S.K. Paswan
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शहडोल / जयसिंहनगर : अवैध कब्जा भाग- 3 !… , पैसा के माई पहाड़ चढ़े वाली कहावत होती चरितार्थ ???? ! वन , पंचायत व राजस्व पर लटकती संदेह की सुई , मामले में विजय के नजराने का ऐंगल , स्कूल की भूमि का नहीं निपटा कब्जा प्रकरण बोली एसडीएम जल्द से जल्द होगी कार्यवाही , सेमरा में वन विभाग के मुनारे को तोड़कर भवन निर्माण

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अवैध कब्जा भाग- 3

पैसा के माई पहाड़ चढ़े वाली कहावत होती चरितार्थ ???? ! वन , पंचायत व राजस्व पर लटकती संदेह की सुई , मामले में विजय के नजराने का ऐंगल ,

स्कूल की भूमि का नहीं निपटा कब्जा प्रकरण बोली एसडीएम जल्द से जल्द होगी कार्यवाही , सेमरा में वन विभाग के मुनारे को तोड़कर भवन निर्माण 

शहडोल । कहते हैं जेब में यदि वज़न हो तो आप कुछ भी कर सकते हैं। दुनिया की कोई भी ताकत आपको आपके अरमान पूरे करने से नहीं रोक सकती। लेकिन सबसे जरूरी बात की आप अपने धन बल का उपयोग सत्कार्यों में करते हैं या इसका दुरुपयोग कब्जे व शासकीय नियमों की काया पलट करने के लिए होता है। जिससे आपकी न सिर्फ मानो विकृतियों का पता चलता है अपितु समाज में आपका चाल चरित्र और चेहरा प्रदर्शित होता है।
ठीक ऐसा ही कुछ मामला जय सिंह नगर जनपद के करकी मैं सामने आया है जहां पर नव धनाड्य पूंजीपतियों के धनबल के प्रभाव से जहां एक तरफ राजस्व के नियम धूल चाट रहे हैं तो दूसरी ओर राजस्व में बैठे जिम्मेदार मौन साधक बनकर शासन की लगभग 50 डिसमिल 1539 /1/1 भूमि को अवैध कब्जा धारी को तोहफे के रूप में सौंप दी गई है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि लगातार अखबारों के पन्नों की सुर्खियां बना विजय गुप्ता पिता वीरेंद्र गुप्ता निवासी ग्राम करकी समेत अन्य कब्जाधारियों ने शासन की करोड़ों की भूमि को बंदर बांट करने का मामला हमने प्रशासन के समक्ष रखा। लेकिन कार्यवाही तो दूर स्थल निरीक्षण करना जयसिंहनगर राजस्व को नागवारा साबित हो रहा है।

राजस्व की निष्क्रियता में पंचायत में लगाए चार – चांद 

ग्राम करकी के अवैध कब्जा प्रकरण में राजस्व विभाग और पंचायत दोनों ही संदिग्धता के दायरे में नजर आ रहे हैं।
पहले आप पहले आप की कहानी ऐसी है कि इसकी टोपी उसके सर पहननें ने का काम चल रहा है। अब तक ग्राम पंचायत की ओर से अतिक्रमण कर्ताओं को नोटिस जारी नहीं की गई है। जबकि इसी भूमि के खसरे 1539/1/1 अंश भाग में एक अवैध कब्जे को पंचायत की नोटिस के बाद जयसिंहनगर राजस्व ने धराशाही किया है। तो फिर विजय के अवैध कब्जे पर अतिक्रमण मुक्त कार्यवाही करने के लिए क्यों राजस्व के हाथ पांव फूल रहे हैं यह बात समझ के पर है। कहीं ना कहीं पूरा मामला अपनों पर करम और गैरों पर सितम वाली कहानी बयां करता सा दिख रहा है।

तो क्या नजराने की अदृश्य डोर ने पकड़ी कार्यवाही की बाह
विश्वत सूत्रों की माने तो अवैध अतिक्रमण के पूरे खेल में कब्जाधारी विजय गुप्ता वीरेंद्र गुप्ता के नज़राने की अदृश्य डोर जिसमें ग्राम पंचायत जिम्मेदारों से लेकर राजस्वकर्मियों को एक सूत्र में बांधकर रखा हुआहै। जिसकी वजह से कार्यवाही नहीं हो पा रही है। हालांकि यह नजराना कितने का है यह हम अभी खंगाल रहे हैं। जिस पर अगले अंक में विस्तार से बात की जाएगी फिलहाल पूरा मामला जांच समेत ईमानदारो के जमीर पर नज़राने की लगी काली स्याही के आरोपों को कार्यवाही न करने कि बात बल प्रदान कर रही है।

