शहडोल : सत्ता के संरक्षण में पूर्व जनपद सदस्य का शिक्षक पति आदिवासी की जमीन पर कब्जाकर गरीब का कर रहा शोषण , भाजपा के सरक्षण पर प्रशासनिक अधिकारी लगातार कर रहे न्यायलय के आदेश की अवहेलना
सत्ता के संरक्षण में पूर्व जनपद सदस्य का शिक्षक पति आदिवासी की जमीन पर कब्जाकर गरीब का कर रहा शोषण
भाजपा के सरक्षण पर प्रशासनिक अधिकारी लगातार कर रहे न्यायलय के आदेश की अवहेलना
जयसिंहनगर (निशांत संजय गर्ग)। मध्यप्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान एक तरफ जहा प्रदेश के आदिवासियों को अधिकार देते हुए जल जगल जमीन से जुड़ा पेशा एक्ट का कानून प्रदेश में लेकर आये है वही दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के भाजपा के नेताओ के द्वारा अपनी कार्यशैली एवं सत्ता के घमंड में चूर होकर लगातार गरीब आदिवासियों के शोषण के नए नए उदाहरण पेश कर रहे है l मध्यप्रदेश में अभी हाल में गरमाया सीधी पेशाब कांड ना सिर्फ प्रदेश में साथ ही देश भर में भाजपा की साख पर बट्टा लगा रहा है जिसकी वजह से आदिवासियों के हित को देखकर लागु हुआ पेशा एक्ट जैसे कानून अब गरीब आदिवासियों के लिए सिर्फ झुनझुना बनकर रह गए है l 2019 से गरीब आदिवासी की जमीन को दबंग के द्वारा हड़पने का नया मामला शहडोल जिले के जनपद जयसिंहनगर के गांव अमझोर से सामने आ रहा है जिसपर मिली जानकारी अनुसार 2019 में अमझोर निवासी लल्ला सिंह ने तहसील न्यायालय जयसिंहनगर में ध मध्यप्रदेश भू राज्य सहिता 1959 की धारा 250 के दावे के तहत बेदखली दायर करते हुए आरोप लगाया था की अमझोर निवासी गांव के दबंग शिक्षक दिवाकर तिवारी पिता राम लखन तिवारी द्वारा आवेदक लल्ला सिंह की पैतृक पट्टे की जमीन को शासकीय भूमि कहकर शिक्षक दिवाकर तिवारी के द्वारा जमीन पर अतिक्रमण कर भवन निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया था l आवेदक द्वारा दर्ज बेदखली मामले पर सुनवाई के दौरान कई बार न्यायलय तहसीलदार के द्वारा अतिक्रमण जमीन पर निर्माण रोकते हुए मकान को सील करने के आदेश दिए गए जिसको दरकिनार कर दिवाकर तिवारी के द्वारा भवन का निर्माण कार्य पूर्ण कराया गया जिसपर न्यायालय तहसीलदार द्वारा भवन को गिराने का आदेश भी पारित किया गया था जिस पर फिर प्रशासनिक अधिकारियो ने कोई कार्यवाही करना उचित नहीं समझा मामले पर न्यायालय तहसीलदार के द्वारा धारा 248 मध्यप्रदेश भू राज्य सहिता के तहत शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के तहत 10000 का जुरमाना तय शिक्षा विभाग के अधिकारियो को संबधित दिवाकर तिवारी के विरुद्ध कार्यवाही का निर्देश दिया था l किन्तु किसी भी अधिकारी के द्वारा अब तक मामले में न्यायालय के आदेश का किसी भी प्रकार से पालन करना आवश्यक नहीं समझा l गौरतलब है की 2019 में दर्ज मामले के बाद आवेदक लल्ला सिंह की मृत्यु हो जाने के बाद लल्ला सिंह का पुत्र ओमकार सिंह आज 4 वर्षो से न्याय के लिए न्यायलय के चक्कर लगाने पर मजबूर है उक्त मामले के लिए लल्ला सिंह के पुत्र ओमकार सिंह ने मध्यप्रदेश के मुखिया सहित देश के प्रधानमंत्री तक न्याय की गुहार लगाते हुए पत्र लिखा है l
सत्ता के सरक्षण में आदिवासी का हो रहा शोषण
सूत्रों की माने तो अतिक्रमणकारी शिक्षक की पत्नी पूर्व में जनपद सदस्य रही है और वर्तमान में सत्ता दल की महिला मोर्चा की जिला पदाधिकारी है जो अपने राजनितिक रुतबे का दबाव लगातार प्रशासनिक अधिकारियो पर बनाकर न्यायालय की कार्यवाही से बचती आ रही है l अब देखना यह होगा की आखिर कब तक सत्ता के सरक्षण की वजह से गरीब आदिवासी न्याय के लिए दर दर भटकता रहेगा l
इनका कहना
मैंने अपनी आराजी खसरा नंबर में निर्माण कराया है संबंधित व्यक्ति द्वारा मुझे परेशान करने के लिए बार-बर पेपर बाजी करवाई जाती मेरे पास समस्त दस्तावेज हैं एवं मेरे कोट का आदेश भी है।
दिवाकर तिवारी शिक्षक अमझोर जयसिंहनगर
