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जयसिंहनगर / शहडोल : पंचायत का पेसा कानून बना अतिक्रमण का ब्रह्मास्त्र ……..???? कुछ तुम करो कुछ हम करे आओ मिलकर शासन कि भूमि को हजम करें , जिम्मेदारों की सरफरस्ती में बुलंद अतिचारियों के हौसले

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अवैध कब्जा भाग- 2

 

पंचायत का पेसा कानून बना अतिक्रमण का ब्रह्मास्त्र ……..???? कुछ तुम करो कुछ हम करे आओ मिलकर शासन कि भूमि को हजम करें , जिम्मेदारों की सरफरस्ती में बुलंद अतिचारियों के हौसले

शहडोल (संजय गर्ग)। 24 दिसंबर 1996 को पेसा अधिनियम, लागू किया गया जिसका उद्देश्य अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने रहा। यह अधिनियम ग्राम सभा को सशक्त बनाता है, उन्हें पारंपरिक अधिकारों को मान्यता देता है, और जल, जंगल, और ज़मीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार देता है।

लेकिन सोचिए अगर स्वशासन और ग्राम सभा में लोगों को उनके अधिकारों के लिए सशक्त बनाने वाले यह नियमों का यदि उपयोग अतिक्रमण वह भी जो बड़े_बड़े भूमिया विद्यालय और मंदिरों की भूमियों में हाथ डालने से गुरेज करते हैं भी शासकीय भूमि पर कब्जे की मनसा से ऐसे आधिकारिक नियमों का दुरुपयोग यदि ग्राम पंचायत करने लगे तो उसे जगह का क्या हाल होगा 

धीरे-धीरे कर अतिक्रमणकर्ता ने पैर पसार

ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इन दिनों ग्राम पंचायत करकी में मध्य प्रदेश शासन की 1539 /1/1 रखवा के चौथे भाग जो कि शासकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय के नाम से लगभग 25_से 30 वर्षों पूर्व आवंटित हुई थी लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण कई बार आवेदन देने के बाद भी उक्त भूमि का आज तक सीमांकन न होने के करना लगभग 52 डिसमिल भूमि पर धीरे-धीरे कर अतिचारी अपने पैर पसार रहे हैं। आपको बता दें कि उक्त भूमि शासन की है जिसमें 1982 से शासकीय प्राथमिक शाला का संचालन होता है। साथ ही उक्त खसरा नंबर में भूमि पर आयुर्वेदिक औषधालय 0.202 हेक्टेयर,ग्राम हाट बाजार 0.202 हेक्टेयर , पड़ाव डालने हेतु 0.127 हेक्टेयर और पाठशाल और खेल मैदान के नाम पर 0.202 हेक्टेयर भूमि पहले से ही आरक्षित है। 

बावजूद इसके उक्त शासकीय भूमि जिसकी कीमत वर्तमान समय के हिसाब से करोड़ों में है। उसे पर विजय गुप्ता पिता वीरेंद्र गुप्ता निवासी करकी ने शाला के संचालित विद्यालय की पीछे वाली बाउंड्री से लगी भूमि पर कुछ वर्षों पूर्व एक मंजिला और देखते ही देखते दूसरे मंजिले मकान का अवैध निर्माण कर कब्जा किया है । 

 उसी भूमि पर बने मकान का विजय ने कराया एग्रीमेंट 6 लाख में

एक खंड प्रकाशन के पश्चात पूरे मामले की गहराई तक जाने के लिए एमपी आयुष न्यूज़ की टीम ने ग्राम करकी में मध्य प्रदेश शासन कि अतिक्रमित भूमि 1539/1/ के विद्यालय परिसर में पहुंची पर विजय गुप्ता पिता वीरेंद्र गुप्ता का एक और मामला सामने आया। जहां पर अतिक्रमित भूमि पर स्कूल की बाउंड्री से लगे मकान का एक एग्रीमेंट ₹6 लाख रुपए में विजय गुप्ता पिता वीरेंद्र गुप्ता ने कर के उसको खरीदा हुआ है ऐसी अपुष्ट सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुई। 

