड का कोई प्रावधान न होना, इस अधिसूचना को और अधिक खतरनाक बनाता है तथा इसके दुरुपयोग की व्यापक संभावना उत्पन्न करता है। उत्तर प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों में यह अधिसूचना विश्वविद्यालयों पर लागू की जा चुकी है, जिसके परिणाम स्वरूप शैक्षणिक परिसरों में भय, असंतोष एवं असमानता का वातावरण उत्पन्न हो रहा है।यह तथ्य भी विचारणीय है कि भारत की अनुमानित जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है,जिसमें से लगभग एक-तिहाई जनसंख्या सामान्य वर्ग की है, अर्थात लगभग 40 से 50 करोड़ नागरिक।इस प्रकार की अधिसूचनाएँ सामान्य वर्ग के करोड़ों छात्रों एवं नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करती हैं।इसके अतिरिक्त, देश के विकास, प्रशासन, शिक्षा, उद्योग एवं राजस्व सृजन में सामान्य वर्ग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अग्रणी रहा है। इसके बावजूद, इस प्रकार की अधिसूचनाओं के माध्यम से सामान्य वर्ग के अधिकारों एवं संवैधानिक संरक्षण का निरंतर हनन किया जाना, समाज में व्यापक असंतोष एवं नाराजगी को जन्म दे रहा है।हम सभी सर्व समाज समन्वय समिति के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति से यह स्पष्ट एवं सशक्त मांग करते है कि उक्त यूजीसी अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस (Rollback) लिया जाए तथा सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए एक निष्पक्ष, संतुलित एवं संविधान सम्मत नीति का निर्माण किया जाए।और हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि जब तक इस अधिसूचना को वापस नहीं लिया जाता, सर्व समाज समन्वय समिति लोकतांत्रिक, संवैधानिक एवं विधिक तरीकों से इसका विरोध करती रहेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर अपने संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत विधिक उपाय अपनाने के लिए भी बाध्य होगी।

विरोध प्रदर्शन में सामान्य वर्ग सामाजिक संगठन, में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा,अखंड ब्राह्मण सेवा समिति भारतवर्ष, विराट क्षत्रिय महासभा, रॉयल राजपूत संगठन, श्री राजपूत करणी सेना, उपसरपंच संगठन महासमिति ,सर्व वैश्य समाज ,पेंशनर एसोसिएशन म.प्र.,अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, जिला कायस्थ समाज, सभी संगठनों एवं उपस्थित नागरिकों ने सर्व समाज से कहा कि हमारा उद्देश्य समाज में समरसता, समानता एवं न्याय की स्थापना है, न कि किसी वर्ग के विरुद्ध नफरत फैलाना संविधान भी इसकी इजाजत नहीं देता है।कार्यक्रम में मुख्य रूप से अखिलेश कुमार शर्मा रमाकांत सिंह परमार अमरेंद्र तिवारी ओंकार सिंह सिंगर नरेंद्र प्रताप सिंह खत्री अनमोल सिंह सिसोदिया महेश सिंह कछवाह अर्जुन सिंह सिंगर ओम प्रकाश सिंह गहरवार विवेक सिंह तोमर अविनाश सिंह तोमर विजय सिंह जोधावत पुष्पराज सिंह परमार संजीव सिंह कछवाह अजय सिंह परिहार पुष्कर सिंह चंदेल रमाकांत सिंह तोमर कपिल सिंह कछवाह मनु प्रताप श्रीवास्तव शेखर सिंह परमार आर्दश सिंह परमार कृष्ण सिंह कछवाह शुभम सिंह कछवाह योगेंद्र सिंह तोमर राकेश सिंह जोधावत राकेश सिंह डोंगरे मनोज त्रिपाठी राजेंद्र सिंह सोलंकी रणजीत सिंह सोलंकी पुष्पेंद्र सिंह सोलंकी रामनिवास गुप्ता अमरीश श्रीवास्तव हेमंत तिवारी सुनील मिश्रा कपिल गुप्ता सैकड़ो लोग रहे उपस्थित।

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