शहडोल / जैतपुर : तो क्या एक – एक हजार में अधीक्षिका ने बेची साइकिल???? , मामला कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का
, तो क्या एक – एक हजार में अधीक्षिका ने बेची साइकिल???? ,
मामला कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का
शहडोल /जैतपुर (निशांत संजय गर्ग)। अब तक तो आपने सर्व शिक्षा अभियान जिला शिक्षा केंद्र के अंतर्गत चल रहे कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कैश बुक व बजट में हेरा फेरी करते हुए देखा या सुना होगा ।
जो की है काफी लंबे समय से चला रहा है और यह रीत अब पुरानी हो चली। वही डिजिटल इंडिया के जमाने में जहां सारे काम ऑनलाइन हो रहे हैं तो वहीं शासकीय सेवा में कार्यरत वेतन की अतिरिक्त कर्मचारी अपनी कमाई का जरिया दूसरे तरीके से बना रहे हैं।
तो वेतन नहीं पड़ती पुरी
दरअसल यह पूरा मामला जिले के जैतपुर क्षेत्र अंतर्गत भठिया के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का है। जानकार सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार खबर सामने आई है कि पिछले साल की साइकिलें जो बची हुई थी उसे भठिया कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की अधीक्षिका के द्वारा एक – एक हजार में बच्चियों को बेच दिया गया है।
जिनमें से एक साइकिल कक्षा 7वीं में अध्यनरत छात्रा सरस्वती गोंड नामक बच्ची के पास है।
ऐसा हम नहीं ऐसा हमारे सूत्र बताते हैं।
जांच के दायरे में पूरा प्रकरण
हालांकि साइकिल बेचने का पूरा मामला जांच के दायरे में आता है। हालांकि है कोई पहला मामला नहीं है इसके पहले भी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की अधीक्षिका के विद्यालय से ऑटो के जरिए साइकिल लोड कर ले जाने का भी मामला सामने आया था।
जिस पर बुढ़ार बीआरसी से बात करने के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई थी।
और आज एक बार फिर पिछले साल की राखी पुरानी साइकिलों को पैसा लेकर बेचने की बात सामने आई है।
यदि इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच की जाए तो सारा मामला खुद-ब-खुद साफ हो जाएगा।
यह भी है विचारणीय
बड़ा सवाल यह उठता है कि जिला शिक्षा केंद्र सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय भठिया चल रहे भर्रेशाही का जिम्मेदार कौन है। और क्या शासन द्वारा वेतन के जो मापदंड तय किए गए हैं क्या वह उल्लिखित कर्मचारियों को पूरी नहीं पड़ रही है।
इसलिए 200 सीटर कस्तूरबा गांधी विद्यालय के संचालन करने वाले लोग व उसकी देखरेख करने वाले खंड समन्वयकों के द्वारा लगातार कहीं ना कहीं कोई ना कोई अनियमितताएं करते रहते हैं।
हालांकि यह कोई एक कस्तूरबा गांधी विद्यालय नहीं है जहां पर ऐसा हुआ है। सूत्रों की माने तो जिला शिक्षा केंद्र में बैठे जिम्मेदार व खंड समन्वयकों की आत्मा इन्हीं बालिका विद्यालयों में कैद है। जिसकी कहानी इतनी लंबी है कि लिखते लिखते पन्ने भर जाएंगे लेकिन कहानी कभी समाप्त नहीं होगी। जो कि हमने इसके पूर्व भी शासन – प्रशासन के समक्ष इनका कच्चा – चिट्ठा निकल चुके है।
इनकी प्रतिक्रिया
आपको जानकारी किसने दी है साइकिल बेचने की नौबत अभी नहीं आई है। हां साइकिल रखी होगी यह बात मैं आपकी मान सकता हूं। जो भी मामला है मेरे संज्ञान में नहीं है आप मुझे पूरी जानकारी दे दीजिए मैं उसको दिखवाता हूं।
अमरनाथ सिंह ( जिला समन्वयक) जिला शिक्षा केंद्र सर्व शिक्षा अभियान जिला शहडोल
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आप प्रमाणित कर दीजिए मैं कार्यवाही करवा दूंगा। यदि ऐसा है तो कार्रवाई जरूर होगी मैं जांच करवाऊंगा।*
सीताराम दुबे ( खंड समन्वयक) जनपद शिक्षा केंद्र बुढार सर्व शिक्षा अभियान जिला शहडोल।
