शहडोल / अनूपपुर : अजगर नुमा सुरंग खोदकर बकही से निकल रहा काला हीरा , धड़ल्ले से लूट रही संभाग की खनिज संपदा पर क्यों??? मौन बैठा प्रशासन
अजगर नुमा सुरंग खोदकर बकही से निकल रहा काला हीरा , धड़ल्ले से लूट रही संभाग की खनिज संपदा पर क्यों??? मौन बैठा प्रशासन
शहडोल (संजय गर्ग)। गरीबों की जान जोखिम में डालकर कोल माफियाओं द्वारा डंके की चोट पर काले हीरे का अवैध व्यापार चलाया जा रहा है। जिस पर ना तो प्रशासन और ना ही शासन ध्यान दे रहा है। आय दिन लाखों का काला हीरा धरती में अवैध सुरंग खोद कर निकाला जा रहा है।
सूत्रों से हुआ ज्ञात: कोल माफियाओं के सर पर मंत्री का हाथ
शहडोल संभाग के अनूपपुर जिला अंतर्गत ग्राम बकही में कोयले का अवैध उत्खनन का कार्य बेधड़क होकर किया जा रहा है। लेकिन हैरत तो इस बात की है कि, कानून के रक्षकों को छोड़कर आम नागरिकों और क्षेत्र के एक साधारण से बच्चे को भी इन गतिविधियों के विषय में ज्ञात है। अब इसे संबंधित विभागों के सूचनातंत्र की विफलता कहें, लापरवाही कहें या फिर इस अवैध व्यवसाय से मिलने वाले नजरानों का वजन..? जो इस अवैध कारोबार में लगाम नहीं लग रहा है। सूत्रों की माने तो इन माफियाओं को मध्यप्रदेश शासन के एक मंत्री का आशीर्वाद भी प्राप्त है।
पूर्व में हुई घटनाओं से भी नहीं खुल रही हैं प्रशासन की आंखें
विचारणीय है कि, विगत दो वर्ष पूर्व पड़ोसी जिला शहडोल में ही इन माफियाओं के लालच का शिकार जानें हुई थी। जब क्षेत्र के ही 7 लोग अपनी पेट की आग बुझाने के लालच में कोल इंडिया की बंद खदानों में कबाड़ की चोरी के उद्देश्य से घुसे थे। लेकिन, उन्हें क्या पता था कि, वे अपनी मौत से मुलाकात करने करने जा रहे हैं। बंद खदानों में जहरीली गैसों के प्रभाव में आने के कारण उक्त 7 लोग काल के गाल में समा गए। इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर की मीडिया में भी खूब सुर्खियां बिखेरी थी। आनन-फानन में प्रशासन ने कुछ छुटभैया कबाड़ियों पर कार्यवाही कर मामले को पटाक्षेप करने का प्रयास भी किया। जबकि, सरगनाओं को छुट्टे सांडो की तरह छोड़ दिया गया और सात परिवार अभी के आंसू अभी भी नहीं थमे हैं।
गरीबों की जिंदगी से खेल रहे अवैध कारोबार के मास्टरमाइंड
वैसे तो कोयले के इस अवैध व्यवसाय से स्थानीय गरीबों के पेट की आग बुझ जाती है। लेकिन, चंद पैसों की चाह में इनकी जिंदगी हमेशा मौत के साए में रहती है। इस अवैध व्यवसाय से जुड़े कुछ जानकारों की मानें तो, इन मजदूरों की जान की कीमत केवल 2 रुपए किलो की दर से बिकने वाला कोयला है, जिसे कोयले की तस्करी करने वाले मौत के सौदागर बाजार में 20 रुपए की दर से बेच कर अपनी तिजोरियां भरते हैं। अपुष्ट सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इन सौदागरों में जबलपुर के अतीक और मामू, रुंगटा का सोनू , सुरेश यादव और मोनी के नाम प्रमुख हैं। जो परदे के पीछे से इस अवैध कारोबार के मास्टरमाइंड हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो, इन माफियाओं को सरकार में बैठे एक मंत्री का आशीर्वाद भी प्राप्त है।
थाने से महज 10 किलोमीटर दूर पर निकल रहा अवैध काला हीरा
ऐसा कहा जाता है कि, अगर प्रशासन चुस्त हो तो, किसी की इतनी भी मजाल नहीं कि, सड़क पर गिरी हुई सुई भी चोरी हो जाए। लेकिन ऐसी क्या बात है कि, पुलिस थाना चचाई से 8-10 किलोमीटर की दूरी पर ही इस अवैध कार्य को बड़ी बेफिक्री के साथ अंजाम दिया जा रहा है। माफियाओं ने अपने नेटवर्क को मजबूत कर मौत के इस खूनी खेल में संलिप्त हो, अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।
इनका कहना है…
अभी तक तो मेरी जानकारी में नहीं था। पर आपने जानकारी दी है, मैं दिखवाता हूं। अगर ऐसा है तो कार्रवाई निश्चित होगी।
राकेश उईके
थाना प्रभारी, चचाई।
