शहडोल (संजय गर्ग) । आज शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धुरबार में तृतीय सोपान स्काउट गाइड जांच शिविर समापन समारोह आयोजित किया गया। जिसमें अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा भी मौजूद रहे।
*स्काउट का उद्देश युवकों की शारीरिक मानसिक तथा आध्यात्मिकता का विकास*
अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कहा कि स्काउट गाइड राष्ट्र और जनता की
सेवा भावना का प्रतीक है। स्काउट गाइड का उद्देश्य नवयुवकों की पूर्ण शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक क्षमताओं का विकास करना है, जिससे कि वे एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी क्षमताओं के द्वारा स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर योगदान कर सकें। स्काउट गाइड सत्यवादी, सहानुभूतिपूर्ण, संवेदनशील, देशभक्त,कर्तव्य-परायण, आज्ञा-पालक, दयालु एवं सहनशील होना सिखाता है।
तथा नवयुवकों को राष्ट्र एवं समाज के प्रति निष्ठावान एवं कर्तव्यनिष्ठ बनाता
है।
सर्व धारणा के हित को ध्यान में रखकर स्काउट करता काम
स्काउट गाइड प्रत्येक कार्य समाज हित की दृष्टि से होना सिखाता है। उन्होंने कहा कि सभी व्यक्तियों को दूसरों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। स्काउट गाइड सर्वसाधारण का हित ध्यान में रखकर अपने कर्तव्य का पूर्ण रूप से पालन करना सिखाता है। अपर कलेक्टर ने कहा कि स्काउट गाइड सभी को नि:स्वार्थ भाव से मानवता की सेवा, जनता में स्वावलम्बन और आत्म-निर्भरता की भावनाओं को जाग्रत करती है। स्काउट गाइड का सबसे बड़ा लाभ यह है कि छोटे-छोटे बालकों में सेवा-धर्म का उदय होता है, वे सबके कल्याण में अपना कल्याण समझने लगते हैं, समाज का हित उनका अपना हित होता है। इस प्रकार उनका चरित्र एक आदर्श चरित्र बन जाता है। वे देश के कर्मठ और मनस्वी नागरिक बन जाते हैं। देश की सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और वैभव, ऐसे ही नागरिकों पर आधारित होता है।
शिविर में स्काउट गाइड छात्रा सुश्री सुचिता द्विवेदी ने अपर कलेक्टर को जानकारी दी कि इस पांच दिवसीय सोपान स्काउट गाइड शिविर में बिना बर्तन के भोजन बनाना, घायल को पट्टी बाँधना, प्रारम्भिक चिकित्सा करना, घायल को अस्पताल पहुँचाना, गाँठ लगाना, झंडा लगाना, मार्ग ढूंढना, सिग्नल देना, सामयिक घर बनाना, सामयिक सड़क बनाना, आदि की शिक्षाएं दी गई तथा इन सभी विषयों की कई परीक्षायें उत्तीर्ण करनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि हम सभी छात्र एक डायरी रखते है, जिसमें अपने दैनिक कार्यक्रम का उल्लेख करते है, स्वास्थ्य रक्षा के लिये सभी तरह के खेल खिलाये जाते हैं। सभी शिक्षायें समाज सेवा से भी सम्बन्धित हैं और सैनिक शिक्षा से भी। सैनिक के लिये ये सभी बातें जानना अत्यन्त आवश्यक होता है।
1909 में हुई स्काउट एवं गाइड की शुरुआत
कार्यक्रम में एएसओसी संभाग शहडोल डॉ. एसएन पांडेय ने जानकारी दी कि भारत स्काउट एवं गाइड की शुरुआत वर्ष 1909 में हुई, तथा आगे चलकर भारत वर्ष 1938 में स्काउट आंदोलन के विश्व संगठन का सदस्य भी बना। वर्ष 1911 में भारत में गाइडिंग की शुरुआत हुई, तथा 1928 में स्थापित गर्ल गाइड्स तथा गर्ल स्काउट्स के विश्व संगठन में भारत ने एक संस्थापक सदस्य की भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि स्काउट्स एवं गाइड्स एक स्वयंसेवी, गैर-राजनीतिक, शैक्षिक आंदोलन है, जो हर एक नव जवान को बिना किसी भी तरह के रंग, मूल अथवा जाति भेद के मानवता की सेवा करने का मौका प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धुरबार में तृतीय सोपान स्काउट गाइड पांच दिवसीय जांच शिविर आयोजित की गई तथा यहां स्काउट गाइड के छात्र छात्राओं को विभिन्न गतिविधियों से प्रशिक्षित किया गया।
कार्यक्रम इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में एलटीएस शिविर संचालक बीएल चौधरी एवं नंदन श्रीवास्तव, प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धुरवार अनुराग जैन, ट्रेनर राकेश पांडेय, महादेव सिंह, अमर बहादुर सिंह, मानसरोवर पांडेय एवं चंदा सिंह सहित शिक्षक गण एवं स्काउट गाइड के छात्र उपस्थित थे।
