शहडोल: शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल बुढ़वा का परिणाम खड़ा कर रहा डीईओ की योग्यता पर सवाल , 131 छात्र में से मात्र 22 छात्र ही हैं उत्तीर्ण
शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल बुढ़वा का परिणाम खड़ा कर रहा डीईओ की योग्यता पर सवाल ,
131 छात्र में से मात्र 22 छात्र ही हैं उत्तीर्ण
शहडोल (संजय गर्ग)। समय-समय पर अपनी विषमताओं का प्रमाण देने वाले कुर्सी के मोह में संलिप्त प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मारपची एक बार फिर चर्चा का बाजार गर्म करते हुए जिले में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
दरअसल हाल ही में आए 10वीं 12वीं के रिजल्ट ने फूल सिंह मारपची की योग्यता पर कई सवाल खड़े करता है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालक बुढ़वा का कक्षा दसवीं का रिजल्ट निम्न स्तरीय रहा है मात्र 17 प्रतिशत परिणाम के साथ 131 छात्र में से 22 ही उत्तीर्ण हुए।
फूल सिंह मारपाची जो की बुढ़वा में प्राचार्य के पद के साथ-साथ जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं।
वह इस परिणाम के बाद चर्चा का विषय बने हुए हैं चर्चा होना स्वाभाविक है जब मूल पद छोड़कर कुर्सी से चिपके डी .ई. ओ. अपने मूल कर्तव्यों का निर्वहन उचित तरीके से नहीं कर पा रहे हैं यह इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
दरअसल इसका पूर्ण दोष मारपाची को नहीं दिया जा सकता इस परिणाम के लिए डीईओ के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र भी कहीं जिम्मेदार नजर आता है। वह ऐसे की जिला शिक्षा अधिकारी के दायित्व का निर्वहन एक ऐसे व्यक्ति के हाथ में है जो की प्रशासनिक मोह माया के जाल में फंसा हुआ है।
ऐसे में वह जब अपने ही विद्यालय के परिणाम में सुधार नहीं ला पा रहा है तो जिले के अन्य विद्यालयों का क्या ही हाल होगा यह आप और हम अच्छे से समझ सकते हैं।
यह बात तथ्य है कि डीईओ का पद संभालने के बाद फूल सिंह मारपाची शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बुढ़वा के विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करते आ रहे हैं।
खुद के दामन में लगे हैं दाग दूसरों पर कैसे खड़ा करें सवाल??
हाल ही में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में जिले के कलेक्टर तरुण भटनागर ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी किए थे की सभी विद्यालयों के प्राचार्य की बैठक आयोजित कर योजना बनाकर परिणाम में सुधार लाने का प्रयास किया जाए।
किंतु सवाल है खड़े होते हैं कि दूसरों को उपदेश देने वाले जब खुद उसे कार्य में विफल हो।
तब वह दूसरों को उपदेश कैसे दे सकते हैं।
जिले के अन्य विद्यालयों का रिजल्ट सुधरेंगे और प्राचार्य शिक्षकों पर कैसे कार्यवाही का प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे यह अपने आप में बड़ा सवाल है???
जमी- जमाई व्यवस्था पर क्या पड़ेगी गाज
ऐसे में शिक्षा विभाग के तंत्र पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है।
की या तो फूल सिंह मारपाची को उनके मूल पद पर वापस भेजा जाए जहां पर वह विद्यार्थियों के तरफ वह उनकी शैक्षणिक गतिविधियों के तरफ ज्यादा ध्यान दे सकें ।
लेकिन यदि ऐसा होता है तो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार की जमी – जमाई व्यवस्था पर गाज गिर सकती है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इसके लिए निर्देशित किया गया है मूल्यांकन कर इस पर काम किया जाएगा बुढ़वा का जो आपने बताया है उसको दिखवाते हैं। और उसे पर उचित कार्रवाई होगी।
तरुण भटनागर ( कलेक्टर) जिला शहडोल (म .प्र)