कुछ ऐसी सेमरा में बने भवन निर्माण की कहानी
प्राथमिक विद्यालय करकी के शासकीय भूमि पर बने विजय गुप्ता पिता वीरेंद्र गुप्ता के मकान का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि। करकी और सेमरा के बीच में छूदा बीट में बने विजय गुप्ता का एक और भवन निर्माण से संबंधित प्रकरण सामने आया है।
जिसमें विश्वस्त सूत्रों के मध्य से यह जानकारी सामने आई है कि शहडोल रोड के किनारे बना निर्माणाधीन भवन जिसमें वन विभाग के नियमों की अनदेखी कर भवन का निर्माण कराया जा रहा है। इतना ही नहीं वन विभाग के बने मुनारे को भवन निर्माण के दौरान तोड़ दिया गया था। जिसे बाद में मकान निर्माण के साथ दोबारा बनाया गया। इतना ही नहीं सूत्र यह भी कहते हैं कि रेंजर दिनेश कुमार पटेल के द्वारा टूटे हुए मुनारे का मौका पंचनामा खुद बनाया गया। लेकिन कार्यवाही नहीं कि बल्कि वहीं पर दोबारा मुनारा बनाया गया लगभग 5 मीटर की दूरी पर भवन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

यह कहते हैं वन नियम
यदि वन संरक्षण अधिनियम 1980 ना की 73 में वन क्षेत्र की सीमा से भवन निर्माण की दूरी के लिए सामान्य नियमों का कहना है कि वन आरक्षित क्षेत्र से भवन सड़क होटल आदि का निर्माण 50 से 100 मीटर तक की दूरी होनी चाहिए। लेकिन मुनारे से 5 मीटर की दूरी पर निर्माण चल रहा है।

ऐसा कहते हैं रेंजर
इस संबंध में जब अपनी जानकारी की पुष्टि हेतु वन रेंजर दिनेश कुमार पटेल से दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर जानकारी जुटाई तो उनका कहना था कि। हां मुनारा ध्वस्त करने का एक मामला आया था। अभी मैं दिखवा लेता हूं कि उसके क्या पोजीशन है।

बीट गार्ड के कथन में संशय
जब इस विषय को लेकर छूदा बीट गार्ड अमित नापित से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह मुनारा ध्वस्त करने कि घटना मार्च 2025 की है उसे समय मेरी ड्यूटी उमरिया में लगी हुई थी। मैं अभी आया हूं हां लेकिन वह जो निर्माण चल रहा है वह मुनारे से 5 मीटर पर है। पर नक्शे में एंट्रेंचमेंट दिख रहा है। जब उनसे पूछा गया कि निर्माण सही हो रहा है या नहीं तो उन्होंने कहा कि इस पर में कोई बात नहीं करूंगा। लेकिन मुनारा वहीं बना हुआ है। बिटगार्ड का यह कथन कहीं ना कहीं पूरे मामले में कई नई कड़ियों को जोड़ रहा है। जैसे की -जब भवन निर्माण वन मुनारे से 5 मीटर पर हो रहा है तो उसे रोका क्यों नहीं गया और जब मुनारा टूटा मौका पंचनामा हुआ। तो फिर निर्माण कार्य करवा रहे विजय के ऊपर कार्यवाही क्यों नहीं की गई। कथन में सबसे बड़ा शक करने का सवाल यह है कि। मार्च में घटित हुई इस घटनाक्रम के दौरान जब बीट गार्ड की ड्यूटी उमरिया में लगी हुई थी तो उन्हें इस घटना की जानकारी कैसे हुई। और जानकारी हुई तो ठीक वह यह कैसे कह सकते हैं कि मुनारे से बाहर निर्माण हो रहा है। जबकि जमीन का सीमांकन नहीं हुआ राजस्व ने इसमें भी अपनी उंगली सीधी कर ली।

कहीं नहीं है पूरा मामला पैसा के माई पहाड़ चढ़े वाली कहावत को चरितार्थ करता हुआ नजर आ रहा है। अटपटे कथनों से वन विभाग के जिम्मेदार खुद ही अपने ऊपर लग रहे नजरानों के आरोपों को सिद्ध कर रहे हैं इसमें कोई अतिसंयोक्ति नहीं है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया
जो भी वहां निर्माण हुआ है कभी प्रशासन की अनुमति ली ही नहीं गई है। मैं तहसीलदार को बोल देती हूं। मौका पंचनामे के प्रतिवेदन के लिए। जो भी तब सामने आएंगे उसे पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी।
काजोल सिंह (एसडीम) जयसिंहनगर राजस्व जिला शहडोल (म .प्र.)

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