बुढार।
मामला जिला मुख्यालय के अंतर्गत
बुढार। थाना क्षेत्र के ग्राम
रामपुर बटूरा खुली खदान का है। जहा पर
किसानों को नजर अंदाज कर रही एस ई सी एल कंपनी की तानाशाही चरम पर है।
बता दें कि कंपनी के द्वारा
1500रोजगार में से कुल 78रोजगार दिए गए हैं।
इतना ही नहीं बल्कि एक वर्ष में मुववजा अधर में लटका वहीं पुनर्वास पुनर्स्थापना किए बिना मकान खाली कराया जा रहा है ।
किसान जो अन्नदा है।
जो सब कुछ दे कर दर दर भटकने को मजबूर है ।
सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश शर्मा ने बताया कि रामपुर भटूरा खुली खदान में किसानों को बेघर करने हेतु किया जा रहा मजबूर 2009/10 में हुआ था रामपुर बेलिया दोनों ग्रामों का अधिग्रहण तब से लेकर आज तक रामपुर, बेलिया, में किसी प्रकार से कोई भी काम या विकाश चाहे निर्माण हो या हितग्राही मूलक योजनाओं को कभी भी लागू नहीं किया गया है । रामपुर ग्रामपंचायत में जहा करोड़ों रुपए जमा हो वहा चलने को सड़क नही, पानी नही और तो और रहने को घर नही है ।
ठप्प पड़ी हितग्राही मूलक योजनाएं
जो की हालत या है की किसान अपने से निर्माण नही कर सकता रोक लगी हुई है ।
और सरकारी हितग्राही मूलक योजना बंद कर दिया गया है ।
रामपुर एसईसीएल खदान के कारण अब जनता कहा जाए एक तरह कुआ तो दूसरी तरफ खाई है।
जहा एक तरफ प्रधान मंत्री कहते हैं। की हमारे आदिवासी भाई बहनों को किसी भी प्रकार से परेशान नही किया जाएगा ।
प्रदेश सरकार द्वारा पेशा कानून व्यवस्था भी बनाया गया जिसमे समस्त अधिकार ग्रामपंचायत को है किंतु यह कुछ भी नहीं कर सकते है।
किसानों ने प्रशासन को दी चेतावनी
अब किसान भाइयों ने निश्चित कर लिया है । की 26 जनवरी को ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किया जाएगा की जब तक रामपुर बेलिया दोनों ग्रामों की समस्या का समाधान नहीं होगा तब तक के लिए किसानों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है।
कि आने वाले समय में भूख हड़ताल, जन आंदोलन, खदान बंद करेंगे, और नहीं माने तो आमरण अनशन शुरू किया जाएगा ।
पूरी तरह से अहिंसात्मक आंदोलन करेंगे अपने अधिकार की लड़ाई लड़ेगे ।
रोजगार फाइलों में नहीं सुनवाई
जोकि आंदोलन में सबसे पहला और मुख्य विषय यह है कि
अभी तक जमा रोजगार फाइल में आज दिनांक तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके चलते किसानों को भूखे मरने की नौबत आ गई है।
ऐसे में प्रशासन से किसान मांग करते हैं कि रोजगार फाइलों में सुनवाई करते हुए
तुरंत रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
पुनर्वास की राशि किसानों को कराएं उपलब्ध
प्राथमिकता के आधार पर, पुनर्वास की राशि किसानों के खाते में डाला जाए, पुनर्वास के साथ पुनरस्थापना किया जाए।
किसानों के जमीन पर पेड़ पौधे काट दिए गए हैं।
मुवाबजा भुगतान नहीं किया गया है , किसानों को सुबह से शाम तक केवल जमीनों के विसंगति को दूर करने और सेजरा को प्रमाणित करने हेतु तहसील सोहागपुर, बुढार, चक्कर लगाने को मजबूर किया जाता हैं।
इस्थानीय मजदूरों को उनके योग्य काम दिया जाए, डी आर सी सी में लिए गए निर्णय को लागू किया जाए।
रोजगार प्रक्रिया को बनाए सुगम
एस ई सी एल में रोजगार प्रक्रिया को सरल बनाया जाए लम्बे समय तक फाइल बिलासपुर मुख्यालय में एलन डा रऔर मेन पवार में रहता है उसे जल्द वापस कर रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
सभी विषयों का निदान समय सीमा में नहीं होता है तो
किसानो के द्वारा जन आंदोलन किया जाएगा ।
उक्तसाय की जानकारी वरिष्ठ किसान नेतागण भूपेश शर्मा, राजकमल मिश्रा, जनपद सदस्य चंद्र कुमार तिवारी,जुगल किशोर शर्मा आदित्य त्रिपाठी, आनंद त्रिपाठी, सरपंच परेमिया बैगा, झोले बैगा पूर्व सरपंच, उपसरपंच रजनीश मिश्रा, ओमप्रकाश दुवेडी, भगवान दास बैगा, पूर्व जनपद सदस्य नेमसाय राठौर,राजु सोनी, अशोक , राजाराम साहू बेजकिसोर साहू, रमेश साहू, प्रीतम लाल, कपिल दुवेडी, अनुज शर्मा, अनंत तिरपाठी, विजय विश्वकर्मा संजय,सजन बैगा, भूलू शितवस्तव, ब्रेजेश गुप्ता गुप्ता, मनोज त्रिपाठी, बाल्मिक वेदांती, प्रदीप शर्मा आनंद राम दाऊ रजक, रोहित, नत्थू नापित, देवेंद्र, हनुमान सरण, सज्जन महराज, रामधार चौरसिया सत्यनारायण शर्मा नागेश शर्मा इंटक नेता, रमाकांत मिश्रा, प्रमोद भाई, सहित अन्य ग्रामीण जन ने दी।
