S.K. Paswan
ब्रेकिंग न्यूज़
शहडोल / बुढार : एक प्रभारी सब पर भारी...? ,“हे हरि के दास की माया, उस पर संकुल की छाया—अपने ही चहेतो... जैतपुर / बुढार : कुंभकर्णी निद्रा में स्वास्थ अमला , बड़ी दुर्घटना के इंतजार में जिम्मेदार ,क्षेत्र ... शहडोल : पुलिस बल को जनता से बेहतर संवाद स्थापित कर संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के पुलिस अधीक्षक ने... शहडोल : राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से अलंकृत अरुण मिश्र हुए सेवानिवृत्ति , समारोह में विभागीय अधिकारी ए... शहडोल / जैतपुर : एकलव्य आवासीय विद्यालय में आयोजित हुआ नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम उमरिया : अतिथि शिक्षक की भर्ती को लेकर शाहपुर हायर सेकेण्डरी में बवाल , नियम अनुसार समय पर भर्ती न क... शहडोल : मां काली मंदिर सिंहपुर बना लोक न्यास, सर्वसम्मति से गठित हुई पहली कार्यसमिति ,एसडीएम लोक न्य... शहडोल : शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार एमएलबी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में मनाया गया गुरू पूर्... शहडोल / गोहपारू : जनपद सीईओ का दवा नहीं हुआ भ्रष्टाचार स्थानांतरण के बाद भी जम गया जुगाड़ , रोड के स... जैतपुर / शहडोल : तो क्या पुरन कि गुंडागर्दी पर कानून के रखवालो का है नरम रुख , पुलिस अधीक्षक से शिका...

शहडोल:इलाज के अभाव में 11 वर्षीय मासूम ने तोड़ा दम एक बार फिर अस्पताल का कुप्रबंधन चर्चा में ,सड़क दुर्घटना के बाद जयसिंहनगर सिविल अस्पताल से किया गया था जिला अस्पताल रेफर

0 1,654

इलाज के अभाव में 11 वर्षीय मासूम ने तोड़ा दम एक बार फिर अस्पताल का कुप्रबंधन चर्चा में ,

सड़क दुर्घटना के बाद जयसिंहनगर सिविल अस्पताल से किया गया था जिला अस्पताल रेफर 

 

शहडोल (संजय गर्ग)। हमेशा अपने कु प्रबंधन और लचर कार्य प्रणाली से विवादों में घिरा रहने वाला जिलाअस्पताल आज एक बार फिर चर्चा का विषय बना जहां पर लगभग 3:30 घंटे सड़क दुर्घटना से घायल पीड़ितों को इलाज नहीं मिला जिसका नतीजा यह रहा की घायलों में से 11 वर्षीय बालक संदीप पाल ने इलाज न मिलने से दम तोड़ दिया।

परिजनों का आरोप है कि शाम 4:00 बजे से लेकर 7:30 बजे तक कोई भी डॉक्टर जिला अस्पताल के वार्डों में राउंड में नहीं आए। जिसकी वजह से सड़क दुर्घटना में घायल 11 वर्षीय संदीप की मौत हो गई।

पीड़ित के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से अपने घायलों के उपचार के लिए कई बार वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ से कहा गया लेकिन परिजनों को यह कहकर टाल दिया गया कि अभी कोई भी डॉक्टर राउंड पर नहीं है जब डॉक्टर आकर चेक करेंगे उसके बाद ही हम इलाज कर पाएंगे।

लगभग शाम 7:35 मिनट तक कोई भी डॉक्टर घायलों के जांच के लिए वहां नहीं पहुंचे जिसकी वजह से स्टाफ ने उन्हें स्वास्थ्य उपचार के नाम पर केवल ड्रेसिंग करके छोड़ दिया। जिसका परिणाम यह रहा कि शाम 7:40 पर सड़क दुर्घटना में परिवार समेत घायल हुए 11 वर्षीय संदीप की मौत हो गई।

 मामला कुछ इस प्रकार

दरअसल 31 अगस्त 2025 को ददन पाल उम्र 34 वर्ष कुसुम पाल उम्र 33 वर्ष संध्या पाल उम्र 13 वर्ष , मृतक संदीप पाल उम्र 11 वर्ष सभी निवासी ग्राम देवगांव थाना ब्यौहारी के रहने वाले हैं जो की शहडोल से अपने गांव की ओर बाइक से जा रहे थे। इसी बीच लगभग 12:30 बजे करकी टोल प्लाजा के पास सड़क दुर्घटना में पूरा परिवार बुरी तरीके से घायल हो जाता है। इसके बाद सड़क पर घटना देख एंबुलेंस के माध्यम से पूरे परिवार को सिविल अस्पताल जयसिंहनगर प्राथमिक उपचार के लिए ले जाया जाता है जहां पर उपचार के पश्चात शहडोल जिला अस्पताल उनकी हालत को देखकर रेफर कर दिया जाता है। उसके बाद लगभग 4:30 बजे सड़क दुर्घटना में घायल पूरा परिवार जिला अस्पताल पहुंचता है जहां पर घायलों को अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता है।

कुछ घंटे बीतने के पश्चात पीड़ित परिवार के 11 वर्षीय संदीप की हालत बिगड़ने लगतीहै। लेकिन कोई भी डॉक्टर वार्ड में राउंड पर नहीं रहते जिसकी वजह से बच्चे का इलाज नहीं किया जाता है। परिजनों का कहना है कि जब उनके द्वारा बच्चे के इलाज के लिए वहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ से बोला गया तो उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि जब तक डॉक्टर नहीं आएंगे तब- तक हम इलाज नहीं कर सकते। परिजनों ने बताया कि इलाज न मिलने की वजह से 11 वर्षीय संदीप काफी देर तक दर्द से तड़पता रहा और लगभग शाम 7:40 में उसने दम तोड़ दिया।

जब हमारी टीम वहां पहुंची तो वहां पर इमरजेंसी से लेकर वार्ड में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे।

जो कि कहीं ना कहीं डॉक्टर के न रहने से इलाज ना हो पाने का जो आरोप परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाया वह कहीं ना कहीं सही प्रतीत होता है।

 लापरवाही के चलते चली गई मासूम की जान

वहीं इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही में उजाकर हुई है। इतना ही नहीं परिजनों ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि लगातार वहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ को इलाज के लिए परिजन बोलते रहे लेकिन बच्चों को उपचार नहीं दिया गया।

और फिर बच्चों की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन बच्चे के शव को वार्ड से बाहर निकले के लिए परिजनों पर दबाव बनाने लगे। जिससे कि पूरे मामले पर लीपापोती की जा सके। लेकिन परिजनों के विरोध के बाद शव वार्ड में रहा।

 डॉक्टरों की अनुपस्थिति से जा रही जान

हमारी टीम जब जिला चिकित्सालय पहुंची तो वहां आपातकालीन विभाग में भी कोई चिकित्सक मौजूद नहीं थे जिससे वहां उपस्थित मरीज को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा था। वहीं जिला अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति की वजह से मासूम की मौत हो गई।

 अब इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह है कि आखिर मासूम की मौत का जिम्मेदार कौन???????

 इनका कहना

 1. इस संबंध में जब सिविल सर्जन से बात करने के लिए संपर्क किया गया तो उनका फोन नहीं उठा। 

 शिल्पी सराफ ( सी.एस ) कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल शहडोल।

=============================

 2. मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क साधा गया लेकिन उनके द्वारा भी फोन नहीं उठाया गया।

 राजेश मिश्रा ( प्रभारी सीएमएचओ) जिला शहडोल।

Leave A Reply

Your email address will not be published.