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शहडोल : गांधी जी के चश्मे के आगे नहीं दिखा झूठ और गलत, लगा दिए आरोप भेज दिए जेल, अपने पावर का इस्तेमाल कर साहब कितने बार देंगे गलत आदेश, जिला बदर वाले मामले में बहुत जल्द एक बार और देना पड़ सकता है जुर्माना , हाई कोर्ट के फटकार के साथ-साथ शहडोल कलेक्टर   को देना पड़ेगा दो लाख का जुर्माना , हाईकोर्ट ने कहा- पीड़ित को मिलेंगे ये पैसे ; शहडोल में युवक पर लगाया था एनएसए ।

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गांधी जी के चश्मे के आगे नहीं दिखा झूठ और गलत, लगा दिए आरोप भेज दिए जेल, अपने पावर का इस्तेमाल कर साहब कितने बार देंगे गलत आदेश, जिला बदर वाले मामले में बहुत जल्द एक बार और देना पड़ सकता है जुर्माना ,

हाई कोर्ट के फटकार के साथ-साथ शहडोल कलेक्टर   को देना पड़ेगा दो लाख का जुर्माना ,

हाईकोर्ट ने कहा- पीड़ित को मिलेंगे ये पैसे; शहडोल में युवक पर लगाया था एनएसए ।

शहडोल (संजय गर्ग) । जबलपुर हाईकोर्ट ने शहडोल कलेक्टर पर 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने अपराधी के बजाय एक बेगुनाह युवक के नाम पर एनएसऐ (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) का आदेश जारी किया था। इसके चलते युवक को एक साल से ज्यादा समय जेल में गुजारना पड़ा।

मामला शहडोल में रहने वाले सुशांत बैस से जुड़ा है। सुशांत के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद सच सामने आया और बेगुनाह युवक जेल से बाहर आ सका। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की बेंच ने मामले में जांच के आदेश दिए है। साथ ही कहा है कि कलेक्टर को यह राशि अपनी जेब से देनी होगी।

कोर्ट ने माना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

दरअसल, शहडोल एसपी ने नीरजकांत द्विवेदी नाम के अपराधी पर एनएसए लगाने की सिफारिश की थी। कलेक्टर ने सुशांत बैस के नाम का आदेश जारी कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कोर्ट ने पीड़ित के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए कलेक्टर डॉ. केदार सिंह पर जुर्माना लगाया। साथ ही

गलत दस्तावेज, गलत जानकारी और उसके सपोर्ट में गलत हलफनामा पेश करने पर कटेम्प्ट की कार्रवाई के आदेश दिए हैं। 25 नवंबर को कलेक्टर को पेश होने के निर्देश दिए।

पिता ने याचिका की दायर, कार्रवाई को गलत बताया

शहडोल जिले के ब्यौहारी के समन गांव में रहने वाले हीरा मणि बैस ने याचिका में बताया कि उनके बेटे सुशांत पर 9 सितंबर 2024 को शहडोल कलेक्टर ने एनएसए की गलत कार्रवाई की। एसपी ने

नीरजकांत द्विवेदी के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई के लिए लिखा था। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि जेल में रखने के लिए बैड इंटेंशन से एनएसए पास किया गया था। इसके लिए एक ही दिन में पूरी प्रक्रिया कर दी गई। मामले पर एडीजे कोर्ट ने सुशांत को जमानत दे दी। सुशांत के जेल से बाहर निकलते ही उस पर एनएसए की कार्रवाई कर दी गई। इसके बाद हर तीन माह में राज्य सरकार ने सुशांत का एनएसए बढ़ाते गए। एक साल तक जेल में रहने के बाद सितंबर 2025 में वह जेल से बाहर आया।

वकील बोले- हाईकोर्ट में गलत हलफनामा दिया

कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से ब्रम्हेन्द्र प्रसाद पाठक ने बताया कि शहडोल कलेक्टर ने मनमानी तरीके से ऑर्डर पास किया था, बल्कि हाईकोर्ट में गलत तथ्यों के साथ गलत दस्तावेज पेश किए हैं। इतना ही नहीं उनके सपोर्ट में जो हलफनामा पेश किए हैं, वह भी गलत है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए, सारे दस्तावेजों की जांच करने पर पाया कि याचिकाकर्ता सही है।

कोर्ट ने कहा- बाबू ऑर्डर लिख रहे हैं, आप साइन कर देते हैं

कोर्ट ने यह भी पाया कि एडिशनल चीफ सेक्रटरी ने जो हलफनामा दिया है, उसमें कहा गया कि यह टाइपिंग एरर है, जो कि उनके क्लर्क राकेश तिवारी की गलती से हुआ है। उनके खिलाफ शोकॉज नोटिस जारी करते हुए विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। एडिशनल चीफ सेक्रटरी की इस बात पर हाईकोर्ट ने यह पाया कि यह तो और भी गंभीर बात है कि बाबू ऑर्डर लिख रहे हैं और आप साइन कर देते हैं। अब जब बात आप पर आ गई तो एक क्लर्क को बलि का बकरा बना रहे हैं। इस पूरे मामले पर हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को आदेशित किया है कि एसीएस गृह विभाग और कलेक्टर शहडोल के खिलाफ अपने स्तर पर विभागीय जांच करें।

आपको बता दें कि इसके पहले भी कलेक्टर केदार सिंह द्वारा पत्रकारों पर जिला बदर की कार्यवाही की गई थी जिस पर पत्रकारों द्वारा स्टे लेकर हाईकोर्ट में अपील किए हैं। पर सवाल यह उठता है कि इंसान से गलती एक बार होती बार-बार गलती को गलती नहीं कहा जाता उसे सोची समझा षड्यंत्र कहा जाता है।

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