 इनके – इनके हैं अवैध कब्जे 

प्राथमिक शाला करकी के प्रधानाध्यापक एवं इस मामले की शिकायतकर्ता ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन की 1539 लगभग 50 डिसमिल उक्त भूमि पर दिलीप गुप्ता समेत एक अन्य गुप्ता ,जिनके द्वारा उक्त भूमि के अंश भाग पर बोर करने का प्रयास किया गया था इसकी शिकायत हुई पर कार्रवाई नहीं। ठीक इसी प्रकार दिलीप गुप्ता पिता रमेश गुप्ता जिसने उक्त भूमि पर अपने व्यक्तिगत शौचालय निर्माण कराया है। जिसकी शिकायत ग्राम पंचायत को की गई थी। लेकिन ग्राम पंचायत के किसी भी जिम्मेदार के द्वारा उक्त विषय को गंभीरता से नहीं लिया गया। और देखते ही देखते शौचालय का निर्माण भूमि पर हो गया 

सबसे विचारणीय सवाल

जब इसी खसरा नंबर में अंकित गुप्ता, ब्रजेश गुप्ता ने आयुर्वेदिक औषधालय के लिए आवंटित भूमि पर अवैध कब्जा किया था तो प्रशासन ने पूरी सक्रियता व तत्परता से अपने संज्ञान में लेते हुए उक्त अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त करने का काम किया जो प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता था लेकिन विद्यालय जैसे उपयोगी भूमि को लेकर के प्रशासन की उदासीनता ग्राम की भूमिका में प्रश्न चिन्ह खड़ी करती हैं 

 मिली भगत का खेल अवैध कब्जे की रेल

मजे की बात तो यह है कि जिस शासन प्रशासन ने ग्राम पंचायत को पैसा जैसे कानून का अधिकार दिया जिससे वह अपनी जल जंगल और जमीन की रक्षा कर सकें । जिसका दुरुपयोग खुलकर ग्राम पंचायत एजेंसी कर रही है। क्योंकि यदि दुरुपयोग ना करती तो इस प्रकार के कब्जे वह भी इतने बड़े शासकीय भूमि पर असंभव सा प्रतीत होता है। प्रधानाध्यापक शिकायतकर्ता ने बताया कि ग्राम पंचायत को अतिक्रमण की जानकारी काफी पहले आवेदन के माध्यम से दे दी गई थी। जिस पर आज दिनांक तक कोई भी कार्यवाही ग्राम पंचायत ने नहीं की। 

जो की कहीं ना कहीं ग्राम पंचायत जिम्मेदारों की निष्क्रिय कार्य प्रणाली इस ओर संकेत कर रही है कि मिली भगत के खेल ने करकी ग्राम के अंदर अतिक्रमण और अवैध कब्जे की रेल बना दी है। 

 अतिक्रमण कर्ताओं को करनी थी नोटिस जारी

ग्राम पंचायत स्तर से इस पूरे अवैध कब्जे को वैध दर्शाया गया है। यदि शिकायतकर्ता के दिए गए आवेदन पर संज्ञान लेते हुए ग्राम पंचायत एजेंसी ने अतिक्रमण कर्ताओं को नोटिस जारी की होती तो शायद ही यह अवैध कब्जा होता। लेकिन ऐसा ना करते हुए ग्राम पंचायत ने इस पूरे मामले को ठंडा बस्ते में डाल दिया है। वहीं दूसरी और पेसा एक्ट कानून का दुरुपयोग कर शासन की करोड़ों की भूमि पर चल रहे अवैध कब्जे के खेल को बढ़ावा दिया गया। 

 सरपंच पति,पंचायत सचिव व पूर्व पटवारी कि जुगलबंदी से राजस्व को करोड़ों का नुकसान 

विश्वत सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुरूप मध्य प्रदेश शासन की करोड़ों की बेश कीमती भूमि पर इस पूरे अवैध कब्जे के मास्टरमाइंड सरपंच पति हरिशरण सिंह राजू एवं अपनी विवादित कार्य प्रणाली को लेकर सुर्खियों में रहने वाले सचिव सुरेंद्र सोनी व पूर्व हल्का पटवारी दद्दू सिंह द्वारा अवैध कब्जे के इस पूरे खेल को अंजाम दिया। दिलीप गुप्ता नामक अतिक्रमणकर्ता ने जब विद्यालय संचालित शासकीय भूमि पर शौचालय निर्माण करना शुरू किया था। तब तहसीलदार द्वारा ग्राम पंचायत सरपंच व सचिव को बन रहे अवैध शौचालय निर्माण पर रोक लगाने एवं कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कुछ दिनों तक निर्माण कर बंद हो गया। जन चर्चाओं के अनुसार फिर कुछ दिनों (होली की छुट्टी के समय) सरपंच पति राजू सिंह ने स्वयं उक्त भूमि पर खड़े होकर अवैध शौचालय का निर्माण करवा दिया। जिससे राजस्व को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। 

