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शहडोल : ग्रामनरगी में शुक्ला परिवार द्वारा आयोजित किया गया सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा

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ग्रामनरगी में शुक्ला परिवार द्वारा आयोजित किया गया सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा

शहडोल (संजय गर्ग) । श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आरंभ हुआ।
शाम 4 बजे बड़ी संख्या में श्रद्धालु आयोजन स्थल पर एकत्रित हुए। श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई।
बैण्ड बाजे के साथ शुरू हुई कलश यात्रा में बड़ी संख्या में छोटे-छोटे बच्चे, बहने व महिलाओं व सभी विप्र बंधुओं ने हिस्सा लिया।
सुबह के समय कलश के साथ महिला पुरुषों ने बाजे-गाजे के साथ कलश यात्रा निकाली।
कलश यात्रा में सबसे आगे भागवत पुराण को सर पर उठाये शुक्ला परिवार के वरिष्ठ विजय शुक्ला , गुरु परिवार के सभी सदस्य, गद्दी सेवक और समाज के बंधू चल रहे थे।
कलश यात्रा में पीले वस्त्र धारण की हुई कन्याएं व महिलाएं सिर पर कलश धारण किए हुए मंगलगीत गाते हुए चल रही थीं। कलश यात्रा ग्राम नरगी के सरफा नदी से निकलकर ठाकुर बाबा प्रांगण , हनुमान मंदिर धाम के ही विभिन्न मार्गो से निकाली गयी।
कलश यात्रा का जगह- जगह स्वागत किया गया।

कलश यात्रा में श्रद्धालुओं के जयकारे से गुंजा ग्राम

शोभा यात्रा का जगह-जगह लोगो ने पूरी आस्था और गुरूदेव के जयकारे के साथ पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के जयकारे से वातावरण गुंजायमान हो गया।
राधे-राधे के उद्घोष से माहौल भक्ति के रस में डूब गया। इसके बाद मंत्रोच्चारण के बीच पुरोहितों द्वारा कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। आचार्य कथा व्यास अनिरुद्ध आचार्य महाराज ने विधिविधान पूर्वक पूजन संपन्न कराया, श्रीमद भागवत कथा के आयोजक सुशील शुक्ला ने सभी भक्तों को अधिक संख्या में उपस्थिति होने हेतु आहवान किया। पंडित श अनिरुद्ध आचार्य महाराज (लक्ष्मण बाग रीवा वाले) के व्यास पीठ पर आसन होने के पश्चात् माल्यापर्ण कर,उपरणा (शाल ) ओढ़ाकर स्वागत किया गया ।माहात्म्य पर बोलते हुए पंडित कथा व्यास आचार्य महाराज ( लक्ष्मण बाग रीवा वाले) ने कहा कि बिनु परतीती होई नहीं प्रीति अर्थात माहात्म्य ज्ञान के बिना प्रेम चिरंजीव नहीं होता, अस्थायी हो जाता है। धुंधकारी चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मसात कर लेें तो जीवन से सारी उलझने समाप्त हो जाएगी। द्रौपदी, कुन्ती महाभागवत नारी है। कुन्ती स्तुति को विस्तारपूर्वक समझाते हुए परीक्षित जन्म एंव शुकदेव आगमन की कथा सुनाई। अंत में संगीत एवं झांकी ने सबको कृष्ण रंग में सराबोर कर दिया। पश्चात गौकर्ण की कथा सुनाई गई।

महाराज ने समझाया कथा का महत्व
शास्त्री महाराज ने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य व देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं।
आचार्य श्रीमदभागवत कथा के महत्व का किया वर्णन भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है आवश्यकता है निर्मल मन ओर स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानन्द की प्राप्ति होती है। भागवत श्रवण प्रेतयोनी से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमदभागवत कथा सुननी चाहिए। भागवत श्रवण मनुष्य केे सम्पूर्ण कलेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने अच्छे ओर बुरे कर्मो की परिणिति को विस्तार से समझाते हुए आत्मदेव के पुत्र धुंधकारी ओर गौमाता के पुत्र गोकरण के कर्मो के बारे में विस्तार से वृतांत समझाया ओर धुंधकारी द्वारा एकाग्रता पूर्ण भागवत कथा श्रवण से प्रेतयोनी से मुक्ति बताई तो वही धुंधकारी की माता द्वारा संत प्रसाद का अनादर कर छल.कपट से पुत्र प्राप्ती ओर उसके बुरे परिणाम को समझाया।मनुष्य जब अच्छे कर्मो के लिए आगे बढता है तो सम्पूर्ण सृष्टि की शक्ति समाहित होकर मनुष्य के पीछे लग जाती है ओर हमारे सारे कार्य सफल होते है। ठीक उसी तरह बुरे कर्मो की राह के दौरान सम्पूर्ण बुरी शक्तियॉ हमारे साथ हो जाती है। इस दौरान मनुष्य को निर्णय करना होता कि उसे किस राह पर चलना है। छल ओर छलावा ज्यादा दिन नहीं चलता। छल रूपी खटाई से दुध हमेशा फटेगा। छलछिद्र जब जीवन में आ जाए तो भगवान भी उसे ग्रहण नहीं करते है- निर्मल मन प्रभु स्वीकार्य है। छलछिद्र रहित ओर निर्मल मन भक्ति के लिए जरूरी है।पहले दिन भगवान के विराट रूप का वर्णन किया गया। इसे सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। भजन, गीत व संगीत पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे।
श्रीमद भागवत कथा के इस पावन अवसर पर प्रमुख श्रोता के रूप में त्रिवेणी – शंकरदयाल शुक्ला, आयोजक विजय शुक्ला, संतोष शुक्ला, सुशील शुक्ला, सुनील शुक्ला एवं समस्त शुक्ला परिवार के सदस्य , सनातन धर्म प्रेमी, गुरु परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे |

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