शहडोल / जयसिंहनगर : सचिव पति ने पत्नी के नाम से ही स्वीकृत करा लिया लघु तालाब सचिव पत्नी , मीना के नाम से दो – दो बार शासकीय योजना का लाभ ,उपयंत्री सचिव सरपंच एक ही थाली के चट्टे-बट्टे
सचिव पति ने पत्नी के नाम से ही स्वीकृत करा लिया लघु तालाब सचिव पत्नी , मीना के नाम से दो – दो बार शासकीय योजना का लाभ ,
उपयंत्री सचिव सरपंच एक ही थाली के चट्टे-बट्टे
जयसिंहनगर (निशांत संजय गर्ग)। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग जहां पर निचले स्तर पर शासन के योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। वहां आज सिर्फ निज स्वार्थ पूर्ति का अड्डा बन कर रह गया है।
हालत यह है कि मामा चाचा भाई बहन पति-पत्नी एक दूसरे के नाम से शासकीय पैसे की होली खेलने में आतुर हैं।
जिन पंचायत में गरीबों के उत्थान के लिए शासन द्वारा लघु तालाब एवं अन्य जरूरी निर्माण कार्य कराए जाते हैं।
वहीं पर कुछ ऐसे भी हैं जो शासन की राशि का गवन करने के लिए अपने ही लोगों के नाम से शासन को चूना लगा रहे हैं।
ऐसा ही मामला जयसिंहनगर जनपद के ग्राम पंचायत बालौडी पश्चिम से सामने आया है ।
जहां पर विस्वत सूत्रों से प्राप्त जानकारी एवम मनरेगा पोर्टल के अनुसार यह ज्ञात हुआ है कि ग्राम पंचायत बालौडी पश्चिम में वर्ष 2024,25 में सचिव पत्नी के नाम लघु तालाब निर्माण की स्वीकृति दी गई थी।
जिसमें व्यापक तौर पर शासकीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए।
सचिव ओम प्रकाश ने निज हित में दो दो बार अपनी पत्नी के नाम शासकीय योजना का लाभ दिलाने में कामयाब रहे
नियमों में सेंधमारी परिवारवाद की साझेदारी
यदि नियमों की बात करें तो अगर कोई पंचायत सचिव अपने पद का दुरुपयोग करके अपनी पत्नी (या किसी भी नजदीकी रिश्तेदार) के नाम पर लघु तालाब या कोई अन्य सरकारी कार्य स्वीकृत करता है, तो यह पंचायती राज नियमों और सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के पूर्णतः विपरीत (अवैध) है। यह सीधे तौर पर हितों के टकराव भाई-भतीजावाद और वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला है। और ऐसा ही कुछ ग्राम पंचायत बालौडी पश्चिम में भी निकलकर सामने आया है। जहां पर परिवारवाद की साझेदारी जनपद के अधिकारियों पर भारी पड़ रही है।
पारदर्शिता का उल्लंघन एवम जनपद के तकनीकी विभाग की पूर्ण सहभागिता
पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत के विकास कार्य (जैसे लघु तालाब निर्माण) ग्राम सभा की अनुशंसा, तकनीकी स्वीकृति और प्रशासनिक नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से होने चाहिए। सचिव द्वारा खुद के परिवार के नाम कार्य स्वीकृत करना इस पारदर्शिता को खत्म करता है।
निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण
वही ग्रामीणों के द्वारा लगातार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है बता दे की यदि शिकायत की प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर सचिव को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया जा सकता है।
इतना ही नहीं जांच समिति द्वारा वित्तीय धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर सचिव को सरकारी नौकरी से स्थायी रूप से बर्खास्त किया जा सकता है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 7 वर्ष का कारावास
फिलहाल इस प्रकार का जो मामला ग्राम पंचायत बलौडी पश्चिम में सामने आया है यदि उसमें निष्पक्षता से जांच की जाती है तो निश्चित तौर पर सचिव के ऊपर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 7 वर्ष का कारावास भी संभव है। साथ ही शासकीय की राशि की रिकवरी भी।
इनका कहना
वही इस संबंध में जब उपयंत्री से जानकारी लेने के लिए फोन लगाया गया तो उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया।
हीरामणि मरावी उपयंत्री जनपद जयसिंहनगर
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ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव ओमप्रकाश द्विवेदी से उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिए फोन किया तो उनका कहना था कि स्वीकृत हुआ होगा मेरा कोई लेना-देना नहीं।
ओमप्रकाश द्विवेदी (सचिव) पूर्व पदस्थापना ग्राम पंचायत बलौड़ी पश्चिम। वर्तमान ग्राम पंचायत बराछ जयसिंहनगर