जबकि देखा जाए तो प्रशासन के द्वारा महिला सशक्तिकरण को बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायतो में महिलाओं को आगे किया जिससे वह जिम्मेदारी व नेतृत्व सम्हाला सके जिससे सरपंच पति पंचायत के कोई अधिकृत व्यक्ति नहीं है। 

 पटवारी की कर्तव्य निष्ठा पर प्रश्न चिन्ह

वहीं इस पूरे मामले को लेकर सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि बीते 28 अक्टूबर को पटवारी मौका पंचनामा बनाने के लिए अपने हल्का करकी पहुंचे लेकिन उनकी गाड़ी ग्राम पंचायत पर जाकर ठहर गई। सवाल यह है कि मौका पंचनामा तो स्पाट पर ही बन सकता है जो कि पंचायत भवन से मात्र 200 मीटर की दूरी पर है तो फिर पटवारी ग्राम पंचायत में क्या करने गए थे। और फिर ऐसा क्या हुआ कि पूरा दिन ग्राम पंचायत में ही वह बैठे रहे।???? 

 मामले का विचारणीय पहलू

हालांकि है सारे सवाल अपने आप में अवैध कब्जे की सारी कहानी को बयां कर रहे हैं। यह सारी बातें को ध्यान पर रखते हुए यह अति संयोक्ति नहीं है । कि जिम्मेदारों की सरफरस्ती में अतिचारियों के हौसले बुलंद है। 

 समझदार को इशारा काफी

मामले के अपडेट के लिए स्थल निरीक्षण के उपरांत जयसिंहनगर तहसीलदार से उनके चेंबर पर मुलाकात हुई। जिस पर मामले का अपडेट पूछने पर उन्होंने बताया कि। हमारा जांच प्रतिवेदन तैयार है। मैं वहां 1 साल पहले गई थी। तब वहां शौचालय भूमि पर बन रहा था जिसका कार्य रोकने के लिए मैं ग्राम पंचायत के सरपंच व सचिव को बोला था। लेकिन हम क्या करें इसमें ग्राम पंचायत की इंवॉल्वमेंट है। और यही चीज हम अपने जांच प्रतिवेदन में दे रहे हैं। 

खबर में अपडेट के लिए तहसीलदार की है बात स्पष्ट तौर पर यही इशारा करती है कि ग्राम पंचायत एजेंसी इस पूरे अवैध कब्जे के खेल में अग्रणी भूमिका निभा रही है। इतना ही नहीं तहसीलदार के बताएं रूप वह 1 साल पूर्व वहां पर गई थी जब शौचालय बन रहा था लेकिन वर्तमान में एक नहीं दो-दो शौचालय वहां बने हुए हैं। लेकिन अपनी कार्य निष्क्रियता के चलते दोबारा मैडम वहां नहीं पहुंची। तो क्या????? यह मान लिया जाए की राजस्व और ग्राम पंचायत मिलकर पूरे मामले में खेला करने को तैयार है। लेकिन कलम रोड़ा बनी हुई है।

इनकी प्रतिक्रिया

 हमने 2 साल पूर्व जयसिंहनगर राजस्व और जिला कलेक्टर को आवेदन दिया था सीमांकन के लिए लेकिन अब तक सीमांकन नहीं हुआ। रही बात अतिक्रमण कार्यों को नोटिस जारी करने की तो वह हमने नहीं किया था लेकिन हम अभी करवा देते हैं। और मेरे ऊपर जो आरोप लग रहा है। वह सही नहीं है।

 यह कथन आधा महिला सरपंच का है और आधा सरपंच पति राजू सिंह का

 मालती सिंह (सरपंच) ग्राम पंचायत करकी जनपद जयसिंहनगर जिला शहडोल।

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ऐसा नहीं है। मैं स्पॉट पर गया था। प्रधानाध्यापक मेरे साथ में थे। आप चाहे तो पूछ सकते हैं। जांच चल रही है। कुछ कागज हमने प्रधानाध्यापक से मांगे थे जो उन्होंने अभी नहीं दिए हैं। इस वजह से देरी हो रही है। 

 शुभम रावत , (पटवारी) हल्का करकी जयसिंहनगर राजस्व जिला शहडोल

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