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शहडोल : मेले में अश्लीलता की बहार , कहां है धर्म के ठेकेदार , सनातन संस्कृति व ऐतिहासिक विरासत को करता धूमिल ,  स्थानीय लोगों में नगर पालिका परिषद के प्रति आक्रोश

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मेले में अश्लीलता की बहार , कहां है धर्म के ठेकेदार , सनातन संस्कृति व ऐतिहासिक विरासत को करता धूमिल , 

स्थानीय लोगों में नगर पालिका परिषद के प्रति आक्रोश 

 

शहडोल। पौराणिक व ऐतिहासिक परंपरागत लगभग 125 वर्षों से लगातार सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक बना बांणगंगा मेला आज के वर्तमान में डांस बार से ज्यादा और कुछ भी नहीं दिखता। ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि राजा विराट की नगरी शहडोल जहां पर पांडवों ने अपने अज्ञात वर्ष का एक वर्ष यहां व्यतीत किया था। जिसके सक्क्ष आज भी पौराणिक ग्रंथों में निहित है।

इतनी पुरातात्विक कलाकृतियां विराट मंदिर शहडोल पर पाई जाती है। जो की शहडोल को विश्व पटल पर पर्यटन स्थल में विशेष दर्जा दिलाता है। 

लेकिन वर्तमान में प्रशासनिक लापरवाही व नगर पालिका कि अनदेखी से ग्रसित होकर। धीरे-धीरे संस्कृति और सभ्यता की पहचान होकर अश्लीलता और अभद्रता के कुचक्र में फसता जा रहा है।

 अश्लील गाने क्या बने सभ्यता के प्रतीक

दरअसल बाढ़ गंगा मेले जहां पर पुराने समय में लोकगीत भजन गायन हुआ करते थे आज वहां अश्लील गाने सभ्यता का प्रतीक बन गए हैं जैसे पीले पीले होठों से शराब बन जाऊंगी। लड़की पटा ले बबुआ।

 सनातन धर्म की भावनाओं को ठेस

 जिले के बाणगंगा मेला के सांस्कृतिक मंच से अश्लील और फूहड़ प्रस्तुतियों ने सनातन धर्म की भावनाओं को पहुंचाई ठेस।

मकर संक्रांति के अवसर पर हर वर्ष सात दिवसीय मेले का आयोजन होता है इन 7 दिनों में प्रत्येक दिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं जिन कार्यक्रमों में विभिन्न तरह की प्रस्तुतियां दी जाती हैं ,

विगत 4 सालों से इस संस्कृत मंच से अश्लील और फूहड़ प्रस्तुतियां होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है ।

लोगों का कहना है की बाण गंगा मेला और विराट मंदिर हमारी आस्था का प्रतीक है सनातन शक्ती का केंद्र है इसलिए यहां सनातन से जुड़ी ही प्रस्तुतियां होनी चाहिए जो की नहीं हो रही हैं। तो सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर इतने सालों से सनातन धर्म का मजाक बनाया जा रहा है ऐसे में अपने आप को हिंदूवादी और धर्म का ठेकेदार बताने वाले कहां हैं बात किसकी हो रही है समझा जा सकता है।

 मेला मैदान में डांस बार थोड़ी ही दूर पर मयखाने की दुकान

 ऐतिहासिक विराट मंदिर के पास ही कंपोजिट शराब की दुकान है जिस दुकान के सामने खुलेआम शराब का सेवन करते लोग नजर आ रहे हैं जबकि वहां से बच्चे महिलाएं आम नागरिक निकल रहे हैं,

 नगर पालिका परिषद को उस जगह पर बैरिकेड लगाकर उसे कवर कर देना चाहिए था पर ऐसा नगर पालिका परिषद ने नहीं किया। 

 बाहरी व्यक्तियों को ज्यादा हिस्से में दुकान लगाने की छूट

बाणगंगा मेला मैदान में मेले के दौरान हर वर्ष आपने देखा होगा कि जैन कल्पना रेस्टोरेंट नाम से एक दुकान हर वर्ष मेला मैदान के सबसे अधिक क्षेत्रफल में संचालित होने वाली दुकान है।  यहां पर स्थानीय लोगों का आरोप है कि सबसे ज्यादा क्षेत्रफल में इन्हें दुकान खोलने की अनुमति आखिर किसने दे रखी है। वही स्थानीय लोगों को इस 7 दिन के मेले में रोजगार करने के लिए जगह कम पड़ रही है। यह भी एक जांच का विषय है। सूत्रों के अनुसार इस दुकान का संचालन किसी भदौरिया नामक व्यक्ति के द्वारा किया जाता है।

 नगर पालिका की लापरवाही सुरक्षा मापदंडों में अनदेखी

नगर पालिका परिषद के द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए हैं जो की एक चर्चा का विषय बने हुए हैं, मेले में एक भी ऐसा होर्डिंग नहीं है जिसमें कोई इमर्जेंसी हेल्पलाइन नंबर लिखा गया हो, सुरक्षा के माप दंड लिखे गए हो, व्यापारियों की रेट सूची लिखी हो, वाहन स्टैंड की रेट सूची लिखी हो। 

सूत्रों के मुताबिक इन संस्कृत मंचों पर हो रहे कार्यक्रमों का 5 लाख रुपए का टेंडर था जिसमें भ्रष्टाचार करते हुए ऐसी टीमों से प्रस्तुति कराई गई जिनसे नगर पालिका परिषद भ्रष्टाचार कर सके।

 इस तरह के कार्यक्रमों के कारण इस ऐतिहासिक मंच की साख पर भी नगर पालिका परिषद शहडोल प्रश्न चिन्ह लगा रही है। 

 

 स्थानीय लोगों का ऐसा कहना

स्थानीय सनातनी लोगों का कहना है कि यह सनातन का मंच है इसमें सातों दिन भजन, जागरण, पंडवानी आदि तरह के धार्मिक कार्यक्रमों का ही आयोजन होना चाहिए, जिसमें हमारी सनातन संस्कृति की झलक हो। 

पर नगर पालिका परिषद शहडोल के द्वारा सनातन परंपरा के विपरीत फूहड़ , अश्लील और स्तरहीन प्रस्तुतियों का मंचन इस मंच के माध्यम से कराया गया।

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