शहडोल : जर्जर भवन में संचालित शासकीय स्कूल को लेकर पार्षद सिल्लू रजक ने उठाई आवाज, शिक्षकों और बच्चों की पर बना जान का खतरा
जर्जर भवन में संचालित शासकीय स्कूल को लेकर पार्षद सिल्लू रजक ने उठाई आवाज, शिक्षकों और बच्चों की पर बना जान का खतरा
शहडोल (संजय गर्ग)। नगर पालिका परिषद शहडोल के वार्ड क्रमांक 19 में वर्षों से जर्जर भवन में संचालित शासकीय प्राथमिक पाठशाला (आदिवासी कल्याण विभाग), डेवलेपमेंट एरिया शहडोल की स्थिति दिनों-दिन खस्ता होती जा रही है। भवन के हालत इतने खराब हो चुके है कि कभी भी कोई गंभीर हादसा घटित हो सकता है। इसको लेकर वार्ड पार्षद सुशील कुमार रजक ‘सिल्लू’ ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी सोहागपुर को पत्र लिखकर तत्काल विद्यालय को अन्यत्र शिफ्ट करने की माँग की है*।
पार्षद सुशील रजक ने अपने पत्र में बताया कि उक्त विद्यालय में आसपास के क्षेत्र के लगभग 10 से 15 बच्चे शिक्षा प्राप्त करने आते हैं, जिन्हें शिक्षा देने के लिए तीन शिक्षक पदस्थ हैं। लेकिन जिस भवन में यह स्कूल संचालित हो रहा है, वह न केवल जर्जर है, बल्कि उसमें किसी भी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। दीवारों और छतों की हालत इतनी खराब है कि बारिश के समय पानी टपकता है और कभी भी दीवार या छज्जा गिरने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने सुझाव दिया है कि स्कूल को वार्ड क्रमांक 5 स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल विद्यालय, घरौला मोहल्ला, शहडोल के नवीन भवन में शिफ्ट किया जाए, ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उल्लेखनीय है कि उक्त भवन फिलहाल खाली है और वहां पर्याप्त स्थान भी मौजूद है*।
पार्षद सिल्लू ने बताया कि यह मुद्दा केवल भौतिक संरचना का नहीं, बल्कि बच्चों की जान और शिक्षा दोनों से जुड़ा है। यदि जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। इस दौरान पार्षद स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थानीय महिलाओं के साथ विद्यालय भवन का निरीक्षण भी किया, जिसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं। तस्वीरों में विद्यालय की जर्जर स्थिति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। पार्षद सुशील रजक ने शिक्षा विभाग से इस संबंध में शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की मांग की है, ताकि छात्रों की पढ़ाई बिना किसी अवरोध के सुरक्षित स्थान पर जारी रह सके। मोहल्लेवासियों ने बताया कि शाम होते ही जर्जर भवन के पास नशेड़ियों की जमघट लग जाती है। रात भर यहां शराबखोरी और अन्य असामाजिक गतिविधियाँ चलती हैं, जिससे मोहल्ले की महिलाएं और बच्चे डरे-सहमे रहते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों का उसी स्थान पर शिक्षा प्राप्त करना और भी चिंताजनक हो जाता है ।
